BHU Mid Night Firing: काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई है। गुरुवार रात बिरला हॉस्टल के गेट पर बाइक सवारों ने छात्रों पर ताबड़तोड़ फायरिंग की। गनीमत रही कि छात्र बाल-बाल बच गए। इस घटना से आक्रोशित छात्र अब चीफ प्रॉक्टर के इस्तीफे की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए हैं।
वाराणसी का प्रतिष्ठित काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) एक बार फिर हिंसा का केंद्र बन गया है। घटना गुरुवार रात तकरीबन 9:00 से 9:10 बजे के बीच की है, जब बीए तृतीय वर्ष के छात्र रोशन मिश्रा अपने साथियों के साथ बिरला हॉस्टल के गेट पर खड़े होकर बातचीत कर रहे थे। तभी तीन बाइक सवार वहां पहुंचे।
चश्मदीदों के अनुसार, हमलावरों की पहचान पीयूष तिवारी, ऋषभ राय और तपस के रूप में हुई है, जिनमें से पीयूष और ऋषभ इसी विश्वविद्यालय के छात्र बताए जा रहे हैं। हमलावरों ने छात्रों को लक्ष्य करके लगभग 5 मीटर की दूरी से चार राउंड फायरिंग की। गोलीबारी के बाद हमलावर मौके से फरार हो गए, जिससे पूरे कैंपस में दहशत का माहौल पैदा हो गया।
इस हमले के बाद पीड़ित छात्र रोशन मिश्रा और उनके साथियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। रोशन का दावा है कि पिछले एक महीने से उन्हें जान का खतरा महसूस हो रहा था और वे लगातार इसकी सूचना वार्डन और प्रॉक्टोरियल बोर्ड को दे रहे थे। छात्रों का कहना है कि उन्होंने लिखित रूप में चीफ प्रॉक्टर को करीब 25-30 दिन पहले ही आगाह किया था कि कुछ लोग उनकी रेकी कर रहे हैं और उनके पास हथियार भी मौजूद हैं। वार्डन सत्य प्रकाश सिंह को भी इस संबंध में जानकारी दी गई थी, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। छात्रों का आरोप है कि प्रशासन की इसी ढिलाई के कारण आज सरेआम कैंपस के अंदर गोलियां चलीं।
फायरिंग की घटना के बाद भारी संख्या में छात्र बिरला हॉस्टल के गेट पर जमा हो गए और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। प्रदर्शनकारी छात्रों की मुख्य मांग है कि चीफ प्रॉक्टर को उनके पद से तत्काल हटाया जाए। छात्रों का कहना है कि जब उनकी सुरक्षा ही सुनिश्चित नहीं की जा सकती, तो चीफ प्रॉक्टर को पद पर रहने का कोई हक नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ सुरक्षाकर्मी और अधिकारी अपराधियों के साथ साठगांठ रखते हैं और लिखित शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती। छात्रों का धरना देर रात तक जारी रहा, जिससे पूरा कैंपस छावनी में तब्दील हो गया।
BHU Mid Night Firing: काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई है। गुरुवार रात बिरला हॉस्टल के गेट पर बाइक सवारों ने छात्रों पर ताबड़तोड़ फायरिंग की। गनीमत रही कि छात्र बाल-बाल बच गए। इस घटना से आक्रोशित छात्र अब चीफ प्रॉक्टर के इस्तीफे की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए हैं।
वाराणसी का प्रतिष्ठित काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) एक बार फिर हिंसा का केंद्र बन गया है। घटना गुरुवार रात तकरीबन 9:00 से 9:10 बजे के बीच की है, जब बीए तृतीय वर्ष के छात्र रोशन मिश्रा अपने साथियों के साथ बिरला हॉस्टल के गेट पर खड़े होकर बातचीत कर रहे थे। तभी तीन बाइक सवार वहां पहुंचे।
चश्मदीदों के अनुसार, हमलावरों की पहचान पीयूष तिवारी, ऋषभ राय और तपस के रूप में हुई है, जिनमें से पीयूष और ऋषभ इसी विश्वविद्यालय के छात्र बताए जा रहे हैं। हमलावरों ने छात्रों को लक्ष्य करके लगभग 5 मीटर की दूरी से चार राउंड फायरिंग की। गोलीबारी के बाद हमलावर मौके से फरार हो गए, जिससे पूरे कैंपस में दहशत का माहौल पैदा हो गया।
इस हमले के बाद पीड़ित छात्र रोशन मिश्रा और उनके साथियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। रोशन का दावा है कि पिछले एक महीने से उन्हें जान का खतरा महसूस हो रहा था और वे लगातार इसकी सूचना वार्डन और प्रॉक्टोरियल बोर्ड को दे रहे थे। छात्रों का कहना है कि उन्होंने लिखित रूप में चीफ प्रॉक्टर को करीब 25-30 दिन पहले ही आगाह किया था कि कुछ लोग उनकी रेकी कर रहे हैं और उनके पास हथियार भी मौजूद हैं। वार्डन सत्य प्रकाश सिंह को भी इस संबंध में जानकारी दी गई थी, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। छात्रों का आरोप है कि प्रशासन की इसी ढिलाई के कारण आज सरेआम कैंपस के अंदर गोलियां चलीं।
फायरिंग की घटना के बाद भारी संख्या में छात्र बिरला हॉस्टल के गेट पर जमा हो गए और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। प्रदर्शनकारी छात्रों की मुख्य मांग है कि चीफ प्रॉक्टर को उनके पद से तत्काल हटाया जाए। छात्रों का कहना है कि जब उनकी सुरक्षा ही सुनिश्चित नहीं की जा सकती, तो चीफ प्रॉक्टर को पद पर रहने का कोई हक नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ सुरक्षाकर्मी और अधिकारी अपराधियों के साथ साठगांठ रखते हैं और लिखित शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती। छात्रों का धरना देर रात तक जारी रहा, जिससे पूरा कैंपस छावनी में तब्दील हो गया।