बांग्लादेश में एक हिंदू युवक पर हमला, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Bangladesh Communal Violence: बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा का एक और रूह कंपा देने वाला मामला सामने आया है। शरियतपुर जिले में खोकन चंद्र दास नामक व्यक्ति पर बेरहमी से हमला करने के बाद उन्हें आग के हवाले कर दिया गया। तीन दिनों तक अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ने के बाद शनिवार सुबह उनका निधन हो गया
नेशनल बर्न इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर डॉ. शाओन बिन रहमान ने एक मीडिया को बताया कि आगजनी के हमले में घायल खोकन दास का इलाज के दौरान निधन हो गया। दास करीब तीन दिनों से जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे थे। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, उनके शरीर का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा जल चुका था। आग से उनके चेहरे और सांस की नली को गंभीर नुकसान पहुंचा था जिसके कारण उनकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई।
डॉक्टरों ने बताया कि खोकन दास की मौत शनिवार सुबह करीब 7:20 बजे हुई। फिलहाल, शव को उनके पैतृक गांव ले जाने के लिए जरूरी कागजी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। इस घटना के बाद इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है।
परिवार ने इस घटना की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। खोकन दास के भतीजे-दामाद प्रांतो दास ने मीडिया से बातचीत में कहा कि परिवार न्याय चाहता है और किसी भी अपराधी को बचने नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि जिन आरोपियों की पहचान हो चुकी है उन्हें तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए।
इससे पहले खोकन दास की पत्नी सीमा दास ने भी मीडिया को बताया था कि हमलावरों ने उनके पति को घर में घुसने से पहले ही पकड़ लिया था। बदमाशों ने उन पर हमला किया और फिर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। घटना के वक्त सीमा दास अपने बच्चे को गोद में लिए हुए थीं।
स्थानीय अखबार प्रोथोम आलो की रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना दामुड्या के कोनेश्वर यूनियन में केउरभंगा बाजार के पास हुई। खोकन दास दिनभर दुकान चलाने के बाद घर लौट रहे थे तभी बदमाशों के एक समूह ने उन्हें रोका। हमलावरों ने धारदार हथियारों से हमला किया, फिर उनके ऊपर पेट्रोल डालकर आग लगा दी।
खुद को बचाने के लिए खोकन दास पास ही सड़क किनारे स्थित एक तालाब में कूद गए। उनकी चीख-पुकार सुनकर स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे जिसके बाद हमलावर फरार हो गए। स्थानीय लोगों ने उन्हें पहले शरियतपुर सदर अस्पताल पहुंचाया जहां प्राथमिक इलाज के बाद हालत गंभीर होने पर उन्हें ढाका रेफर किया गया।
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यह घटना ऐसे समय में हुई है जब बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ हमलों की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। हाल के महीनों में मैमनसिंह जिले में दीपू चंद्र दास की कथित तौर पर ईशनिंदा के आरोप में पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी, जबकि राजबाड़ी जिले में अमृत मंडल की भी भीड़ द्वारा हत्या का मामला सामने आया था। इन घटनाओं ने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।