होटल और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री पर मिडिल ईस्ट संकट की आंच, नौकरी जाने का बढ़ा खतरा; कर्मचारियों को रुकी सैलरी

LPG Crisis: सरकार की ओर से एलपीजी उपलब्धता सुधारने के आश्वासन के बावजूद रेस्टोरेंट और कैटरिंग इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि उन्हें कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की पर्याप्त सप्लाई नहीं मिल रही है।
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एलपीजी सिलेंडर के लिए लाइन में खड़े लोग, (सोर्स- सोशल मीडिया)
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LPG Cylinder Crisis: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने वैश्विक संकट की स्थिति पैदा कर दी है, जिसका असर अब इंडिया के फूड सर्विस सेक्टर पर साफ दिखाई देने लगा है। इसकी मुख्य वजह एलपीजी सिलेंडर की भारी कमी है। 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' का रास्ता बंद होने के कारण भारत में एलपीजी संकट लगातार गहराने का खतरा बढ़ गया है। यदि यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो छंटनी, वेतन कटौती और कारोबार पर गंभीर असर पड़ सकता है।

सरकार की ओर से एलपीजी उपलब्धता सुधारने के आश्वासन के बावजूद रेस्टोरेंट और कैटरिंग इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि उन्हें कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की पर्याप्त सप्लाई नहीं मिल रही है। जिसकी वजह से लगातार उनका व्यापार प्रभावित हो रहा है।

कई लोगों की नौकरी जाने की आशंका

कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडर नहीं मिलने से होटल और रेस्टोरेंट्स को अपने ऑपरेशंस जारी रखना बेहद मुश्किल होता जा रहा है। कई कारोबारियों का कहना है कि स्थिति अनिश्चित है और यह साफ नहीं है कि हालात कब सामान्य होंगे। द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रेस्टोरेंट मालिक ने बताया कि इस समय पूरे सेक्टर में हड़कंप जैसी स्थिति है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हालात नहीं सुधरे, तो इसका सबसे ज्यादा असर निचले स्तर के कर्मचारियों पर पड़ेगा, जो इस इंडस्ट्री में काम करते हैं।

एलपीजी संकट का सबसे ज्याद असर

सबसे ज्यादा संकट छोटे रेस्टोरेंट, सड़क किनारे खाने-पीने की दुकानें, कैटरर्स और क्लाउड किचन संचालकों पर पड़ रहा है। इनमें से कई पहले ही अपना कारोबार बंद कर चुके हैं। वहीं, नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (National Restaurant Association of India) के अध्यक्ष सागर दरयानी का कहना है कि एलपीजी की कमी का सीधा असर मैन्यू, काम-काज के घंटे और मुनाफे के ऊपर पड़ सकता है।

छोटे कारोबारी की बढ़ सकती है मुश्किलें

ऐसे में छोटे कारोबारी जो नुकसान झेलने में सक्षम नहीं हैं और उन्हें मजबूरन छंटनी करनी पड़ सकती है। हालांकि, बड़े खिलाड़ी कुछ समय तक नुकसान सह सकते हैं, लेकिन इससे उनके ऑपरेशंस के कई पहलू प्रभावित होंगे। ऐसे में इस इंडस्ट्री के लोग सरकार से मांग कर रहे हैं कि इस समस्या का जल्द से जल्द को हल निकाला जाए।

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