
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
BNP Election Strategy Bangladesh: बांग्लादेश की राजनीति में 3 दशकों तक वर्चस्व रखने वाली शेख हसीना व खालिदा जिया जैसी 2 महिला नेताओं के बिना यह पहला चुनाव होने जा रहा है। इसमें शेख हसीना की अवामी लीग के भाग लेने पर प्रतिबंध लगाया गया है। हसीना की प्रतिद्वंद्वी खालिदा जिया का दिसंबर में निधन हो गया।
अब उनके 17 वर्ष बाद लंदन से आए बेटे तारिक रहमान के नेतृत्व में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) चुनाव में जीत का सपना देख रही है। इस समय बांग्लादेश में बीएनपी सबसे बड़ी पार्टी है, जो राष्ट्रवाद, लोकतंत्र की पुनस्र्स्थापना, भ्रष्टाचार विरोध तथा आर्थिक सुधारों पर जोर दे रही है। बांग्लादेश की पार्लियामेंट जातीय संसद की 350 सीटों में से अधिकांश पर बीएनपी चुनाव लड़ रही है।
बीएनपी भारत की मित्र नहीं है। उसने अपने घोषणापत्र में कहा है कि हम मित्रता करेंगे, गुलामी नहीं। उसका लक्ष्य विभिन्न देशों से व्यापार बढ़ाना, सार्क का पुनर्जीवन, आसियान की सदस्यता पाने का प्रयास करना, मुस्लिम देशों से संबंध मजबूत करना, म्यांमार से आने वाले रोहिंग्या शरणार्थियों का पुनर्वसन करना, बंगाल की खाड़ी में अपनी नौसेना को मजबूत करना आदि है।
बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी दूसरे नंबर की पार्टी है, जिसका नेतृत्व शफीकुर रहमान कर रहे हैं। इस पार्टी पर पहले प्रतिबंध लगाया गया था परंतु अब वह सक्रिय हो उठी है। इसके अलावा नेशनल सिटिजन पार्टी है, जिसका गठन 2024 में हुए छात्र व युवा आंदोलन से हुआ। युवा नेता नाहिद इस्लाम इसका नेतृत्व कर रहे हैं।
संविधान व न्याय-व्यवस्था में सुधार, पारदर्शी शासन, शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य को यह पार्टी महत्व दे रही है। इस पार्टी का आधार सीमित है। इसके अलावा डेमोक्रेटिक यूनाइटेड फ्रंट व नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट भी मैदान में हैं। शेख हसीना को भारत में शरण दिए जाने से बांग्लादेश में भारत विरोधी भावना भड़की है।
बांग्लादेश पर व्यापार व वीजा प्रतिबंध लगाने से भी असंतोष फैला है। भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर ने खालिदा जिया की दफन विधि के समय वहां के विदेशमंत्री तारिक रहमान से भेंट की। इसके अलावा जमात-ए- इस्लामी के नेताओं से भी चर्चा जारी है। व्यापार तथा अन्य कारणों से बांग्लादेश चाहेगा कि भारत से संबंधों में सुधार आए।
यह भी पढ़ें:-नवभारत विशेष: अमेरिका से ट्रेड डील में फायदा या समर्पण
चुनाव के बाद ही इस तरह का प्रयास होगा। इतने पर भी वहां की भारत विरोधी ताकतें चीन और पाकिस्तान की ओर झुक रही हैं। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार का संचालन कर रहे मोहम्मद यूनुस का रवैया लगातार भारत विरोध का रहा है। उन्होंने चीन से भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को कब्जे में लेने और बांग्लादेश के चिटगांव बंदरगाह का इस्तेमाल करने का ऑफर दिया था।
इसके अलावा पाकिस्तानी सेना के प्रतिनिधि मंडल को भी उन्होंने बांग्लादेश में बुलाया। चीन व पाक से रिश्ते जोड़ने के साथ ही वह भारत विरोधी बयानबाजी करते रहे हैं। बांग्लादेश में चुनाव के बाद कैसी सरकार आती है, उसके रवैये पर आपसी संबंध निर्भर रहेंगे,
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा






