आधी रात अफगानिस्तान में जोरदार भूकंप, 5.5 की तीव्रता से हिली धरती; नींद से जाग उठे लोग
Afghanistan Earthquake: अफगानिस्तान के हिंदू कुश क्षेत्र में बुधवार देर रात 5.5 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, भूकंप 173 किमी की गहराई पर था।
- Written By: अमन उपाध्याय
भूकंप की सांकेतिक फोट- (सो. नवभारत डिजाइन)
Afghanistan Earthquake News In Hindi: पड़ोसी देश अफगानिस्तान में एक बार फिर कुदरत का कहर देखने को मिला है। बुधवार, 1 जुलाई 2026 की देर रात जब लोग गहरी नींद में सो रहे थे, तभी आए एक शक्तिशाली भूकंप ने सबको हिला कर रख दिया। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) और अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.5 मापी गई है। भूकंप का समय भारतीय समयानुसार रात करीब 11:27 बजे दर्ज किया गया।
भूकंप का केंद्र कहां था?
इस भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान के पूर्वोत्तर हिस्से में स्थित जुर्म क्षेत्र के पास था। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह भूकंप जमीन के नीचे काफी गहराई पर आया था। अलग-अलग मापों में इसकी गहराई 173 किलोमीटर से लेकर 216.7 किलोमीटर तक बताई गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भूकंप की गहराई अधिक होने के कारण सतह पर कंपन का अहसास अपेक्षाकृत कम हुआ, जिससे एक बड़ी तबाही टल गई। राहत की बात यह है कि अभी तक किसी भी जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं मिली है।
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क्यों बार-बार कांपता है अफगानिस्तान?
अफगानिस्तान दुनिया के सबसे अधिक भूकंप-संवेदनशील क्षेत्रों में से एक माना जाता है। भूवैज्ञानिकों के अनुसार, यह देश भारतीय टेक्टोनिक प्लेट और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेट के टकराने वाले जोन पर स्थित है,। इसके अलावा, हेरात जैसे इलाकों से बड़ी फॉल्ट लाइनें गुजरती हैं। हिंदू कुश पर्वत श्रृंखला इस क्षेत्र को और भी संवेदनशील बना देती है, जिसके कारण यहां नियमित रूप से भूकंप के झटके महसूस किए जाते हैं।
पिछला एक हफ्ता काफी चिंताजनक
अफगानिस्तान के लिए पिछला एक हफ्ता काफी चिंताजनक रहा है। इससे पहले शनिवार, 27 जून को भी उत्तर-पूर्वी अफगानिस्तान में 6.2 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया था, जिसका केंद्र बदख्शां प्रांत में था। उस भूकंप के झटके पाकिस्तान और भारत के उत्तरी हिस्सों तक महसूस किए गए थे।
अफगानिस्तान में भूकंप का इतिहास
अफगानिस्तान का इतिहास विनाशकारी भूकंपों से भरा रहा है। सितंबर 2025 में आए 6.0 तीव्रता के भूकंप में 2,200 से अधिक लोगों की जान चली गई थी। वहीं, अक्टूबर 2023 में हेरात प्रांत में आए भूकंपों की श्रृंखला में 2,000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी।
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बार-बार आने वाली ये प्राकृतिक आपदाएं उन समुदायों के लिए स्थिति और खराब कर देती हैं जो पहले से ही दशकों के संघर्ष और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र का मानना है कि अफगानिस्तान भूकंप के साथ-साथ भूस्खलन और बाढ़ जैसी आपदाओं के प्रति भी बेहद संवेदनशील है।
