
मणिकर्णिका घाट, फोटो- सोशल मीडिया
Manikarnika Ghat AI Photos Misinformation: उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित ऐतिहासिक मणिकर्णिका घाट पर चल रहे पुनर्विकास कार्य को लेकर सोशल मीडिया पर तनाव बढ़ गया है। पुलिस ने मणिकर्णिका घाट के सौंदर्यीकरण से जुड़ी मनगढ़ंत एआई तस्वीरें और भ्रामक जानकारी फैलाने के आरोप में 8 लोगों और कई एक्स हैंडल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
वाराणसी पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर मणिकर्णिका घाट के रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के बारे में तथ्यों के विपरीत गुमराह करने वाला कंटेंट और मनगढ़ंत तस्वीरें शेयर की गई थीं। अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि कुछ एआई-जेनरेटेड तस्वीरों में हिंदू देवी-देवताओं को गलत और आपत्तिजनक तरीके से दिखाया गया था। इन भ्रामक पोस्ट का मुख्य उद्देश्य धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना, समाज में गलत जानकारी फैलाना, जनता के बीच गुस्सा पैदा करना और सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ना था। पुलिस का कहना है कि इन पोस्ट के ऑनलाइन सर्कुलेट होने के बाद उन पर काफी ध्यान गया और व्यापक स्तर पर आलोचना हुई, जिससे माहौल बिगड़ने का खतरा पैदा हो गया।
एसीपी अतुल अंजन ने मामले की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि मणिकर्णिका घाट पर चल रहे सौंदर्यीकरण कार्य के बारे में झूठे वीडियो और गलत जानकारी फैलाने के आरोप में 8 एफआईआर दर्ज की गई हैं। इन एफआईआर में 8 व्यक्तियों के साथ-साथ उन विशिष्ट ‘एक्स’ हैंडल्स को भी लक्षित किया गया है, जिन्होंने इस सामग्री को बढ़ावा दिया। चौंकाने वाली बात यह है कि पुलिस के अनुसार, इन एफआईआर में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) से जुड़े कुछ नेताओं के नाम भी शामिल हैं। पुलिस ने चेतावनी दी है कि भविष्य में सोशल मीडिया पर इस तरह का विवादास्पद और गुमराह करने वाला कंटेंट पोस्ट करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इस पूरे मामले की शुरुआत चौक पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई एक शिकायत के बाद हुई। शिकायतकर्ता कंपनी के अनुसार, वे 15 नवंबर, 2025 से मणिकर्णिका घाट पर श्मशान से संबंधित सुविधाओं को बेहतर बनाने और सौंदर्यीकरण का कार्य कर रहे हैं। शिकायत में कहा गया है कि 16 जनवरी की देर रात एक एक्स यूजर ने जानबूझकर एआई-जनरेटेड और गुमराह करने वाली तस्वीरें साझा कीं। इन पोस्ट में रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के बारे में गलत तथ्य पेश किए गए, जिससे हिंदू धर्म के भक्तों को गुमराह किया गया और समाज में आक्रोश पैदा हुआ। पुलिस ने नोट किया कि इन पोस्ट पर बहुत कम समय में बड़ी संख्या में आपत्तिजनक कमेंट्स और रीपोस्ट आए, जिससे सोशल मीडिया पर तनाव और अधिक बढ़ गया।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकसभा क्षेत्र में मणिकर्णिका घाट को तहस नहस किया गया, मंदिरों को तोड़ दिया गया। काशी विश्वनाथ जी के मंदिर का जीर्णोद्धार कराने वाली माता अहिल्याबाई होलकर जी की प्रतिमा भी तोड़ी गई जिसका विरोध काशी के साधुओं ने किया। इस कुकृत्य का अहिल्याबाई होलकर… pic.twitter.com/BDkp8dtsSA — AAP (@AamAadmiParty) January 18, 2026
मामले पर आप नेता संजय सिंह ने कहा, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकसभा क्षेत्र में मणिकर्णिका घाट को तहस नहस किया गया, मंदिरों को तोड़ दिया गया। काशी विश्वनाथ जी के मंदिर का जीर्णोद्धार कराने वाली माता अहिल्याबाई होलकर जी की प्रतिमा भी तोड़ी गई जिसका विरोध काशी के साधुओं ने किया। इस कुकृत्य का अहिल्याबाई होलकर जी के परिवार ने भी विरोध किया। यहां तक कि BJP की पूर्व सांसद और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन जी ने भी विरोध दर्ज कराया। मगर FIR मुझपर कर दी गई। सरकार मंदिरों को तोड़ने वाले पापियों पर कार्रवाई करे, मुझे डराने की कोशिश मत करे, मैं डरने वाला नहीं हूँ।’
मणिकर्णिका घाट पर चल रहा यह पुनर्विकास कार्य पिछले कुछ समय से स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय रहा है। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब बनारस का ये ऐतिहासिक श्मशान घाट पर काम जोरों पर है, हालांकि कुछ निवासियों ने इस प्रोजेक्ट का पहले भी विरोध किया था। स्थानीय निवासियों ने इलाके की ऐतिहासिक विरासत को संभावित नुकसान पहुंचने को लेकर अपनी चिंताएं जताई थीं। इसी संवेदनशीलता का फायदा उठाकर अफवाह फैलाने वालों ने एआई तकनीकों का सहारा लिया। वर्तमान में, वाराणसी प्रशासन और पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि सोशल मीडिया पर अफवाहें फैलाकर शांति भंग करने वालों के खिलाफ सख्त रुख जारी रहेगा।






