मनपा चुनाव के बीच हाईकोर्ट सख्त: 2,740 करोड़ की योजनाओं पर रोक नहीं, बॉम्बे हाईकोर्ट का आदेश

Development Projects: मनपा चुनाव के बीच बॉम्बे हाईकोर्ट ने सख्त आदेश देते हुए कहा है कि छत्रपति संभाजीनगर में स्वीकृत 2,740 करोड़ रुपये की विकास योजनाओं के कार्य किसी भी स्थिति में रोके नहीं जाएं।
Amidst municipal elections, High Court takes strict stance: No stay on projects worth ₹2,740 crore, orders Bombay High Court
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स : सोशल मीडिया )
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Sambhajinagar Municipal Election: छत्रपति संभाजीनगर मनपा चुनाव की पृष्ठभूमि में बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक अहम और सख्त आदेश देते हुए कहा है कि शहर में स्वीकृत और जारी 2,740 करोड़ रुपये की विकास योजनाओं के कार्य किसी भी हालत में रोके नहीं जाएं। अदालत ने स्पष्ट किया कि चुनाव, सत्ता परिवर्तन या राजनीतिक मतभेदों के नाम पर जनहित से जुड़े विकास कार्यों में हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में भावी नगरसेवको की और इशारा करते हुए कहा कि कहा कि मनपा क्षेत्र में चल रही बुनियादी सुविधाओं, सड़क, जलापूर्ति, सीवरेज, स्मार्ट सिटी, आवास और अन्य नागरिक परियोजनाएं जनता के हित से जुड़ी हैं। इन योजनाओं को रोकना या जानबूझकर विलंब करना सीधे तौर पर नागरिक अधिकारों का उल्लंघन माना जाएगा।

जिम्मेदारों पर होगी कार्रवाई

  • अदालत ने विशेष रूप से यह चेतावनी दी कि आगामी चुनावों के बाद चुने जाने वाले नगरसेवक या पदाधिकारी यदि राजनीतिक कारणों से पूर्व स्वीकृत योजनाओं को रोकने, पुनरीक्षण करने या ठेके रद्द करने का प्रयास करते हैं, तो इसे गंभीरता से लिया जाएगा।
  • ऐसे मामलों में जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि विकास कार्य किसी एक दल या जनप्रतिनिधि की निजी संपत्ति नहीं होते, बल्कि यह जनता के टैक्स और सरकारी निधि से किए जाते हैं।
  • इसलिए सत्ता में बदलाव के बावजूद विकास की निरंतरता बनाए रखना निर्वाचित नगरसेवको की संवैधानिक जिम्मेदारी है।

आम नागरिकों को हो रही भारी परेशानी

अदालत के अनुसार, मनपा चुनाव के दौरान अक्सर देखा जाता है कि नई परिषद गठित होने के बाद पूर्व परिषद द्वारा स्वीकृत परियोजनाओं को राजनीतिक द्वेष के कारण रोका जाता है। इससे न केवल परियोजनाओं की लागत बढ़ती है, बल्कि आम नागरिकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

इसी पृष्ठभूमि में हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट और कठोर रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने प्रशासन और मनपा अधिकारियों को भी निर्देश दिए हैं कि वे किसी भी राजनीतिक दबाव में आए बिना विकास योजनाओं का कार्य नियमित रूप से का चुनावी जारी रखें। यदि किसी स्तर पर बाधा उत्पन्न होती है, तो इसकी जानकारी तुरंत अदालत के संज्ञान में लाई जाए।

इस आदेश को चुनावी माहौल में विकास बनाम राजनीति की बहस के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शहरवासियों के लिए यह फैसला राहत देने वाला है, क्योंकि इससे लंबे समय से लंबित या जारी परियोजनाओं के समय पर पूरा होने की उम्मीद बढ़ी है। राजनीतिक हलकों में भी इसे भावी नगरसेवको के लिए एक कड़ा संदेश माना जा रहा है कि जनहित से समझौता किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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