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अमेरिकी सैनिक द्वारा गोद ली गई ईरानी महिला को 52 साल बाद निर्वासन का खतरा, ट्रंप की नीतियों से बढ़ा डर

US Veteran Adoption: एक ईरानी महिला जिसे 52 साल पहले अमेरिकी सैनिक ने गोद लिया था, अब निर्वासन का सामना कर रही है। नागरिकता की कानूनी प्रक्रिया पूरी न होने के कारण उसे ईरान भेजे जाने का डर सता रहा है।

  • Written By: प्रिया सिंह
Updated On: Feb 22, 2026 | 02:05 PM

अमेरिकी सैनिक द्वारा गोद ली गई ईरानी महिला को 52 साल बाद निर्वासन का खतरा (सोर्स-सोशल मीडिया)

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Mass Deportation Campaign Impact: अमेरिका में निर्वासन कानूनों के सख्त होने से हजारों लोगों का जीवन अब अचानक बड़े संकट में पड़ गया है। एक ईरानी महिला जिसे 1970 के दशक में एक अमेरिकी युद्ध वयोवृद्ध ने गोद लिया था, अब सामूहिक निर्वासन अभियान का प्रभाव का शिकार हो रही है। वह चार साल की उम्र में अमेरिका आई थी और एक ईसाई के रूप में पली-बढ़ी, लेकिन अब उसे अपने ही देश से निकाले जाने की धमकी मिली है। 52 वर्षों तक खुद को अमेरिकी मानने वाली इस महिला के लिए सरकारी विभाग का यह नोटिस एक गहरे और डरावने सदमे की तरह आया है।

गोद लेने का सफर

यह कहानी 1970 के दशक की है जब एक अमेरिकी वेटरन ने ईरान के एक अनाथालय से चार साल की बच्ची को गोद लिया था। वह उसे अपने साथ अमेरिका ले आया और उसने उसे पूरी तरह से एक ईसाई की तरह ही समाज में बड़ा किया। महिला ने अपनी पूरी जिंदगी अमेरिका में ही बिताई है और वह आज भी खुद को एक गौरवान्वित अमेरिकी नागरिक मानती है।

महिला के पास वर्तमान में कैलिफोर्निया में अपना घर है और वह एक प्रतिष्ठित कंपनी में नियमित नौकरी भी करती है। उसने आज तक कभी कोई अपराध नहीं किया है और वह समय पर अपना सारा टैक्स भी सरकार को ईमानदारी से भरती है। इसके बावजूद अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग ने उसे देश छोड़ने का एक कड़ा और कानूनी नोटिस जारी कर दिया है।

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इस समस्या की मुख्य जड़ यह है कि उसके अमेरिकी माता-पिता ने उसे नागरिकता दिलाने की सही कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं की थी। यह समस्या केवल उसके साथ ही नहीं बल्कि हजारों अंतरराष्ट्रीय गोद लिए गए बच्चों के साथ हो रही है जो अब संकट में हैं। वीजा की अवधि 1974 में समाप्त होने के कारण अब सरकारी रिकॉर्ड में उसे एक अवैध प्रवासी माना जा रहा है।

निर्वासन का कड़ा नोटिस

हाल ही में उसे विभाग से एक आधिकारिक पत्र मिला जिसमें उसे निर्वासन की कार्यवाही का सामना करने का आदेश दिया गया है। पत्र में स्पष्ट लिखा है कि वह मार्च 1974 से अपना वीजा समाप्त होने के बाद भी अवैध रूप से देश में रह रही है। महिला का कहना है कि वह 2008 से अपनी स्थिति सुधारने की कोशिश कर रही थी लेकिन अब यह नोटिस आया है।

ट्रंप प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे बड़े पैमाने पर निर्वासन अभियान के कारण अब बिना किसी आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोग भी फंस रहे हैं। सरकारी तंत्र की इस अचानक आई सख्ती ने महिला को कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए बुरी तरह से मजबूर कर दिया है। उसे डर है कि सालों की उसकी मेहनत और सुनहरी यादें सरकारी कागजों के कारण एक पल में पूरी तरह मिट जाएंगी।

महिला का तर्क है कि जब उसे गोद लिया गया था तब वह बहुत छोटी थी और उसे नियमों की कोई जानकारी नहीं थी। उसके माता-पिता की एक छोटी सी गलती अब उसके बुढ़ापे के लिए एक बहुत बड़ी और जानलेवा मुसीबत बन गई है। वह अब न्याय के लिए मानवाधिकार संगठनों और वकीलों से लगातार मदद मांग रही है ताकि निर्वासन को रोका जा सके।

ईरान वापसी का जानलेवा डर

महिला के लिए सबसे बड़ा डर यह है कि उसे उस देश में वापस भेजा जा सकता है जहां वह एक अनाथ थी। ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध जैसे तनाव ने उसकी मानसिक चिंताओं को कई गुना अधिक बढ़ा दिया है। वह मानती है कि ईरान की वर्तमान राजनीतिक स्थिति उसके जैसे ईसाई व्यक्ति के लिए बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है।

यह भी पढ़ें: अमेरिका से तनाव के बीच ईरान ने दागी सय्याद-3 जी मिसाइल, खतरे में US युद्धपोत, अब क्या करेंगे ट्रंप?

एक ईसाई होने के नाते और एक अमेरिकी अधिकारी की बेटी होने के कारण ईरान में उसकी जान को गंभीर खतरा हो सकता है। उसने भावुक होते हुए कहा कि अमेरिका किसी को उस देश में कैसे भेज सकता है जहां उसे जान का सीधा खतरा हो। वर्तमान सैन्य तैनाती और तनावपूर्ण माहौल ने उसके मन में युद्ध की आग में झोंके जाने का डर पैदा किया है।

खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी युद्धपोतों की तैनाती यह संकेत देती है कि भविष्य में स्थिति और भी खराब हो सकती है। वह नहीं चाहती कि उसे युद्ध की आग में झोंक दिया जाए और उसकी दशकों पुरानी पहचान को पूरी तरह छीन लिया जाए। वह केवल शांति से उसी देश में रहना चाहती है जिसे उसने अपना माना और जहां उसने अपनी पूरी जिंदगी बिताई।

Iranian woman adopted by us soldier deportation threat immigration policy

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Published On: Feb 22, 2026 | 02:05 PM

Topics:  

  • Adopted
  • America
  • Immigration
  • Iran
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