मैच के दौरान नीतीश रेड्डी व रिंकू सिंह (सौ. बीसीसीआई)
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नई दिल्ली : बांग्लादेश के खिलाफ तीन मैचों की श्रृंखला के दूसरे टी-20 अंतरराष्ट्रीय में यहां अर्धशतक जमाते हुए हरफनमौला नीतीश रेड्डी के साथ 49 गेंद में 108 रन की साझेदारी कर भारत की जीत की नींव रखने वाले रिंकू सिंह ने कहा कि उन्हें कोच और कप्तान ने अपनी नैसर्गिक बल्लेबाजी करने की छूट दी है।
भारत ने बुधवार को पहले बल्लेबाजी का न्योता मिलने पर नौ विकेट पर 221 रन बनाने के बाद बांग्लादेश को नौ विकेट पर 135 रन पर रोक दिया। इस जीत से भारत ने 2-0 की अजेय बढ़त बना ली है। इसी मैच के बाद रिंकू ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि कोच और कप्तान ने किसी भी तरह की परिस्थिति में मुझे अपना नैसर्गिक खेल खेलने के साथ अपने मजबूत पक्ष पर बने रहने की सलाह दी है। इसी के चलते बल्लेबाजी कर रहे हैं।
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रिंकू जब क्रीज पर आये तब टीम मुश्किल में थी लेकिन उनकी और रेड्डी की जोड़ी ने शुरुआत की कुछ गेंदों पर संभल कर खेलने के बाद आक्रामक रूख अपनाया। रिंकू ने कहा कि इस पिच पर पारी की शुरुआत में बल्लेबाजी थोड़ी मुश्किल थी। जब मैच शुरू हुआ तो गेंद थोड़ी रुक कर आ रही थी। संजू सैमसन और सूर्यकुमार यादव के आउट इसी वजह से आउट हुए। जब मैं बल्लेबाजी के लिए आया तो नीतीश रेड्डी ने कहा कि गेंद थोड़ी फंस कर आ रही है और हमें उसी मुताबिक खेलना चाहिये।
रिंकू ने कहा कि कुछ ओवरों के बाद में जब पिच बल्लेबाजी के लिए आसान हो गयी तो हमने बड़ी साझेदारी बनाने के साथ कमजोर गेंदों के खिलाफ बड़ा शॉट खेलने की योजना बनायी।
रिंकू ने कहा कि रेड्डी के फ्री हिट (नौवें ओवर मे महमुदुल्लाह के खिलाफ) पर छक्का मारने के बाद मैच का रुख हमारी ओर मुड़ने लगा। रेड्डी के द्वारा फ्री हिट पर लगाये छक्के के बाद से मैच पर हमारी पकड़ मजबूत होती चली गयी। हमने इसके बाद वाले ओवर (रिशाद हुसैन के खिलाफ) में चार छक्के (तीन छक्के और एक चौका) लगा दिए, जिससे बांग्लादेशी गेंदबाज बैकफुट पर जाने लगे।
रिंकू का टी-20 अंतरराष्ट्रीय में यह तीसरा अर्धशतक है, लेकिन इसके लिए उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ा। उन्होंने अपना पिछला अर्धशतक इस साल 17 जनवरी को अफगानिस्तान के खिलाफ लगाया था। इस दौरान ज्यादातर मैचों शीर्ष क्रम के शानदार प्रदर्शन के कारण उन्हें हालांकि बल्लेबाजी के सीमित मौके ही मिले।
रिंकू ने कहा कि वह जिस क्रम पर बल्लेबाजी के लिए आते हैं, वहां उनको अलग-अलग परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। जब भी पहले बल्लेबाजी आती है तो यही कोशिश होती है कि शुरुआत दौड़कर रन बनाएं। जब आखिरी के दो-तीन ओवरों में बल्लेबाजी का मौका मिलता है तो टीम के लिए तेजी से रन बनाने के लिए चौके छक्के लगाने की योजना होती है।