

CDF Appointment Pakistan: पाकिस्तान में सैन्य संरचना को बदलने वाला एक बड़ा फैसला गुरुवार (4 दिसंबर) को लिया गया, जब प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने फील्ड मार्शल असीम मुनीर को चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) के नए पद पर नियुक्त करने की मंजूरी दे दी।
इसके साथ ही उनकी आर्मी चीफ के पद पर निरंतरता की भी पुष्टि कर दी गई। इस नियुक्ति के बाद असीम मुनीर अब देश के पहले रक्षा बल प्रमुख बन गए हैं, जो तीनों सेनाओं की कमान के शीर्ष पर होंगे।
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री कार्यालय के बयान के मुताबिक शहबाज शरीफ ने यह प्रस्ताव राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को भेजा था, जिसे राष्ट्रपति ने गुरुवार को मंजूरी भी दे दी। मंजूरी मिलते ही सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर को देश का पहला चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज़ (CDF) नियुक्त कर दिया गया।
नई व्यवस्था के मुताबिक असीम मुनीर अगले पांच साल तक आर्मी चीफ और CDF दोनों पदों का दायित्व एक साथ संभालेंगे। इससे वह सैन्य ढांचे में सबसे ऊंचे पद पर और अधिक प्रभावशाली हो जाएंगे, क्योंकि CDF का पद रणनीतिक और सामरिक मामलों पर व्यापक अधिकार और नियंत्रण प्रदान करता है।
यह निर्णय तब आया है जब पाकिस्तान की राजनीति और सेना के बीच पिछले कुछ वर्षों से लगातार उठापटक जारी है। लंबे समय से यह सवाल उठता रहा था कि आखिर मुनीर को CDF का पद कब दिया जाएगा। हाल ही में रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने संकेत दिया था कि प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, और अब इस पर आधिकारिक मुहर लग चुकी है।
शहबाज शरीफ सरकार ने हाल में 27वें संविधान संशोधन के माध्यम से CDF पद का गठन किया था। इस संशोधन में स्पष्ट किया गया कि चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज तीनों सेनाओं के साथ-साथ नेशनल स्ट्रैटेजिक कमांड की भी कमान संभालेंगे। यह कदम पाकिस्तान के सैन्य ढांचे में एक ऐतिहासिक बदलाव माना जा रहा है, क्योंकि अब सेना प्रमुख से भी ऊपर का एक एकीकृत शीर्ष सैन्य पद अस्तित्व में है।
आर्मी चीफ असीम मुनीर के साथ-साथ पाकिस्तान एयर फोर्स के एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिद्दू के कार्यकाल में भी दो साल का विस्तार दे दिया गया है। यह विस्तार मार्च 2026 में उनके वर्तमान कार्यकाल के पूरा होने के बाद प्रभावी होगा। इन दोनों नियुक्तियों को पाकिस्तान में सैन्य स्थिरता और रणनीतिक निरंतरता के रूप में देखा जा रहा है।
पाकिस्तानी राजनीति में सेना की भूमिका हमेशा से अत्यधिक प्रभावशाली रही है, लेकिन CDF पद के गठन के साथ उसकी शक्ति अब और केंद्रीकृत होने जा रही है। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले वर्षों में इस बदलाव का असर पाकिस्तान की सुरक्षा नीति, आंतरिक स्थिरता और राजनीतिक संतुलन पर गहरा पड़ सकता है।