IND vs NZ: हार में भी छिपी जीत! कोहली की फॉर्म, रेड्डी और हर्षित का उदय; 2027 वर्ल्ड कप के लिए मिले ये संकेत

IND vs NZ ODI Series: ब्लैक कैप्स से वनडे सीरीज हार के बाद टीम इंडिया आलोचनाओं में है, लेकिन इसके बावजूद शुभमन गिल की टीम को आईसीसी वनडे वर्ल्ड कप 2027 से पहले कुछ सकारात्मक संकेत जरूर मिले हैं।
IND vs NZ: हार में भी छिपी जीत! कोहली की फॉर्म, रेड्डी और हर्षित का उदय; 2027 वर्ल्ड कप के लिए मिले ये संकेत
विराट कोहली और हर्षित राणा (फोटो- सोशल मीडिया)
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Positives Signs In ODI Team India: न्यूजीलैंड के खिलाफ अपनी ही जमीन पर पहली बार वनडे सीरीज गंवाना टीम इंडिया के लिए जरूर निराशाजनक रहा, लेकिन इस हार के बीच कुछ ऐसे पहलू भी सामने आए हैं, जो आने वाले समय के लिए उम्मीद जगाते हैं। खासतौर पर 2027 में होने वाले वनडे वर्ल्ड कप को देखते हुए यह सीरीज भारत के लिए कुछ अहम पॉजिटिव संकेत छोड़ गई है। आइए जानते हैं किन वजहों से यह हार भी भविष्य की तैयारी में काम आ सकती है।

हर्षित राणा ने दिखाया ऑलराउंडर बनने का माद्दा

भारतीय तेज गेंदबाजों से आमतौर पर निचले क्रम में लंबी पारियों की उम्मीद नहीं की जाती, लेकिन हर्षित राणा ने इस धारणा को तोड़ने का काम किया। इंदौर में खेले गए तीसरे वनडे में उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर का पहला अर्धशतक जमाया। दबाव की स्थिति में जिस आत्मविश्वास के साथ उन्होंने बल्लेबाजी की, वह काबिले तारीफ रही। अगर टीम मैनेजमेंट उन्हें सही दिशा में ग्रूम करता है, तो आने वाले समय में भारत को एक भरोसेमंद पेस बॉलिंग ऑलराउंडर मिल सकता है। 2027 वर्ल्ड कप से पहले यह विकल्प टीम के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है।

विराट कोहली की शानदार फॉर्म बनी बड़ी ताकत

सीरीज भले ही भारत के हाथ से निकल गई हो, लेकिन विराट कोहली की बल्लेबाजी ने फैंस को राहत जरूर दी। तीन मैचों में उन्होंने करीब 80 की औसत से रन बनाए और कुल 240 रन उनके बल्ले से निकले। इस दौरान एक शतक और एक अर्धशतक भी देखने को मिला। इससे पहले साउथ अफ्रीका के खिलाफ भी विराट बेहतरीन लय में नजर आए थे। अनुभवी खिलाड़ी का इस तरह फॉर्म में होना टीम इंडिया के लिए 2027 वर्ल्ड कप की तैयारी के लिहाज से बेहद सकारात्मक संकेत है।

तेज गेंदबाजी विभाग में बढ़ा विकल्पों का भरोसा

हालांकि आंकड़ों में विकेट ज्यादा नजर नहीं आए, लेकिन भारतीय तेज गेंदबाजों ने कई मौकों पर न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों को खुलकर खेलने नहीं दिया। मोहम्मद सिराज, हर्षित राणा, अर्शदीप सिंह और प्रसिद्ध कृष्णा ने मिलकर दबाव बनाए रखा। खास तौर पर अर्शदीप सिंह ने सीमित मौके में तीन विकेट लेकर अपनी उपयोगिता साबित की। इसका मतलब साफ है कि जसप्रीत बुमराह के अलावा भी भारत के पास अब कई ऐसे पेसर्स हैं, जो बड़े टूर्नामेंट में जिम्मेदारी उठा सकते हैं।

हार में छिपी है आगे की राह

इस सीरीज ने टीम इंडिया को आईना दिखाने के साथ-साथ भविष्य की संभावनाएं भी दिखाई हैं। कुछ नई प्रतिभाओं का उभरना, सीनियर खिलाड़ियों का फॉर्म में रहना और तेज गेंदबाजी में गहराई बढ़ना, ये सभी संकेत बताते हैं कि अगर सही फैसले लिए गए, तो 2027 वनडे वर्ल्ड कप तक टीम इंडिया खुद को और मजबूत बना सकती है।

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