
दिल्ली रेलवे स्टेशन भगदड़ हादसा (सौ.डिजाइन फोटो)
नवभारत डिजिटल डेस्क: मानव प्राण अमूल्य होते हैं लेकिन लगता है देश में इंसान की जान की कोई कीमत ही नहीं रह गई है. जानलेवा भगदड़ की घटनाएं होती हैं. लोग बेमौत मारे जाते हैं, मुआवजा घोषित कर दिया जाता है और फिर वही ढाक के तीन पात! आगे से ऐसे हादसे न होने पाएं इसकी कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं की जाती. किसी व्यक्ति की ऐसी असमय मौत उसके परिजनों को शोक सागर में डुबो देती है. कुछ का घर का मुखिया चल बसता है जिससे परिवार पूरी तरह बेसहारा हो जाता है।
कुंभ मेले की भगदड़ के बाद अधिक समय नहीं बीता था कि दिल्ली रेल्वे स्टेशन पर मची भगदड़ से 18 लोगों की प्लेटफार्म पर ही कुचलकर मौत हो गई तथा 12 घायल हो गए। विपक्ष का आरोप है कि इस हादसे की खबर मिलने पर भी रेलमंत्री घटनास्थल पर कई घंटे देर से पहुंचे, भगदड़ क्यों मची इसके बारे में दिल्ली पुलिस के अनुसार प्रयागराज नाम से शुरू होने वाली 2 ट्रेनों के एक जैसे नाम होने से लोग कन्फ्यूज हो गए और ट्रेन पकड़ने के लिए यात्रियों में भगदड़ मची। प्रयागराज एक्सप्रेस पहले से ही प्लेटफार्म नंबर 14 पर थी. इस ट्रेन के प्लेटफार्म नंबर 16 पर आने की घोषणा से भ्रम पैदा हो गया और भीड़ भागने लगी।
रेलवे ने ट्रेन के गलत अनाउंसमेंट से अफरातफरी मचने की बात से साफ इनकार करते हुए कहा कि प्लेटफार्म पर पहले ही काफी भीड़ थी. इस दौरान एक यात्री सीढि़यों पर फिसल गया जिससे भगदड़ मच गई. प्लेटफार्म पर भीड़ की वजह यह बताई गई कि प्रयागराज जानेवाली 4 ट्रेनें थीं जिनमें से 3 लेट थीं. सभी ट्रेनों के यात्रियों की खचाखच भीड़़ प्लेटफार्म 14 पर थी. ऐसी हालत में भीड़ को नियंत्रित करनेवाला कोई नहीं था. भीड़ के बीच फंसा व्यक्ति बचकर निकल नहीं सकता. एक धक्का लगा तो लोग एक दूसरे पर गिरते चले जाते हैं।
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लगातार 2 सप्ताहांत से कुंभ जानेवालों की भीड़ बढ़ रही है लेकिन स्टेशन प्रशासन ने कोई कंट्रोल रूम बनाना जरूरी नहीं समझा. भीड़ की वजह से कन्फर्म टिकट वाले भी बोगी में नहीं घुस पा रहे थे. खासतौर पर मेले-ठेले या किसी धार्मिक आयोजन में जानेवाली श्रद्धालुओं की बड़ी तादाद को ध्यान में रखते हुए हर स्तर पर पुख्ता सुरक्षा इंतजाम किए जाने चाहिए क्योंकि दुर्घटना कभी भी हो सकती है. क्या इस हादसे से रेल विभाग कोई सबक लेगा ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न होने पाए!
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा






