NASA के दावे में छिपी अजित पवार के प्लेन क्रैश की सच्चाई, प्राइवेट जेट क्यों होता है ज्यादा खतरनाक?

Plane Crash NASA Report: महाराष्ट्र को एक गहरा सदमा दें दिया। बारामती एयरपोर्ट के पास हुए दर्दनाक प्लेन क्रैश में राज्य के डिप्टी सीएम अजित पवार समेत 5 लोगों की मौत कि खबर ने सब को हिला कर रख दिया।
The truth about Ajit Pawar's plane crash is hidden in NASA's claims; why are private jets more dangerous?
NASA-Ames Research Center (Source. Design)
Published on
Updated on

Ajit Pawar Private Jet Crash: बुधवार की सुबह ने महाराष्ट्र को एक गहरा सदमा दें दिया। बारामती एयरपोर्ट के पास हुए दर्दनाक प्लेन क्रैश में राज्य के डिप्टी सीएम अजित पवार समेत 5 लोगों की मौत कि खबर ने सब को हिला कर रख दिया। हादसा उस समय हुआ जब अजित पवार मुंबई से बारामती जा रहे थे। जिस विमान में वे सवार थे, वह एक मिड-साइज चार्टर्ड प्राइवेट जेट Learjet-45 था। इस हादसे ने न केवल राजनीतिक हलकों को झकझोर दिया, बल्कि आम लोगों के मन में यह सवाल भी खड़ा कर दिया कि क्या छोटे और प्राइवेट जेट बड़े कमर्शियल विमानों के मुकाबले ज्यादा जोखिम भरे होते हैं?

अजित पवार के प्लेन क्रैश की जांच कहां तक पहुंची?

DGCA के सीनियर अधिकारियों के मुताबिक, इस हादसे की जांच अब तकनीकी स्तर पर शुरू हो चुकी है। जांच टीम विमान के मलबे के फैलाव, टकराव की दिशा, लैंडिंग के समय स्पीड और एंगल का गहराई से अध्ययन कर रही है। क्रैश साइट की हाई-रेजोल्यूशन फोटोग्राफी कराई जा रही है ताकि यह पता चल सके कि विमान जमीन से किस कोण पर टकराया। असली वजह ब्लैक बॉक्स के डेटा और तकनीकी रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगी, लेकिन शुरुआती संकेत कई अहम संभावनाओं की ओर इशारा कर रहे हैं।

प्राइवेट जेट क्रैश होने की सबसे बड़ी वजहें

एविएशन एक्सपर्ट्स के अनुसार, प्राइवेट जेट हादसों की सबसे आम वजह इंजन या कंट्रोल सिस्टम में अचानक आई खराबी होती है। लैंडिंग के दौरान पायलट को कुछ ही सेकेंड्स में स्पीड, एंगल और ऊंचाई को संतुलित करना होता है। अगर इसी दौरान इंजन रिस्पॉन्स में देरी हो जाए या कंट्रोल सिस्टम सही काम न करे, तो स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है। लियरजेट-45 जैसे हल्के विमानों में यह चुनौती और बढ़ जाती है, क्योंकि गलती सुधारने के लिए वक्त बेहद कम होता है।

NASA का डेटा क्या बताता है?

NASA-Ames Research Center की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनियाभर में होने वाले विमान हादसों में करीब 50% मामलों में पायलट एरर एक बड़ा कारण होता है। यानी हर दो में से एक हादसा मानवीय गलती से जुड़ा होता है।

लैंडिंग के वक्त अगर स्पीड या एंगल सही न हो, तो पायलट को गो-अराउंड यानी दोबारा उड़ान भरनी चाहिए। लेकिन VIP फ्लाइट्स में समय का दबाव जोखिम को बढ़ा देता है। इसका मतलब यह नहीं कि पायलट अनुभवहीन होता है, बल्कि हालात इतनी तेजी से बदलते हैं कि एक गलत फैसला भारी पड़ सकता है।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, अजित पवार का विमान लैंडिंग से पहले करीब 100 फीट की ऊंचाई पर पहुंचकर दोबारा ऊपर उठने की कोशिश करता दिखा, जो आखिरी क्षणों में नियंत्रण की कोशिश का संकेत देता है।

छोटे जेट की सबसे बड़ी कमजोरी क्या है?

भले ही हादसे के वक्त मौसम साफ बताया जा रहा हो, लेकिन एविएशन में सिर्फ साफ आसमान ही सबकुछ नहीं होता। हवा की दिशा में अचानक बदलाव, लो-लेवल टर्बुलेंस और रनवे के आसपास बनने वाली एयर करंट्स छोटे और हल्के विमानों को अस्थिर कर सकती हैं। लियरजेट जैसे जेट कम ऊंचाई पर उड़ते हैं और बड़े विमानों की तुलना में हवा के असर को जल्दी झेलते हैं। साल 2008 में मेक्सिको सिटी में लियरजेट-45 का क्रैश भी इसी वजह से हुआ था, जिसमें 16 लोगों की जान गई थी।

क्या रनवे भी हादसे की वजह बन सकता है?

किसी भी लैंडिंग में रनवे की हालत बेहद अहम होती है। अगर रनवे गीला हो, उसकी ग्रिप कम हो या रोशनी पर्याप्त न हो, तो सही स्पीड और एंगल के बावजूद विमान फिसल सकता है। छोटे एयरपोर्ट्स पर रनवे की लंबाई और आधुनिक सेफ्टी सिस्टम सीमित होते हैं, जिससे जोखिम और बढ़ जाता है। शुरुआती रिपोर्ट्स में आशंका जताई जा रही है कि विमान रनवे से फिसलकर बाहर गया, हालांकि इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

क्यों ज्यादा घातक माने जाते हैं छोटे प्राइवेट जेट?

एविएशन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, छोटे और मिड-साइज जेट हल्के होते हैं, बार-बार टेकऑफ और लैंडिंग करते हैं और अक्सर सीमित सुविधाओं वाले एयरपोर्ट्स पर उतरते हैं। इन विमानों में गलती की गुंजाइश बेहद कम होती है। जहां बड़े विमानों में सुधार का ज्यादा वक्त और जगह मिलती है, वहीं छोटे जेट में एक छोटी सी चूक भी बड़े हादसे में बदल सकती है। यही वजह है कि आंकड़ों में प्राइवेट और चार्टर्ड जेट्स से जुड़े हादसे ज्यादा जानलेवा नजर आते हैं।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com