Tradition Of Masaan Holi: वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर मसान होली की परंपरा पर गंभीर विवाद छिड़ गया है। मसान होली की परंपरा को लेकर डोम राजा परिवार के वंशज विश्वनाथ चौधरी ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर इस आयोजन पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है। मणिकर्णिका घाट पर दाह संस्कार में आने वाली बाधाओं के कारण उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर यह हुड़दंग नहीं रुका तो वे दाह संस्कार रोक देंगे।
विश्वनाथ चौधरी का कहना है कि यह तथाकथित परंपरा शास्त्रों के अनुसार नहीं है और इससे श्मशान की गरिमा को ठेस पहुंच रही है। उनका तर्क है कि होली के नाम पर शराब और बीयर पीकर लोग हुड़दंग करते हैं, जिससे शव लेकर आने वाले शोकाकुल परिवारों को भारी परेशानी होती है। कई बार परिजनों को दाह संस्कार के लिए 4 से 10 घंटे तक इंतजार करना पड़ता है, जो उनके दुख को और बढ़ा देता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि काशी की असली परंपरा रंग भरी एकादशी है जब बाबा विश्वनाथ गौना कराकर लौटते हैं। मसान होली को उन्होंने केवल सोशल मीडिया पर रील बनाने के लिए रचा गया एक नाटक करार दिया है।
इस विरोध में काशी विद्वत परिषद भी शामिल हो गई है। परिषद का मानना है कि मसान होली सनातन धर्म के स्वरूप को बिगाड़ रही है। विद्वानों के अनुसार श्मशान उत्सव मनाने की जगह नहीं है बल्कि वहां एक विशेष मर्यादा का पालन होना चाहिए। वहां युवक-युवतियों द्वारा किया जाने वाला नृत्य और तांडव पूरी तरह से अशास्त्रीय है क्योंकि साधारण मनुष्य भगवान शिव के सामर्थ्य की बराबरी नहीं कर सकते। डोम राजा परिवार ने प्रशासन से मांग की है कि श्मशान में केवल मसान बाबा के मंदिर तक ही धार्मिक अनुष्ठान सीमित रखे जाएं और घाटों पर होने वाले इस शोर-शराबे को बंद किया जाए ताकि शव यात्रियों को कोई अड़चन न आए। अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे महाश्मशान पर विरोध प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे।
Tradition Of Masaan Holi: वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर मसान होली की परंपरा पर गंभीर विवाद छिड़ गया है। मसान होली की परंपरा को लेकर डोम राजा परिवार के वंशज विश्वनाथ चौधरी ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर इस आयोजन पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है। मणिकर्णिका घाट पर दाह संस्कार में आने वाली बाधाओं के कारण उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर यह हुड़दंग नहीं रुका तो वे दाह संस्कार रोक देंगे।
विश्वनाथ चौधरी का कहना है कि यह तथाकथित परंपरा शास्त्रों के अनुसार नहीं है और इससे श्मशान की गरिमा को ठेस पहुंच रही है। उनका तर्क है कि होली के नाम पर शराब और बीयर पीकर लोग हुड़दंग करते हैं, जिससे शव लेकर आने वाले शोकाकुल परिवारों को भारी परेशानी होती है। कई बार परिजनों को दाह संस्कार के लिए 4 से 10 घंटे तक इंतजार करना पड़ता है, जो उनके दुख को और बढ़ा देता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि काशी की असली परंपरा रंग भरी एकादशी है जब बाबा विश्वनाथ गौना कराकर लौटते हैं। मसान होली को उन्होंने केवल सोशल मीडिया पर रील बनाने के लिए रचा गया एक नाटक करार दिया है।
इस विरोध में काशी विद्वत परिषद भी शामिल हो गई है। परिषद का मानना है कि मसान होली सनातन धर्म के स्वरूप को बिगाड़ रही है। विद्वानों के अनुसार श्मशान उत्सव मनाने की जगह नहीं है बल्कि वहां एक विशेष मर्यादा का पालन होना चाहिए। वहां युवक-युवतियों द्वारा किया जाने वाला नृत्य और तांडव पूरी तरह से अशास्त्रीय है क्योंकि साधारण मनुष्य भगवान शिव के सामर्थ्य की बराबरी नहीं कर सकते। डोम राजा परिवार ने प्रशासन से मांग की है कि श्मशान में केवल मसान बाबा के मंदिर तक ही धार्मिक अनुष्ठान सीमित रखे जाएं और घाटों पर होने वाले इस शोर-शराबे को बंद किया जाए ताकि शव यात्रियों को कोई अड़चन न आए। अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे महाश्मशान पर विरोध प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे।