जैसलमेर। इमेज-सोशल मीडिया
January Travel Places: जनवरी। साल का पहला महीना। इस महीने सर्द हवा में धूप की मिठास घुली होती है। खेतों में सरसों खिली होती है। पहाड़ों पर बर्फ चमक रही होती है। रेगिस्तान में रातें लोककथा जैसी लगती हैं। यही वजह है कि जनवरी यात्रा का स्वर्णकाल है। भारत को नजदीक से समझना है तो इस महीने में सफर पर निकलें। इस महीने देश अपनी पूरी सुंदरता, संस्कृति, मौसम के संतुलन के साथ दिखाई देता है। अधिकतर भारतीय स्थलों पर इस महीने में घूमना अच्छा फैसला बन सकता है। यहां दुनियाभर से लोग खिंचे आते हैं।
जनवरी में घूमना कई कारणों से खास है। इस महीने गर्मी नहीं होती। त्योहार और कल्चर पीक पर होते हैं। फोटोग्राफी और आउटडोर एक्टिविटीज के लिए ये बेस्ट टाइम होता है। दरअसल, इस महीने में घूमना खुद को साल की शुरुआत में रिचार्ज करना है।
जनवरी में यहां का रेगिस्तान भी दोस्ताना लगने लगता है। दिन में हल्की धूप, रात में ठंडी हवा, ऊपर सितारों से भरा आसमान। डेजर्ट सफारी, लोक संगीत, ऊंट की सवारी, सोनार किले की दीवारों से टकराती सर्द हवा के कारण यूरोप और रूस से आए पर्यटक इसे डेजर्ट ड्रीम कहते हैं। यहां डेजर्ट फेस्टिवल का माहौल बनता है, जो विदेशी सैलानियों को खासा आकर्षित करता है।
उत्तराखंड स्थित औली को भारत का मिनी स्विट्जरलैंड कहते हैं। बर्फ देखनी और उस पर चलना है, गिरना है, फिर उठकर हंसना है तो औली परफेक्ट है। यहां की स्कीइंग स्लोप्स इंटरनेशनल लेवल की मानी जाती हैं। फ्रांस, जापान, ऑस्ट्रेलिया से आए स्की लवर्स यहां ट्रेनिंग और एडवेंचर को पहुंचते हैं। नंदा देवी की बर्फीली चोटियों के सामने खड़े होकर लगता है, जैसे प्रकृति ने तस्वीर खींच दी हो।
जनवरी महीने में गोवा का क्रेज अलग लेवल पर होता है। न्यू ईयर की गूंज थमी नहीं होती है। बीच पार्टियां, सनसेट क्रूज, योग रिट्रीट, म्यूजिक फेस्टिवल सब अपने चरम पर होता है। यूरोपियन और रूसी टूरिस्ट्स के लिए गोवा सिर्फ बीच नहीं, बल्कि लाइफस्टाइल डेस्टिनेशन है। इस महीने में नमी कम होती है, जिस कारण घूमना आसान और मजेदार रहता है।
यह भी पढ़ें: 26 जनवरी की छुट्टी में घूमें ये बेहतरीन डेस्टिनेशन, इस बार घर पर नहीं दोस्तों के साथ मनाएं जश्न
गुजरात के कच्छ के रण उत्सव के दौरान लोक नृत्य, हस्तशिल्प, संगीत और टेंट सिटी सब मिलकर एक अनुभव बनाते हैं, जिसे विदेशी सैलानी कल्चर ऑन व्हाइट कहते हैं। फुल मून नाइट पर सफेद नमक की जमीन पर पड़ती चांदनी देखने के लिए लोग महीनों पहले बुकिंग करा लेते हैं।
ठंडी सुबह, गंगा पर तैरती धुंध, घाटों पर जलते दीप यह सिर्फ दृश्य नहीं, बल्कि अनुभूति है। विदेशी सैलानी यहां पार्टी करने नहीं, शांति और अर्थ खोजने आते हैं। सुबह की गंगा आरती, नाव से घाटों का दर्शन, बनारसी चाय तक जनवरी में वाराणसी अपने सबसे सुंदर रूप में होता है।