MSCB घोटाला केस में अजित पवार को क्लीन चिट, कोर्ट ने क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार की

Maharashtra Cooperative Bank Scam Case: महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक घोटाले में अदालत ने क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर अजित पवार समेत सभी आरोपियों को क्लीन चिट दे दी।
Ajit Pawar
अजित पवार (सोर्स: सोशल मीडिया)
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MSCB Scam Ajit Pawar Clean Chit: महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक (एमएससीबी) में हुए 25,000 करोड़ रुपये के कथित घोटाले के मामले में स्थानीय अदालत ने पुलिस की मामला बंद करने की रिपोर्ट (क्लोजर रिपोर्ट) स्वीकार करते हुए महाराष्ट्र के दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार और अन्य को क्लीन चिट दे दी है।

अदालत ने कहा कि आरोपी किसी भी तरह की गैरकानूनी या धोखाधड़ी की योजना का हिस्सा नहीं थे। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि केवल नियमों या प्रक्रियाओं में कुछ कमी को अपराध नहीं माना जा सकता।

अदालत ने यह भी कहा कि बैंक के निदेशकों के बीच किसी गैरकानूनी काम करने की कोई योजना नहीं थी और किसी ने सरकारी पैसे का निजी लाभ के लिए दुरुपयोग नहीं किया।

किसी दस्तावेज को नकली साबित नहीं किया जा सका। अदालत ने आगे कहा, "कोई भी बेईमानी, धोखाधड़ी या सरकारी संपत्ति का अपने निजी उपयोग के लिए गबन नहीं हुआ है। ऐसा कोई दस्तावेज भी नहीं है जिसे फर्जी कहा जा सके।" अदालत ने कहा कि लगभग 850 करोड़ रुपये की वसूली हो चुकी है और बाकी राशि की वसूली की प्रक्रिया अभी जारी है।

सांसदों और विधायकों से जुड़े मामलों के विशेष न्यायाधीश महेश जाधव ने 27 फरवरी को ईओडब्ल्यू द्वारा प्रस्तुत 'सी-समरी' रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया। कारण सहित आदेश सोमवार को उपलब्ध कर दिया गया। 'सी-समरी' रिपोर्ट तब पुलिस द्वारा दाखिल की जाती है जब किसी शिकायत को न सही और न ही गलत पाया जाता है।

पवार सहित अधिकारी व MSCB निदेशक थे नामजद

जांच की शुरुआत 2019 में बंबई उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद हुई। पवार के अलावा प्राथमिकी में सरकारी अधिकारियों, उस समय के एमएससीबी के निदेशक और कर्मचारी तथा अन्य लोग भी नामजद किए गए थे। अदालत ने क्लोजर रिपोर्ट को चुनौती देने वाली 20 से अधिक याचिकाओं को खारिज कर दिया था, जिसमे समाजसेवी अन्ना हजारे द्वारा दायर याचिका भी शामिल थी।

यह कथित घोटाला सहकारी चीनी मिलों, कताई मिलों और अन्य इकाइयों को जिला और सहकारी बैंकों द्वारा नियमों का अनुपालन किए बिना कर्ज देने से संबंधित है। एमएससीबी महाराष्ट्र का शीर्ष सहकारी बैंक है। ईओडब्ल्यू का आरोप था कि इस घोटाले की वजह से सरकारी खजाने को जनवरी, 2007 से दिसंबर, 2017 के दौरान 25,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था।

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