TTP या पाक किसी एक को चुने ले तालिबान...CDF बनते ही प्रेशर गेम खेलने लगे मुनीर, अफगान को दी धमकी

Pakistan-Afghan Conflict: पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने अफगानिस्तान को धमकी दी, कहा- या तो पाकिस्तान का साथ दो या TTP का। शांति वार्ता को लेकर सऊदी अरब मध्यस्थता करेगा।
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आसिम मुनीर (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Asim Munir Warns Afghanistan: ऑपरेशन सिंदूर में भारत के खिलाफ लड़ाई में मुंह की खाने के बाद पाकिस्तान लगातार अफगानिस्तान को बरगलाना जारी रखा है। मई 2025 में भारत से संघर्ष के बाद फील्ड मार्शल बनने के बाद सेना प्रमुख  आसिम मुनीर अब पाकिस्तान के नए चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) बन गए है। CDF बनते ही मुनीर ने अफगानिस्तान के खिलाफ प्रेशर गेम खेलना शुरू कर दिया है। 

मुनीर ने अफगानिस्तान को धमकी देते हुए कहा कि या तो अफगानिस्तान पाकिस्तान का साथ दे या फिर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) का। पिछले कुछ महीनों में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच शांति वार्ता कई बार असफल रही है। पहली बार कतर में बातचीत हुई, मगर पाकिस्तान के कड़े रवैये के कारण वह असफल हो गई।

शांति समझौते को लेकर दिलचस्पी नहीं

इसके बाद तुर्की ने भी शांति की कोशिश की लेकिन पाकिस्तान ने वहां भी अड़चन डाली, जिससे वह प्रयास भी सफल नहीं हो पाए। अब आसिम मुनीर ने दुबारा अफगानिस्तान को धमकी देकर स्थिति और तनावपूर्ण कर दी है। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान में आतंकी हमलों की बढ़ोतरी TTP की वजह से हुई है, लेकिन उन्होंने पाकिस्तान सेना द्वारा अफगानिस्तान में की गई उन हिंसाओं का जिक्र नहीं किया।

पाकिस्तानी सेना प्रमुख ने ये बातें रावलपिंडी स्थित अपने मुख्यालय में कहीं, जहां पाकिस्तान की तीनों सेना शाखाओं ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इस मौके को पाकिस्तान की नई ज्वाइंट मिलिट्री कमांड की शुरुआत माना जा रहा है। मुनीर ने साफ किया कि अब काबुल में तालिबान सरकार को यह तय करना होगा कि वे पाकिस्तान के साथ हैं या TTP के साथ। पाकिस्तान की इस धमकी पर अफगानिस्तान ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

पाकिस्तान-अफगान संबंध खराब

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के संबंध बहुत खराब हो गए हैं। सीमा पर हुई झड़पों में कई सैनिक और नागरिक मारे गए, और सैकड़ों घायल हुए। यह हिंसा काबुल में अक्टूबर के धमाकों के बाद शुरू हुई, जिनके लिए तालिबान ने पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया था। कतर की मध्यस्थता से अक्टूबर में एक सीजफायर तो हुआ, लेकिन पूरी तरह शांत नहीं हो पाए। नवंबर में इस्तांबुल में तीन दौर की बातचीत के बाद भी कोई समझौता नहीं हो सका।

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