
शी जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Gaza Board of Peace: गाजा में शांति स्थापित करने की कोशिशों के बीच चीन ने अमेरिका को एक बड़ा कूटनीतिक झटका दिया है। बुधवार, 21 जनवरी 2026 को चीन ने स्पष्ट कर दिया कि वह डोनाल्ड ट्रंप के महत्वाकांक्षी ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल नहीं होगा। बीजिंग का यह फैसला उस समय आया है जब ट्रंप स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वैश्विक आर्थिक मंच (WEF) में इस बोर्ड को औपचारिक रूप देने की तैयारी कर रहे हैं।
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि चीन हमेशा से ‘सच्चे बहुपक्षवाद’ का समर्थक रहा है और संयुक्त राष्ट्र (UN) को केंद्र में रखने वाली अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की रक्षा करता रहेगा। चीन की नाराजगी की मुख्य वजह ट्रंप का वह बयान है जिसमें उन्होंने संकेत दिया था कि ‘बोर्ड ऑफ पीस’ भविष्य में संयुक्त राष्ट्र की जगह ले सकता है।
बीजिंग ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यदि यह बोर्ड UN के संरक्षण और उसके चार्टर के सिद्धांतों के तहत नहीं है, तो यह उनके लिए किसी काम का नहीं है।
गाजा में इजरायल-हमास युद्ध की निगरानी के लिए बनाए जा रहे इस बोर्ड को लेकर दुनिया भर में मिली-जुली प्रतिक्रिया मिल रही है। रिपोर्ट के अनुसार, अब तक 10 से भी कम वैश्विक नेताओं ने इसमें शामिल होने का निमंत्रण स्वीकार किया है। कई प्रमुख यूरोपीय देशों ने भी या तो इसमें शामिल होने से मना कर दिया है या अभी तक कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई है।
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ट्रंप प्रशासन द्वारा प्रस्तावित यह नई व्यवस्था वैश्विक राजनीति में अराजकता के रूप में देखी जा रही है। चीन का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्थिति चाहे कितनी भी बदल जाए UN चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून ही संबंधों के मूलभूत मानदंड होने चाहिए। चीन के इस इनकार ने ट्रंप के उस ‘साइनिंग सेरेमनी’ पर सवालिया निशान लगा दिया है जिसे वे दावोस में भव्य तरीके से आयोजित करना चाहते थे।






