
तुर्की की Cirit मिसाइल। इमेज-सोशल मीडिया
Cirit Missile Bangladesh: बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद से भारत के साथ रिश्ते नाजुक दौर से गुजर रहे हैं। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार अपनी रक्षा नीति को पूरी तरह बदलने की कोशिश कर रही। बांग्लादेश अपनी निर्भरता भारत या अन्य देशों से हटाकर तुर्की जैसे देशों पर बढ़ा रहा है। तुर्की की कंपनी Roketsan की बनाई Cirit मिसाइल अचूक मारक क्षमता के लिए चर्चित है।
बांग्लादेश केवल मिसाइल नहीं, बल्कि तुर्की के T129 ATAK अटैक हेलिकॉप्टर और यूरोफाइटर जेट खरीदने की भी योजना बना रहा है। जानकार बताते हैं कि बांग्लादेश खुद को दक्षिण एशिया में एक स्वायत्त सैन्य शक्ति के रूप में दिखाना चाहता है। मगर, भारत के साथ मौजूदा तनाव को देखते हुए इसे जंग की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है।
तुर्की की दक्षिण एशिया में दखलंदाजी बढ़ती ही जा रही है। पहले पाकिस्तान को बी-2 ड्रोन दिया, उसके बाद बांग्लादेश में अपनी मिसाइलों की खेप भेजने की तैयारी में है। बता दें, तुर्की की यह मिसाइल आधुनिक युद्ध के मैदान में छोटा, लेकिन बहुत प्रभावशाली हथियार है। यह मिसाइल लेजर की मदद से शिकार को ढूंढती है। इसका निशाना चूकने की गुंजाइश बहुत कम होती है। इसका वजन 15 किलो और यह 8 किलोमीटर की दूरी तक सटीक हमला कर सकती है। इसे हेलिकॉप्टरों, ड्रोन जैसे Falco Astore UAVs और जमीनी गाड़ियों से दागा जा सकता है। यह मिसाइल हल्के बख्तरबंद वाहनों और दुश्मन की चौकियों को तबाह करने के लिए बनाई गई है।
भारत और बांग्लादेश के बीच कुछ महीनों में सीमा विवाद और अल्पसंख्यक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर काफी बहस हुई है। तुर्की के संबंध पाकिस्तान के साथ गहरे हैं। अब बांग्लादेश का तुर्की की तरफ झुकना भारत के लिए दोतरफा घेराबंदी जैसा हो सकता है। बांग्लादेश अपनी वायु सेना को चौथी पीढ़ी के यूरोफाइटर जेट्स से लैस करना चाहता है, जिससे वह क्षेत्र में अपनी ताकत दिखा सके। भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों की सीमा बांग्लादेश से लगती है। वहां की भौगोलिक स्थिति में Cirit जैसी मिसाइलें बहुत घातक साबित हो सकती हैं।
भले बांग्लादेश की आर्थिक स्थिति चुनौतीपूर्ण हो, लेकिन रक्षा मंत्रालय ने हथियारों की खरीद के लिए खजाना खोला है। बांग्लादेश 6 तुर्की हेलिकॉप्टर खरीदने के अंतिम चरण में है। इनमें ये Cirit मिसाइलें फिट की जाएंगी। वहीं, यूनुस सरकार का जोर अब तुर्की की टेक्नोलॉजी लाकर बांग्लादेश में डिफेंस कॉम्प्लेक्स बनाने पर है। बांग्लादेश का कहना है कि यह तैयारी म्यांमार से चल रहे सीमा विवाद के लिए है, मगर हथियारों का जखीरा भारत की सीमाओं के पास तैनात किया जा रहा।
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बांग्लादेश द्वारा तुर्की से मिसाइलें खरीदने का फैसला केवल एक व्यापारिक डील नहीं है। यह इसका संकेत है कि मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में बांग्लादेश अपनी सैन्य दिशा बदल रहा है। भारत के लिए यह समय बहुत सतर्क रहने का है। भले बांग्लादेश इसे अपनी रक्षा के लिए बता रहा हो, लेकिन हथियारों की होड़ दक्षिण एशिया की शांति को भंग कर सकती है। अब देखना है कि क्या भारत इस पर कोई कड़ी कूटनीतिक प्रतिक्रिया देता है या अपनी सीमा सुरक्षा को और मजबूत करता है।






