
वायरल वीडियो के स्क्रीनशॉट। (सोर्स - सोशल मीडिया)
Viral Video Allegation : सोशल मीडिया पर किसी को बिना जांच दोषी ठहरा देने की होड़ यानी मीडिया ट्रायल कितनी खतरनाक हो सकती है, इसका दर्दनाक उदाहरण केरल के कोझिकोड में सामने आया है। यहां 41 वर्षीय सेल्स मैनेजर दीपक ने अपने घर में आत्महत्या कर ली। दीपक पर सोशल मीडिया पर एक महिला ने बस यात्रा के दौरान दुर्व्यवहार का आरोप लगाया था।
महज 18 सेकंड का एक वीडियो 16 जनवरी को वायरल हुआ और देखते ही देखते इंटरनेट यूजर्स ने बिना किसी जांच-पड़ताल के दीपक को दोषी ठहरा दिया। लगातार ट्रोलिंग, बदनामी और मानसिक दबाव ने आखिरकार एक इंसान की जान ले ली।
Even the bus conductors are not safe from sicko females. https://t.co/yhm9dZlBQ2 pic.twitter.com/OLEAkSdxa7 — 𝕂𝕂 (@Try2StopME) January 20, 2026
पुलिस के अनुसार, दीपक ने महिला के आरोपों को सिरे से खारिज किया था और वे अपनी छवि खराब करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी भी कर रहे थे। लेकिन सोशल मीडिया पर चल रहे ट्रायल और समाज में बदनामी के डर ने उन्हें अंदर से तोड़ दिया।
रविवार को दीपक ने आत्महत्या कर ली। इस घटना ने न सिर्फ उनके परिवार को झकझोर दिया, बल्कि पूरे समाज के सामने यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या सोशल मीडिया किसी को जज, जूरी और जल्लाद बनने का अधिकार देता है?
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दीपक की मौत के बाद केरल में विरोध का एक अनोखा और चौंकाने वाला तरीका देखने को मिला। सार्वजनिक बसों में पुरुष यात्री और कंडक्टर कार्डबोर्ड बॉक्स पहनकर सफर करते नजर आए।
वायरल वीडियो में एक बस कंडक्टर टिकट काटते समय खुद को बड़े गत्ते के डिब्बे से ढके हुए दिखा, जिस पर लिखा था-“Men’s Commission” यानी पुरुष आयोग की मांग। वहीं एक अन्य वीडियो में एक पुरुष यात्री खुद को डिब्बे से ढककर यात्रा करता नजर आया, ताकि उस पर किसी भी तरह के गलत व्यवहार के आरोप न लग सकें।






