पाकिस्तान थाईलैंड ईंधन संकट, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Middle East War Impact Asia: मिडिल ईस्ट में जारी भीषण तनाव और युद्ध की स्थितियों ने वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है। तेल की आसमान छूती कीमतों और आपूर्ति की कमी को देखते हुए एशियाई देशों ने अपने नागरिकों और सरकारी मशीनरी के लिए ‘इमरजेंसी’ जैसे कड़े नियम लागू करने शुरू कर दिए हैं। थाईलैंड और पाकिस्तान जैसे देशों ने ईंधन बचाने के लिए सरकारी कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम करने का आदेश दिया है।
थाईलैंड के प्रधानमंत्री अनुटिन चार्नवीराकुल ने मंगलवार को देश के लिए नए ऊर्जा दिशा-निर्देशों की घोषणा की। सरकारी आदेश के अनुसार, थाईलैंड के सरकारी कर्मचारियों को अब घर से ही कार्य निष्पादन करना होगा ताकि वाहनों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन की खपत को कम किया जा सके।
इसके अलावा, सरकार ने मंत्रियों और सरकारी अधिकारियों के विदेश दौरों पर पूरी तरह रोक लगा दी है। प्रशासन ने यहां तक सलाह दी है कि दफ्तरों में बिजली बचाने के लिए लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल किया जाए।
पाकिस्तान में हालात और भी गंभीर नजर आ रहे हैं। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने देश में सख्त ‘मितव्ययिता’ (Austerity) उपायों का ऐलान किया है। पाकिस्तान में अब सरकारी दफ्तर सप्ताह में केवल चार दिन ही खुलेंगे और आधे कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम करना होगा। इसके अतिरिक्त, इस हफ्ते के अंत से सभी स्कूलों को दो हफ्तों के लिए बंद रखने का फैसला लिया गया है।
आर्थिक बोझ कम करने के लिए प्रधानमंत्री शरीफ ने मंत्रियों और सांसदों के वेतन पर भी कैंची चलाई है। मंत्री अगले दो महीने तक कोई वेतन नहीं लेंगे, जबकि सांसदों की सैलरी में 25 प्रतिशत की कटौती की गई है। साथ ही, सरकारी गाड़ियों के लिए ईंधन का कोटा 50 फीसदी तक घटा दिया गया है और 60 फीसदी सरकारी वाहनों के चलने पर रोक लगा दी गई है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार उनके नियंत्रण में नहीं है और वैश्विक हालात के कारण यह ‘कठिन फैसला’ लेना उनकी मजबूरी बन गया है।
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ईंधन बचाने की इस रेस में वियतनाम ने भी अपने नागरिकों से गाड़ियों का कम इस्तेमाल करने और घर से काम करने की अपील की है। वहीं, बांग्लादेश ने बिजली और ईंधन की भारी किल्लत को देखते हुए विश्वविद्यालयों को पहले ही बंद कर दिया है और आने वाली ईद-उल-फितर की छुट्टियों को आगे बढ़ा दिया है ताकि ऊर्जा की खपत को नियंत्रित किया जा सके। यह वैश्विक संकट स्पष्ट रूप से दर्शा रहा है कि मध्य पूर्व की जंग की कीमत अब पूरा एशिया चुका रहा है।