बांग्लादेश चुनाव, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Bangladesh Elections 2026: बांग्लादेश के राजनीतिक इतिहास में 12 फरवरी 2026 का दिन एक बड़े बदलाव के रूप में दर्ज होने जा रहा है। शेख हसीना के 15 साल लंबे शासन के अंत के बाद यह पहला आम चुनाव है लेकिन इस बार मतदाता सिर्फ अपनी सरकार ही नहीं बल्कि देश का भविष्य भी चुनने जा रहे हैं।
इस चुनाव की सबसे खास बात यह है कि मतदान केंद्रों पर मतदाताओं को दो अलग-अलग रंगों के बैलेट पेपर दिए जा रहे हैं। सफेद पर्ची का उपयोग सांसद चुनने के लिए किया जा रहा है जबकि गुलाबी पर्ची के जरिए ‘जुलाई चार्टर 2025’ पर जनमत संग्रह लिया जा रहा है।
जुलाई चार्टर दरअसल 2024 के उस जनआंदोलन की उपज है जिसने देश की सत्ता संरचना को हिलाकर रख दिया था। नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने इस सुधार रूपरेखा को तैयार किया है।
इसका मुख्य उद्देश्य भविष्य में किसी भी एक नेता या दल के हाथों में सत्ता के अत्यधिक केंद्रीकरण को रोकना है। इस चार्टर में कुल 84 प्रस्ताव शामिल हैं, जिनमें से 47 को लागू करने के लिए संविधान में संशोधन की आवश्यकता होगी जबकि शेष 37 को सरकारी आदेशों या नए कानूनों के जरिए लागू किया जा सकता है।
अगर इस जनमत संग्रह में जनता ‘हां’ के पक्ष में मतदान करती है तो देश की राजनीतिक व्यवस्था में कई बड़े और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं:
प्रधानमंत्री पद की सीमा : अब कोई भी व्यक्ति दो बार से अधिक प्रधानमंत्री नहीं बन सकेगा।
द्विसदनीय व्यवस्था की स्थापना: वर्तमान संसद के अलावा 100 सीटों वाला एक उच्च सदन बनाया जाएगा जहां सीटें पार्टियों के राष्ट्रीय वोट प्रतिशत के आधार पर आवंटित होंगी।
विपक्ष को अहम जिम्मेदारियां: संसदीय समितियों के अध्यक्ष और उपसभापति जैसे प्रमुख पद विपक्षी दलों को सौंपे जाएंगे जिससे सत्ता और विपक्ष के बीच संतुलन बना रहे।
न्यायपालिका और चुनावी सुधार: प्रस्तावित चार्टर में न्यायपालिका की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने और एक निष्पक्ष केयरटेकर सरकार की वापसी की वकालत करता है।
इस चार्टर को अंतरिम सरकार अपनी बड़ी उपलब्धि मान रही है। इसे मुख्य विपक्षी दल बीएनपी, जमात-ए-इस्लामी और छात्र आंदोलनों से उपजी नेशनल सिटिजन पार्टी का समर्थन प्राप्त है। हालांकि अवामी लीग को इस चुनावी प्रक्रिया से बाहर रखा गया है।
यह भी पढ़ें:- कंबोडिया से भारतीयों को ठगा जा रहा… डिजिटल अरेस्ट का पूरा खेल उजागर, कैसे चल रहा था धंधा?
आलोचकों का तर्क है कि 84 अलग-अलग प्रस्तावों पर एक साथ ‘हां या ना’ मांगना मतदाताओं के साथ न्याय नहीं हैक्योंकि वे कुछ बिंदुओं से सहमत और कुछ से असहमत हो सकते हैं। यदि चार्टर पास होता है तो नई संसद के पास संवैधानिक संशोधनों के लिए 270 दिनों का समय होगा। बांग्लादेश में इससे पहले 1977, 1985 और 1991 में जनमत संग्रह हो चुके हैं और यह चौथी बार है जब देश एक बड़े संवैधानिक मोड़ पर खड़ा है।