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नवभारत डिजिटल डेस्क: पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, मागा का मत्तलब है मेक अमेरिका ग्रेट अगेन, लेकिन अब अमेरिका ‘वागा’ की राह पर चल निकला है। भारतीय-अमेरिकी उद्योगपति विनोद खोसला ने यह बात कही। ‘वागा’ का अर्थ है- व्हाइट अमेरिका ग्रेट अगेन, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और टेस्ला व स्पेस एक्स के प्रमुख एलन मस्क की नीतियां केवल गोरे अमेरिकनों को रोजगार व ऊंचे पद देकर अमेरिका को तथाकथित रूप से महान बनाने की हैं। ट्रंप भूल गए कि एशिया के लोगों ने उनके देश को समृद्ध बनाने में बहुत बड़ा योगदान दिया। चीन के श्रमिकों ने अमेरिका का रेल नेटवर्क बनाया था। भारतीयों ने आईटी, चिकित्सा सेवा, बायोटेक्नोलॉजी, शिक्षा, उद्योग, अंतरिक्ष क्षेत्र में बहुमूल्य योगदान दिया। कल्पना चावला और सुनीता विलियम्स जैसी भारतीय एस्ट्रोनॉट के कृतित्व की कैसे भूला जा सकता है।
भारतीय मूल के हरगोविंद खुराना ने जीन या गुणसूत्रों की खोज पर नोबल प्राइज पाया था। फिल्म अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा के बड़े भाई भरत सिन्हा नासा में वैज्ञानिक थे। अमेरिकी राजनीति में अमी बेरा, राजा कृष्णमूर्ति, रो खन्ना, श्री थानेदार, पूर्व उपराष्ट्रपति कमला हैरिस, पूर्व गवर्नर निक्की हेली, प्रमिला जयपाल, तुलसी गवार्ड का बड़ा नाम है। विवेक रामास्वामी एक बड़े उद्यमी हैं। एलन मस्क के वर्णभेदी रवैये पर नाराजगी जताते हुए वेंचर कैपिटलिस्ट विनोद खोसला ने भारतीय मूल के तकनीशियनों और वैज्ञानिकों से कहा है कि वह एलन मस्क की टेस्ला व स्पेस एक्स कंपनी छोड़कर उनके साथ काम करने आ जाएं।
‘हमने कहा, ‘अमेरिका की तरक्की में भारतीय ब्रेन की बड़ी भूमिका है। गूगल के प्रमुख सुंदर पिचई, माइक्रोसॉफ्ट के प्रमुख सत्या नडेला तथा आईबीएम के अरविंद कृष्ण का ट्रंप को चुनाव जिताने और फंड जमा करने में बड़ा योगदान रहा, लेकिन अब ट्रंप और एलन मस्क एहसानफरामोशी पर उतर आए हैं। प्रतिभाशाली भारतीयों को कम योग्यता वाले गोरों से कम वेतन दिया जाता है।
‘ पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, ट्रंप की राय है कि असली अमेरिकी वह है जिसका जन्म अमेरिका में हुआ हो, वह गोरा और ईसाई होना चाहिए। ऐसे लोगों को ही वह बढ़ावा देंगे।’
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा






