चुनाव आयोग का सख्त निर्देश, बंगाल में SIR के लिए इन लोगों को बुलाया तो खैर नहीं

West Bengal SIR: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने बंगाल के लिए मसौदा मतदाता सूची 16 दिसंबर को प्रकाशित की थी। प्रदेश में SIR अभ्यास की जनगणना अवधि के दौरान 58.2 लाख से अधिक नाम हटाए गए थे।
Election Commission issues strict directive: If these people are called for SIR in Bengal, they will be in trouble
कोलकाता में एसआईआर की चल रही प्रक्रिया। इमेज-सोशल मीडिया
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West Bengal SIR Update: चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि 85 या उससे अधिक आयु के किसी मतदाता या बीमार या दिव्यांग मतदाता को विशेष अनुरोध पर सुनवाई के लिए नहीं बुलाया जाएगा। ऐसा किया गया तो संबंधित मतदान अधिकारी (BLO) और बीएलओ पर्यवेक्षक के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। कई बार कतारों में खड़े बुजुर्ग और बीमार मतदाताओं की परेशानी और असुविधा के बारे में खबरें आने के बाद आयोग ने आदेश जारी किया है।

29 दिसंबर को बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय ने जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) और जिला मजिस्ट्रेटों को निर्देश जारी कर कहा है कि 85 वर्ष या उससे अधिक आयु के मतदाताओं, बीमारों और दिव्यांगों को, जो विशेष अनुरोध करते हैं, सुनवाई के लिए नहीं बुलाया जाना चाहिए। नोटिस पहले जारी किए जा चुके हैं तो उनसे फोन पर संपर्क कर उन्हें उपस्थित न होने के लिए कहा जाना चाहिए। उनके आवास पर जाकर सत्यापन किया जाना चाहिए।

अफसर ने क्या कहा?

निर्देश के बावजूद सीईओ कार्यालय को राज्य भर से कई शिकायतें मिलीं। इनमें मतदाताओं और गर्भवती महिलाओं को एसआईआर से संबंधित सुनवाई के लिए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने को कहा गया था। अधिकारी ने कहा, हमने डीईओ को बताया था कि निर्देश के उल्लंघन में एक घटना होने पर बीएलओ के खिलाफ कार्रवाई होगी। बीएलओ पर्यवेक्षक क्या कर रहे? टूटे पैर या गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति सुनवाई स्थल पर क्यों जाता है? बीएलओ घर-घर जाकर ऐसे मतदाताओं का रिकॉर्ड रखेंगे। इन मतदाताओं की सुनवाई प्रक्रिया के अंतिम सप्ताह में उनके घर में होगी। ऐसी घटनाओं से चुनाव आयोग की छवि धूमिल होती है।

बंगाल में वोटरों की संख्या

पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के अनुसार विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) अभियान के बीच विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा 31 दिसंबर तक पात्र मतदाताओं को शामिल करने के लिए 8 दावे और आपत्तियां प्रस्तुत हुई हैं। यह संशोधन मसौदा मतदाता सूची से संबंधित है। इसमें वर्तमान में 7,08,16,630 मतदाता सूचीबद्ध हैं।

दावे कितने आए?

सीईओ कार्यालय ने बताया कि राजनीतिक दलों द्वारा दावे और आपत्तियां प्रस्तुत करने की अवधि 17 दिसंबर से 31 दिसंबर तक थी। राजनीतिक दलों ने मसौदा मतदाता सूची के संबंध में दावे और आपत्तियां प्रस्तुत की हैं। प्रस्तुतियों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 1 दावा, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने 2 दावे, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 0 दावे, टीएमसी ने 3 दावे, बहुजन समाज पार्टी ने 1 दावा और अखिल भारतीय फॉरवर्ड ब्लॉक ने 1 दावा प्रस्तुत किया है।

अपात्र मतदाताओं को बाहर करने के लिए 37,781 दावे-आपत्तियां

मतदाता सूची का मसौदा प्रकाशित होने के बाद मतदाताओं से सीधे 1,74,459 दावे और आपत्तियां पात्र मतदाताओं को शामिल करने (फॉर्म 6/6ए) के लिए प्राप्त हुई हैं। अपात्र मतदाताओं को बाहर करने (फॉर्म 7) के लिए 37,781 दावे और आपत्तियां प्राप्त हुई हैं। पहचान अधिनियम, 1980 की धारा 2(जी) के तहत किसी भी व्यक्ति से हलफनामा नहीं मिला है। सिवाय उस विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं के जो मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के नियम 20(3)(बी) अंतर्गत पंजीकृत हैं।

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