

Shubman Gill Captaincy Controversy: न्यूजीलैंड के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज में 2-1 से हार झेलने के बाद भारतीय टीम आलोचनाओं के घेरे में आ गई है। इस हार के बाद सबसे ज्यादा सवाल कप्तान शुभमन गिल की कप्तानी को लेकर उठ रहे हैं। सीरीज के दौरान टीम का प्रदर्शन उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका, जिसके चलते गिल के फैसलों और रणनीति पर भी उंगलियां उठने लगी हैं। कई पूर्व खिलाड़ी और क्रिकेट विशेषज्ञ मान रहे हैं कि वनडे फॉर्मेट में भारत को मजबूत नेतृत्व की जरूरत है, खासकर तब जब 2027 वनडे वर्ल्ड कप ज्यादा दूर नहीं है।
पूर्व भारतीय बल्लेबाज मनोज तिवारी ने शुभमन गिल की कप्तानी पर खुलकर सवाल खड़े किए हैं। इनसाइड स्पोर्ट्स से बातचीत में तिवारी ने कहा कि रोहित शर्मा को वनडे कप्तानी से हटाने की कोई ठोस वजह नहीं थी। उनके मुताबिक, रोहित की कप्तानी में टीम इंडिया सही दिशा में आगे बढ़ रही थी और बड़े टूर्नामेंट में टीम का प्रदर्शन भी भरोसेमंद रहा है। तिवारी का मानना है कि कप्तानी सिर्फ फॉर्म का मामला नहीं होती, बल्कि अनुभव और दबाव में सही फैसले लेने की क्षमता भी उतनी ही अहम होती है।
जब मनोज तिवारी से पूछा गया कि क्या शुभमन गिल को हटाकर तुरंत रोहित शर्मा को वनडे कप्तान बनाया जाना चाहिए, तो उन्होंने बिना हिचक साफ जवाब दिया। तिवारी ने कहा कि अभी भी हालात संभालने का समय है और बिना देरी किए यह फैसला लिया जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह सिर्फ किसी द्विपक्षीय सीरीज की बात नहीं है, बल्कि आने वाले वनडे वर्ल्ड कप की तैयारी का सवाल है। तिवारी के अनुसार, रोहित शर्मा की कप्तानी में भारत के पास 2027 वर्ल्ड कप जीतने की संभावनाएं कहीं ज्यादा मजबूत होंगी।
न्यूजीलैंड से पहले ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेली गई तीन मैचों की वनडे सीरीज में भी भारतीय टीम को 2-1 से हार का सामना करना पड़ा था। ऑस्ट्रेलिया ने अपनी घरेलू जमीन पर भारत को मात दी थी, जिससे गिल की कप्तानी पर पहले ही दबाव बन गया था। अब तक शुभमन गिल की अगुआई में टीम इंडिया एक भी वनडे सीरीज जीतने में सफल नहीं हो पाई है, जो आलोचनाओं की बड़ी वजह बन रही है।
शुभमन गिल को भविष्य का बड़ा खिलाड़ी माना जा रहा है और उनकी बल्लेबाजी में किसी को शक नहीं है, लेकिन कप्तानी के मोर्चे पर अभी उन्हें और समय चाहिए, ऐसा कई जानकारों का मानना है। दूसरी ओर, रोहित शर्मा का अनुभव, बड़े मैचों में शांत स्वभाव और टीम को संभालने की क्षमता भारत के लिए अहम साबित हो सकती है। ऐसे में चयनकर्ताओं के सामने अब बड़ा सवाल है कि वे भविष्य की तैयारी पर फोकस करें या मौजूदा समय में अनुभवी कप्तान के सहारे टीम को स्थिरता दें।