'जब हम काबा नहीं जाते, तो तुम्हारा यहां क्या काम है,' धीरेंद्र शास्त्री ने किसे बताया 'सेकुलरिज्म का कीड़ा'?

Dhirendra Shastri Statement: धीरेंद्र शास्त्री ने हरिद्वार में मुस्लिमों के प्रवेश, जनसंख्या वृद्धि और शिक्षा पद्धति पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने हिंदुओं को वेद पढ़ने और आबादी बढ़ाने की सलाह दी।
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धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Dhirendra Shastri on Population: उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में आयोजित हनुमत कथा के दौरान बागेश्वर धाम सरकार पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कई समसामयिक और धार्मिक मुद्दों पर अपनी राय व्यक्त की है। उन्होंने हरिद्वार के 'हर की पौड़ी' में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर कड़ा रुख अपनाते हुए काबा का उदाहरण दिया और साथ ही जनसंख्या नियंत्रण नीति पर भी सवाल उठाए।

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने हरिद्वार में मुसलमानों के प्रवेश को प्रतिबंधित करने की मांग का समर्थन करते हुए एक बड़ा बयान दिया है। बांदा में कथा के दौरान उन्होंने सवालिया लहजे में कहा, "मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है? जब हम काबा नहीं जाते, तो तुम्हारा बाबा के यहां क्या काम?" उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी को हिंदुत्व से परहेज है, तो उसे ऐसे स्थानों पर आने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि जो मुसलमान कथा सुनना चाहते हैं, उनका स्वागत है क्योंकि यह एक "पुराना और जान-पहचान का घर" है, लेकिन यदि वे आना नहीं चाहते तो उन्हें घर पर टीवी के माध्यम से प्रवचन सुनने चाहिए।

'नवेद-जावेद' वाली टिप्पणी

धीरेंद्र शास्त्री ने अपने उस पुराने बयान को भी दोहराया जिसमें उन्होंने कहा था कि 'अपने वेद नहीं पढ़ोगे, तो नावेद और जावेद बनोगे'। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह टिप्पणी सनातनियों को वेदों के प्रति जागरूक करने के लिए थी ताकि हिंदू परिवारों के बच्चे अपनी जड़ों से जुड़े रहें। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनका उद्देश्य हिंदुओं को शिक्षित करना है और यदि इस बयान से किसी को आपत्ति होती है, तो उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। उनके अनुसार, यह बयान पूरी तरह से हिंदुओं के हित में है।

शिक्षा पद्धति और 'सेकुलरिज्म का कीड़ा'

भारतीय शिक्षा व्यवस्था पर प्रहार करते हुए बाबा बागेश्वर ने कहा कि विदेशी आक्रांताओं ने सबसे पहले भारत की शिक्षा पद्धति को नष्ट किया। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में 'ग' से गणेश पढ़ाने को सांप्रदायिकता माना जाता है और उसकी जगह 'ग' से गधा पढ़ाया जा रहा है, जिससे बच्चे भी "गधे" बन रहे हैं। शास्त्री ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि देश में "सेकुलरिज्म का कीड़ा" काट रहा है और जिन लोगों को गुरुकुलम पद्धति से समस्या है, उन्हीं के कारण देश को नुकसान पहुँच रहा है।

जनसंख्या वृद्धि पर विवादित रुख

भारत की जनसंख्या नीति पर टिप्पणी करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने सरकार के "हम दो हमारे दो" के नारे पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब कुछ समुदायों में बच्चों की संख्या बहुत अधिक है, तो हिंदुओं को भी अपनी जनसंख्या बढ़ानी चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि यदि हिंदुओं को अपनी 'जल, जंगल, जमीन और जोरू' की रक्षा करनी है, तो उन्हें अपनी आबादी में इजाफा करना होगा। उनके अनुसार, संसाधनों की सुरक्षा के लिए जनसंख्या का संतुलन आवश्यक है।

बागेश्वर धाम में कैंसर अस्पताल की सौगात

सामाजिक सरोकारों पर बात करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने घोषणा की कि बुंदेलखंड के बागेश्वर धाम में 2027 तक एक अत्याधुनिक कैंसर अस्पताल बनकर तैयार हो जाएगा। उन्होंने कहा कि पहले अस्पतालों में मंदिर होते थे, लेकिन अब वे मंदिरों में अस्पताल बनवाएंगे। इस अस्पताल का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए जाने की योजना है। यह पहल बुंदेलखंड जैसे पिछड़े क्षेत्र के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

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