
मार्क कार्नी ट्रम्प मीटिंग, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
US Canada News In Hindi: उत्तरी अमेरिका के दो सबसे बड़े पड़ोसियों, संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा के बीच द्विपक्षीय संबंधों में एक ऐसा मोड़ आया है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। हालिया घटनाक्रमों से स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि कनाडा की मार्क कार्नी सरकार इस समय अमेरिका के भारी दबाव में है।
एक के बाद एक मिले तीन बड़े रणनीतिक झटकों ने प्रधानमंत्री मार्क कार्नी को अपनी सख्ती छोड़कर नरमी बरतने और समझौते का रास्ता अपनाने पर मजबूर कर दिया है।
कनाडा के लिए सबसे बड़ा झटका राजनीतिक मोर्चे पर लगा है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टीम ने गुप्त रूप से उस समूह से मुलाकात की जो कनाडा के तेल-समृद्ध प्रांत ‘अल्बर्टा’ को देश से अलग करने की मांग कर रहा है। गौरतलब है कि अल्बर्टा कनाडा का सबसे बड़ा तेल और गैस उत्पादक क्षेत्र है और इसकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है।
इस खबर ने ओटावा में हड़कंप मचा दिया जिसके बाद कनाडा सरकार रक्षात्मक मुद्रा में आ गई। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने खुद ट्रंप को फोन कर कनाडा की संप्रभुता का सम्मान करने और आंतरिक मामलों में दखल न देने की अपील की।
रक्षा के क्षेत्र में भी कनाडा का रुख पूरी तरह बदला हुआ नजर आ रहा है। सूत्रों का कहना है कि कनाडा ने अमेरिका से 14 अतिरिक्त F-35 लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए चुपचाप एडवांस पेमेंट कर दिया है।
दिलचस्प बात यह है कि सार्वजनिक रूप से कनाडा ने इस डील को रद्द करने की संभावना जताई थी लेकिन अंदरखाने भुगतान करना यह दर्शाता है कि मार्क कार्नी प्रशासन अमेरिका को नाराज करने का जोखिम नहीं उठा सकता। यह कदम बताता है कि कनाडा अब रक्षा मामलों में भी अमेरिका के सामने सख्ती दिखाने की स्थिति में नहीं रह गया है।
तीसरा झटका उस समय लगा जब डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका और कनाडा को जोड़ने वाले रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘गॉर्डी होवे इंटरनेशनल ब्रिज’ के उद्घाटन को रोकने की धमकी दी। यह पुल अमेरिका के मिशिगन राज्य के दक्षिणी डेट्रॉइट और कनाडा के ओंटारियो के विंडसर शहर को जोड़ता है और दोनों देशों के बीच अरबों डॉलर के व्यापार के लिए बेहद जरूरी है।
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ट्रंप की इस खुली धमकी के बावजूद कनाडा सरकार की ओर से कोई कड़ा विरोध दर्ज नहीं कराया गया। कनाडा की यह चुप्पी और नरमी साफ दर्शाती है कि वह फिलहाल अमेरिका से सीधे टकराव के बजाय शांत रहने और समझौते का रास्ता चुन रही है।






