
Dangerous Horror Game (Source. Freepik)
Kids Safety Horror Mobile Games: आज के दौर में मोबाइल फोन बच्चों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। स्कूल से लौटने के बाद, होमवर्क के बीच या खाली समय में घंटों मोबाइल पर गेम खेलना अब आम बात है। जहां कई गेम्स मनोरंजन और दिमागी विकास के लिए ठीक माने जाते हैं, वहीं कुछ हॉरर यानी डरावने मोबाइल गेम्स बच्चों की मानसिक सेहत के लिए खतरा बनते जा रहे हैं। हाल ही में गाजियाबाद में तीन सगी बहनों की आत्महत्या की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। इस मामले के बाद यह सवाल फिर चर्चा में है कि क्या डरावने गेम्स बच्चों के मन पर गलत असर डाल रहे हैं।
पुलिस जांच में यह सामने आया कि आत्महत्या का सीधा कारण मोबाइल गेम्स नहीं थे, लेकिन लड़कियों की डायरी में बार-बार कुछ हॉरर गेम्स का जिक्र मिला। यही बात चिंता की वजह बन गई। एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब बच्चे लंबे समय तक डरावना कंटेंट देखते या खेलते हैं, तो उनका दिमाग लगातार डर और तनाव में रहता है। बिना पैरेंटल कंट्रोल के घंटों मोबाइल इस्तेमाल करने से यह असर और गहरा हो सकता है। कम उम्र में ऐसा कंटेंट बच्चों में एंग्जायटी, डर और नकारात्मक सोच बढ़ा सकता है।
जांच के दौरान चार गेम्स के नाम बार-बार सामने आए Poppy Playtime, The Baby in Yellow, Evil Nun और Ice Scream। ये गेम्स ऐप स्टोर पर आसानी से उपलब्ध हैं और ज्यादातर फ्री या बेहद सस्ते हैं। कार्टून जैसे ग्राफिक्स के बावजूद इनकी कहानी और माहौल काफी डरावना होता है, जो बच्चों के कोमल मन पर गहरा असर डाल सकता है।
इस गेम में खिलाड़ी खुद को एक सुनसान खिलौना फैक्ट्री में पाता है। अंधेरा माहौल, अजीब आवाजें और अचानक डराने वाले सीन दिल की धड़कन बढ़ा देते हैं। Huggy Wuggy जैसे किरदार बच्चों में बेचैनी और डर पैदा कर सकते हैं। भले ही यह गेम टीनएजर्स के लिए बना हो, लेकिन छोटे बच्चे भी इसे खेल रहे हैं।
इस गेम में खिलाड़ी एक बेबीसिटर होता है, जिसे एक रहस्यमयी बच्चे की देखभाल करनी होती है। धीरे-धीरे डरावनी घटनाएं शुरू हो जाती हैं। मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक, बच्चों की देखभाल जैसी सामान्य चीज में हॉरर मिलाना छोटे बच्चों को कन्फ्यूज और असहज कर सकता है।
Evil Nun में एक डरावनी नन से बचकर स्कूल से निकलने की कहानी है, जबकि Ice Scream में एक खलनायक बच्चों का अपहरण करता है। डर, कैद और किडनैपिंग जैसे विषय संवेदनशील बच्चों में असुरक्षा और घबराहट बढ़ा सकते हैं।
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विशेषज्ञों का कहना है कि माता-पिता को बच्चों के मोबाइल इस्तेमाल पर नजर रखना बेहद जरूरी है। कौन-सा गेम खेला जा रहा है, कितनी देर तक खेला जा रहा है यह सब जानना जरूरी है। पैरेंटल कंट्रोल ऑन करें, गेम की एज रेटिंग देखें और स्क्रीन टाइम लिमिट तय करें। बच्चों से खुलकर बात करें ताकि वे अपने डर साझा कर सकें। अगर बच्चे के व्यवहार में अचानक बदलाव दिखे, तो बिना देर किए प्रोफेशनल मदद लें। समय पर ध्यान ही बच्चों की मानसिक सेहत को सुरक्षित रख सकता है।






