
मुरलीकांत पेटकर (सौजन्य-एक्स)
पेरिस: पेरिस पैरालंपिक 2024 शुरू होने में अब बस दो दिन का समय ही बचा है। जिसमें हिस्सा लेने के लिए भारतीय पैरा एथलीटों का जत्था पेरिस के लिए रवाना हो चुका है और अभ्यास कर रहा है।
पेरिस पैरालंपिक 2024 खेलों की शुरुआत 28 अगस्त से होगी जो 8 सितंबर तक चलेंगे। जिसके लिए भारतीय दल पूरी तरह से तैयार है। इस बार भारत को 20 से ज्यादा मेडल की उम्मीदें है। इससे पहले टोक्यो में हुए पैरालंपिक में भारत ने कुल 19 मेडल अपने नाम किए थे। इनमें 5 गोल्ड, 8 सिल्वर और 6 ब्रॉन्ज मेडल शामिल थे।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि पैरालंपिक में भारत को अपना पहला गोल्ड मेडल कब मिला था और वो किसने दिलाया था। नहीं जानते है तो हम बताते है, इस बारे में कम ही लोग हैं। भारत के मुरलीकांत पेटकर वो शख्स है जिन्होंने भारत को पहला पैरालंपिक गोल्ड मेडल जिताया था।
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1972 के हीडलबर्ग पैरालंपिक में भारत के मुरलीकांत पेटकर 50 मीटर तैराक के रूप में पैरालंपिक में भारत की ओर से शामिल हुए थे। जहां उन्होंने 50 मीटर फ्रीस्टाइल 3 इवेंट में गोल्ड मेडल जीता था। मुरलीकांत पेटकर पद्मश्री से भी सम्मानित किए जा चुके है।
आपको बताते चलें कि मुरलीकांत पेटकर भारतीय सेना के एक जवान थे। वे तैराकी तो करते ही थे लेकिन उससे पहले वह मुक्केबाजी भी किया करते थे। जब वे भारतीय सेना में थे तब देश की रक्षा के करने के दौरान वे 1965 में हुए भारत-पाकिस्तान के युद्ध में शामिल हुए थे।
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इस युद्ध के दौरान मुरलीकांत पेटकर को कई गोलियां लगी थीं, जिसके कारण वह पैरालाइज्ड हो गए। युद्ध के दौरान एक गोली उनकी रीढ़ की हड्डी में भी लगी थी, जो आज तक नहीं निकली है।
युद्ध में गंभीर रूप से घायल होने के बाद मुरलीकांत पेटकर 18 महीने तक कोमा में रहे। होश में आने के बाद उन्हें पता चला कि उनका निचला हिस्सा पैरालाइज हो गया। जिसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें तैराकी करने की सलाह दी थी। जिसे उन्होंने अपनाया और तैराकी में वे इतने आगे बढ़ गए कि फिर उन्होंने अपनी तैराकी के जरिए पैरालंपिक में भारत को पहला गोल्ड मेडल दिलाया।
जानकारी के लिए आपको बताते चले कि हाल ही में रीलीज कार्तिक आर्यन की फिल्म चंदू चैंपियन मुरलीकांत पेटकर पर ही बनी है।






