BRICS में बड़ी दरार! ट्रंप के डर से झुका साउथ अफ्रीका, ईरान को लेकर लिया चौंकाने वाला फैसला

BRICS Naval Exercise: ब्रिक्स के पहले नौसैनिक अभ्यास 'विल फॉर पीस' पर ट्रंप का भारी दबाव दिख रहा है। साउथ अफ्रीका ने ईरान को पीछे हटने को कहा, लेकिन ईरानी युद्धपोतों ने सबको चौंका दिया।
Major rift in BRICS! South Africa bows to Trump's pressure, makes a surprising decision regarding Iran.
BRICS युद्धाभ्यास में ट्रंप की सेंध, फोटो (सो. एआई डिजाइन)
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BRICS Exercise News In Hindi: दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन में 13 जनवरी से शुरू हुआ 'विल फॉर पीस' युद्धाभ्यास BRICS देशों का पहला ऐसा साझा सैन्य प्रयास है जिसने पश्चिमी देशों को असहज कर दिया है,। चीन द्वारा होस्ट किए जा रहे इस अभ्यास में रूस, यूएई और साउथ अफ्रीका के जहाज शामिल हैं लेकिन भारत ने खुद को इस सैन्य युद्धाभ्यास से दूर रखा है।

ईरान पर पीछे हटने का दबाव और पलटवार

इस पूरे घटनाक्रम में ईरान सबसे बड़ा केंद्र बिंदु बनकर उभरा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप के सख्त रुख और संभावित अमेरिकी कार्रवाई के डर से साउथ अफ्रीका ने आखिरी वक्त पर ईरान से अपनी भूमिका सीमित करने या पूरी तरह पीछे हटने का अनुरोध किया था। प्रिटोरिया सरकार चाहती थी कि ईरान या तो हट जाए या केवल एक 'पर्यवेक्षक' (Observer) के रूप में रहे। शुरुआत में ईरान ने इस पर सहमति जताई थी, लेकिन मंगलवार को स्थिति बदल गई। ईरान का एक युद्धपोत रूस, चीन और यूएई के जहाजों के साथ समुद्र में युद्धाभ्यास के लिए निकलता देखा गया जिसे पश्चिमी दबाव को एक खुली चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। ईरान ने इस अभ्यास के लिए तीन युद्धपोत भेजे हैं जिनमें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का एक जहाज भी शामिल है जो पहले से ही पश्चिमी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है।

ट्रंप का 'टैरिफ वार' और साउथ अफ्रीका की मजबूरी

साउथ अफ्रीका इस समय 'दो पाटों' के बीच फंसा हुआ है। एक तरफ वह BRICS के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाना चाहता है, तो दूसरी तरफ डोनाल्ड ट्रंप को नाराज करने का जोखिम नहीं उठा सकता। ट्रंप ने पहले ही साउथ अफ्रीका पर 30 फीसदी टैरिफ लगा दिया है और रामाफोसा सरकार पर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा में विफल रहने का आरोप लगाया है।

इतना ही नहीं, ट्रंप ने यह चेतावनी भी दी है कि यदि BRICS देशों ने डॉलर के विकल्प को बढ़ावा देने की कोशिश की तो उन पर 100 फीसदी टैरिफ लगाया जाएगा। अमेरिकी रिपब्लिकन सीनेटर जिम रिश ने तो साउथ अफ्रीका के इस कदम को अमेरिका के प्रति "खुली दुश्मनी" तक करार दिया है।

क्या BRICS की एकजुटता में दरार है?

इस युद्धाभ्यास ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आर्थिक गठबंधन के रूप में बना BRICS अब एक सैन्य ब्लॉक में तब्दील हो रहा है? हालांकि, दक्षिण अफ्रीका के उप रक्षा मंत्री बंटू होलोमिसा ने स्पष्ट किया है कि यह अभ्यास किसी देश के खिलाफ नहीं है और अमेरिका को कुछ देशों से दिक्कत हो सकती है, लेकिन वे साउथ अफ्रीका के दुश्मन नहीं हैं। फिर भी, चीन और साउथ अफ्रीका द्वारा ईरान की भागीदारी को लेकर बरती गई गोपनीयता और डिलीट किए गए सोशल मीडिया पोस्ट यह बताते हैं कि अमेरिकी दबाव का असर गहरा है।

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