
बांग्लादेश चुनाव पर जमात-ए-इस्लामी का बयान, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Bangladesh News In Hindi: बांग्लादेश में जैसे-जैसे आगामी चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे राजनीतिक दलों के भीतर और उनके बीच खींचतान खुलकर सामने आने लगी है। चुनावी गठबंधनों को लेकर मतभेद और प्रशासन की निष्पक्षता पर सवालों के बीच जमात-ए-इस्लामी ने स्पष्ट कहा है कि मौजूदा हालात में फ्री और फेयर चुनाव संभव नहीं दिखते।
जमात-ए-इस्लामी की सेंट्रल एग्जीक्यूटिव काउंसिल की अहम बैठक सोमवार को ढाका के मोगबाजार स्थित पार्टी कार्यालय में हुई। इस बैठक की अध्यक्षता पार्टी के अमीर शफीकुर रहमान ने की। बैठक में रेफरेंडम और 13वें संसदीय चुनाव से जुड़े समग्र राजनीतिक माहौल पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक के बाद पार्टी के सेंट्रल पब्लिसिटी डिपार्टमेंट की ओर से जारी प्रेस रिलीज में कहा गया कि देश के कई हिस्सों से लगातार ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं जिनसे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। बयान के अनुसार, प्रशासन के भीतर कुछ सरकारी अधिकारी कथित तौर पर एक खास राजनीतिक दल के पक्ष में काम कर रहे हैं, जिससे समान अवसर और तटस्थता की भावना कमजोर हो रही है।
जमात ने यह भी दावा किया कि देश के अलग-अलग इलाकों में अब भी राजनीतिक हिंसा जारी है और नेता व कार्यकर्ता दिनदहाड़े हमलों का शिकार हो रहे हैं। पार्टी का कहना है कि ऐसे माहौल में चुनाव कराना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ होगा।
प्रेस बयान में यह भी उल्लेख किया गया कि 16 वर्षों के आंदोलन और संघर्ष के बाद ‘फासीवादी शासन’ से मुक्ति मिली है। पार्टी के अनुसार, नया बांग्लादेश करीब 1,500 शहीदों और 30,000 से अधिक घायल एवं दिव्यांग प्रदर्शनकारियों के बलिदान से बना है, जिसे किसी भी साजिश या समूह का बंधक नहीं बनने दिया जा सकता।
जमात-ए-इस्लामी की सेंट्रल एग्जीक्यूटिव काउंसिल ने सरकार और चुनाव आयोग से मांग की है कि प्रशासन की 100 प्रतिशत निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही कानून-व्यवस्था की स्थिति में ठोस और प्रभावी सुधार लाने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं।
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पार्टी ने चुनाव से जुड़े अधिकारियों और सुरक्षा बलों से भी अपील की है कि वे बिना किसी राजनीतिक दबाव या भेदभाव के, पूरी ईमानदारी और पेशेवर तरीके से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें। जमात का कहना है कि केवल सख्त और निष्पक्ष प्रशासनिक कार्रवाई से ही देश में स्वतंत्र, बिना भेदभाव और निष्पक्ष चुनाव संभव हो पाएंगे।






