
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, फोटो- सोशल मीडिया
Avimukteshwaranand Controversy: संगम की रेती पर आयोजित माघ मेले के बीच एक बड़ी कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है। जगतगुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष महाराज ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर नाबालिग बच्चों के यौन उत्पीड़न और आय से अधिक संपत्ति जैसे सनसनीखेज आरोप लगाते हुए प्रयागराज की विशेष पॉक्सो कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
प्रयागराज के माघ मेले में प्रशासनिक विवाद के बाद चर्चा में आए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर अब गंभीर आपराधिक आरोप लगे हैं। आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने 8 फरवरी को प्रयागराज की विशेष पॉक्सो कोर्ट में एक वाद दायर किया है। इस शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया है कि अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर और गुरुकुल में नाबालिग बच्चों का यौन शोषण होता है। अपने आरोपों को मजबूती देने के लिए आशुतोष महाराज ने कोर्ट के समक्ष दो नाबालिग पीड़ित बच्चों को भी पेश किया, जिन्होंने अपने साथ हुई आपबीती साझा की।
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो कोर्ट में दाखिल किए गए वाद के अनुसार, पीड़ित बच्चों ने खुलासा किया कि उन्हें “असुरक्षित” महसूस कराया जाता था। बच्चों ने बताया कि अविमुक्तेश्वरानंद और उनके सहयोगियों ने उनके साथ कई बार यौन कुकर्म किया। आरोप है कि रात के समय आरोपी के शिष्य बच्चों पर यह कहकर दबाव बनाते थे कि “यह गुरु-सेवा है और इससे आशीर्वाद मिलेगा”।
बच्चों ने यह भी बताया कि उनसे जबरन निजी सेवा, भीड़ जुटाने और पालकी ढोने जैसे काम कराए जाते थे, जो बाल श्रम और मानवाधिकारों का उल्लंघन है। यह शोषण महाकुंभ 2025 और माघ मेला 2026 के दौरान भी जारी रहने का दावा किया गया है।
यौन शोषण के अलावा, आशुतोष महाराज ने अविमुक्तेश्वरानंद की पहचान और वित्तीय गतिविधियों पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अविमुक्तेश्वरानंद खुद को ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य बताकर फर्जी लेटरपैड और दस्तावेजों का निर्माण कर रहे हैं, जिससे प्रशासन और आम जनता को गुमराह किया जा रहा है। शिकायत में यह भी मांग की गई है कि उनके पास मौजूद आय से अधिक संपत्ति, कई बैंक खातों और उनके शिविर में अवैध हथियार होने की आशंका की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
इस कानूनी लड़ाई के पीछे माघ मेले की पुरानी रंजिश भी देखी जा रही है। 18 जनवरी (मौनी अमावस्या) के दिन पुलिस ने अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी को रोक दिया था, जिससे काफी हंगामा हुआ था। इस घटना पर जगतगुरु रामभद्राचार्य ने अविमुक्तेश्वरानंद का विरोध करते हुए कहा था कि उनके साथ कोई अन्याय नहीं हुआ है। इसके जवाब में अविमुक्तेश्वरानंद ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि रामभद्राचार्य को लोग गंभीरता से नहीं लेते। अब रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष महाराज द्वारा कोर्ट जाने से यह विवाद और गहरा गया है।
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पॉक्सो कोर्ट ने इस शिकायत पर संज्ञान लेते हुए अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। 10 फरवरी को अविमुक्तेश्वरानंद के वकील ने अपनी सफाई पेश करते हुए आशुतोष महाराज पर ही पलटवार किया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 20 फरवरी को होगी, जहाँ दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जज तय करेंगे कि इस मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज करने के आदेश दिए जाएं या वाद को रद्द कर दिया जाए।






