अल-अक्सा के इमाम पर केस, इजरायल के इस कार्रवाई से भड़के मुस्लिम स्कॉलर्स, क्या बढ़ेगा तनाव?

Middle East Conflict: अल-अक्सा मस्जिद के प्रमुख इमाम शेख एक्रीमा सबरी के खिलाफ इजरायल द्वारा शुरू किया गया मुकदमा नए राजनीतिक तनाव का संकेत माना जा रहा है। उन पर दो शोक-संदेश भाषणों के आधार पर...
Israel prosecutes Al-Aqsa Imam Sheikh Ekrima Sabri
अल-अक्सा के इमाम शेख एक्रीमा सबरी पर इजरायल का मुकदमा, फोटो (सो.सोशल मीडिया)
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Al Aqsa Mosque:  इजरायल ने यरुशलम स्थित अरब मुसलमानों के पवित्र स्थल अल-अक्सा मस्जिद के प्रमुख इमाम शेख एक्रीमा सबरी के खिलाफ कथित ‘उकसावे’ के आरोपों में औपचारिक मुकदमा शुरू कर दिया है। मंगलवार को इस मामले में पहली सुनवाई हुई।

यह मामला दो शोक-संदेश भाषणों से जुड़ा है एक 2022 का और दूसरा 2024 का, जिसमें उन्होंने हमास के पूर्व नेता इस्माइल हनिया की हत्या के बाद संवेदना व्यक्त की थी।

यह राजनीतिक और वैचारिक उत्पीड़न

सबरी की कानूनी टीम का कहना है कि इजरायली अधिकारी पिछले कई वर्षों से उनके खिलाफ राजनीतिक, धार्मिक और वैचारिक आधार पर लगातार दबाव बना रहे हैं। वकीलों के मुताबिक यह मुकदमा उसी व्यापक कैंपेन का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य अल-अक्सा की आवाज़ को कमजोर करना है। सबरी की कानूनी टीम के प्रमुख, खालिद जबार्का ने ब्रिटेन स्थित वेबसाइट ‘मिडिल ईस्ट आई’ से बातचीत में कहा कि यह मामला स्पष्ट रूप से नस्ल के आधार पर उत्पीड़न है। उन्होंने दावा किया कि सबरी लंबे समय से इजरायली कब्जे के खिलाफ बोलते रहे हैं और अब सरकार उन्हें चुप कराने की कोशिश कर रही है।

मस्जिद परिसर में बढ़ता तनाव

सबरी को पहले भी कई बार इजरायली सुरक्षा बलों द्वारा हिरासत में लिया जा चुका है। वर्तमान मुकदमा उस समय चल रहा है, जब अल-अक्सा परिसर में फिलिस्तीनियों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।

इसी वर्ष अक्टूबर में इजरायल के दक्षिणपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतमार बेन ग्वीर ने अल-अक्सा परिसर का दौरा किया था और दावा किया था कि “इजरायल टेंपल माउंट का मालिक है।” यह स्थल मुस्लिमों के लिए अल-अक्सा और यहूदियों के लिए टेंपल माउंट के नाम से धार्मिक महत्व रखता है।

यहूदियों को परिसर में प्रवेश की अनुमति तो है, पर प्रार्थना की नहीं। इसके बावजूद ग्वीर कई बार वहां जाकर कथित तौर पर प्रार्थना कर चुके हैं, जिससे बड़ा विवाद पैदा हुआ है।

फिलिस्तीनी इमामों पर प्रवेश प्रतिबंध

इजरायली प्राधिकरणों ने कई फिलिस्तीनी इमामों जिनमें शेख सबरी भी शामिल हैं को अल-अक्सा परिसर में प्रवेश से प्रतिबंधित किया है। जबार्का के अनुसार, इमामों को सिर्फ इसलिए हटाया गया क्योंकि उन्होंने अपने खुत्बों में गाजा का उल्लेख किया था। उन्होंने आरोप लगाया, “इजरायल ने गाजा शब्द के इस्तेमाल तक पर पाबंदी लगा दी है। यह जुमे के खुत्बों में सीधा हस्तक्षेप है और धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन है।”

मुस्लिम स्कॉलर्स संगठन ने की निंदा

इंटरनेशनल यूनियन ऑफ मुस्लिम स्कॉलर्स (IUMS) के महासचिव शेख अली अल-करदागी ने इस मुकदमे की कड़ी निंदा की है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि इजरायल का यह कदम यरुशलम में ‘अधिकार और स्वतंत्रता’ की आवाज को कमजोर करने की कोशिश है। उन्होंने इसे न्यायिक प्रक्रिया के दायरे से बाहर का कदम बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य फिलिस्तीनी धार्मिक नेतृत्व पर दबाव बनाना है।

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