खडकवासला-फुरसुंगी सुरंग परियोजना दो साल में पूरी होने की उम्मीद, 370 हेक्टेयर जमीन के उपयोग पर बनेगी नीति

Pune Water Management Policy Update: खडकवासला-फुरसुंगी सुरंग परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है और दो साल में पूरी हो सकती है। इसके बाद नहर की जमीन के उपयोग और जल प्रबंधन पर सरकार नई नीति बनाएगी।
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खड़कवासला टनल प्रोजेक्ट पुणे (सौ. सोशल मीडिया )
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Khadakwasla Fursungi Tunnel Project: खडकवासला क्षेत्र में खडकवासला-फुरसुंगी भूमिगत सुरंग परियोजना का कार्य अत्यंत तीव्र गति से चल रहा है और आगामी दो वर्षों में इसके पूर्ण होने की संभावना है। जल संसाधन मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने विधानसभा में यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि इस परियोजना के पूर्ण होने के पश्चात खडकवासला बांध से निकलने वाली लगभग 30 से 32 किलोमीटर लंबी पुरानी नहर की भूमि के पुनः उपयोग के संबंध में सरकार एक ठोस नीति तैयार करेगी। दौंड के विधायक राहुल कुल और पुरंदर के विधायक विजय शिवतारे द्वारा लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का उत्तर देते हुए मंत्री ने यह स्पष्टीकरण दिया।

विधायक राहुल कुल ने मांग की थी कि सुरंग का निर्माण पूरा होने के बाद नहर की रिक्त भूमि का उपयोग मेट्रो परियोजना या सड़कों के विस्तार के लिए किया जाए। मंत्री विखे पाटिल ने बताया कि पुरानी नहर के समीप लगभग 370 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध है। वर्तमान में जल संसाधन विभाग ने उस क्षेत्र से अतिक्रमण हटाकर जमीन को सुरक्षित करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है।

ठोस नीति तैयार करेगी सरकार

  • सुरंग का निर्माण पूर्ण होने के बाद निचले क्षेत्रों के किसानों को भी पर्याप्त जल उपलब्ध हो सकेगा। इसके अतिरिक्त, मुलशी क्षेत्र के टाटा बांध से पानी लेने के संबंध में राज्य सरकार की टाटा पावर के साथ चर्चा चल रही है, जिसमें उन्होंने सैद्धांतिक रूप से सहमति व्यक्त की है।
  • सरकार का प्रयास है कि कम से कम 7 से 8 टीएमसी पानी प्राप्त किया जाए, जिस पर आगामी दो-तीन महीनों में अंतिम निर्णय होने की संभावना है। साथ ही, दौंड, श्रीगोंदा और कर्जत तालुका के गांवों में जल संकट को दूर करने के लिए कोपा बांध को बैराज में बदलने और बड़े बैराज बनाने का प्रस्ताव भी तैयार किया जा रहा है। चर्चा के दौरान जल संसाधन मंत्री ने पुणे मनपा को कड़ी चेतावनी भी दी।
  • उन्होंने कहा कि पुणे शहर के लिए 16 टीएमसी पानी का कोटा स्वीकृत है, लेकिन वर्तमान में 22 से 23 टीएमसी पानी का उपयोग कर रही है, नियमानुसार, मनपा जितना पानी लेती है, उसे उसी अनुपात में रिसाइकिल (पुनर्चक्रण) कर खेती के लिए उपलब्ध कराना अनिवार्य है।
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