
AI जनरेटेड वायरल फोटो (सोर्स - सोशल मीडिया)
AI Manipulation : आज के AI युग में अब यह मान लेना बेहद खतरनाक हो गया है कि जो दिखाई दे रहा है, वही सच है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से तस्वीरें इतनी बारीकी से एडिट हो सकती हैं कि कोई भी आसानी से धोखा खा सकता है—चाहे वह आम इंसान हो, डॉक्टर हो या किसी बड़ी कंपनी का HR। कुछ दिन पहले ही एक मामला वायरल हुआ था, जिसमें एक व्यक्ति ने Swiggy से रिफंड पाने के लिए अंडों की AI-एडिटेड फोटो भेज दी थी।
अब ऐसा ही एक नया मामला सामने आया है, लेकिन इस बार बात खाने की नहीं बल्कि ऑफिस की छुट्टियों की है। दावा किया जा रहा है कि एक कर्मचारी ने अपने हाथ पर AI की मदद से नकली चोट बनवाई और आराम से मेडिकल लीव ले ली—और HR को इसका बिल्कुल अंदाज़ा नहीं हुआ।
AI just broke HR verification. An employee took a clean photo of his hand — no injury, nothing. He opened Gemini Nano and typed:
“apply an injury on my hand.” In seconds, AI generated a hyper-realistic wound:
sharp, detailed, medically believable. He sent it to HR saying he… pic.twitter.com/wZw9zk1Wva — kapilansh (@kapilansh_twt) November 28, 2025
यह घटना सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर की गई, जहां बताया गया कि कर्मचारी ने पहले अपने हाथ की एक बिलकुल साफ, बिना किसी खरोंच की तस्वीर ली। फिर उसने Gemini Nano जैसे AI टूल में सिर्फ एक सरल निर्देश लिखा: “Apply an injury on my hand.” कुछ ही सेकंड में AI ने उस साफ हाथ पर इतनी असली लगने वाली चोट बना दी कि कोई भी देखकर धोखा खा जाए। घाव की गहराई, रंग, किनारे और ताजगी बिल्कुल वास्तविक लग रहे थे।
कर्मचारी ने यह एडिट की हुई फोटो अपने HR को भेजी और कहा कि वह बाइक से गिर गया है, इसलिए उसे मेडिकल लीव चाहिए। HR ने बिना किसी सवाल-जवाब के छुट्टी मंजूर कर दी—न मेडिकल सर्टिफिकेट मांगा गया, न तस्वीर पर संदेह जताया गया। यानी AI ने आराम से HR वेरिफिकेशन को “हैक” कर दिया।
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पोस्ट वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने चिंता जताई कि आने वाले समय में असली और नकली के बीच फर्क करना बेहद मुश्किल हो जाएगा। कुछ यूजर्स ने कहा कि AI-जनरेटेड तस्वीरें इतनी वास्तविक दिख सकती हैं कि आंखें भी धोखा खा जाएं। कई लोगों ने यह भी लिखा कि भले ही कई बार AI फोटो की पहचान हो जाती है, लेकिन कई एडिटेड तस्वीरें इतनी परफेक्ट होती हैं कि वे मेडिकल, कॉरपोरेट और कानूनी सिस्टम को भी गुमराह कर सकती हैं।
सवाल उठ रहा है कि भविष्य में कंपनियां, अस्पताल और संस्थान किस तरह यह पहचानेंगे कि कोई तस्वीर असली है या AI से बनाई गई। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि AI जितना उपयोगी है, उतना ही खतरनाक भी हो सकता है।






