निशानेबाज: चंद्रयात्रा का सुनीता का अरमान पति की अनुमति पर अभियान

Indian Astronaut: सुनीता विलियम्स के जीवन, भारतीय आस्था और लोककथाओं को जोड़ता यह व्यंग्य लेख चांद, गणेश और अंतरिक्ष के बीच एक अनोखा संवाद रचता है।
Sharpshooter: Sunita's dream of a lunar journey depends on her husband's permission for the mission
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नवभारत डिजिटल डेस्क: पड़ोसी ने हमसे कहा, 'निशानेबाज, हमें जीतेंद्र व बबीता की पुरानी फिल्म 'फर्ज' का गीत याद आता है जिसके बोल हैं- बार-बार दिन ये आए, बार-बार दिल ये गाए, तुम जियो हजारों साल ये मेरी है आरजू हैपी बर्थ डे टु यू, हैपी बर्थ डे टु सुनीता!' हमने कहा, 'लगता है, भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स की खबर पढ़कर आपको इस गाने की याद आ गई।

नासा से रिटायर होने के बाद वह दिल्ली आईं और उन्होंने कहा कि भारत आना उनके लिए घरवापसी जैसा अनुभव है। भगवान गणेश के प्रति वह अपार श्रद्धा रखती हैं और चंद्रमा पर जाना चाहती हैं लेकिन उनके पति वहां जाने की इजाजत नहीं देंगे।' पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, इसे कहते हैं पतिव्रता नारी! सुनीता अपने अमेरिकी पति की अनुमति बगैर चंद्रमा पर नहीं जाएंगी।

यदि उनके पति फिल्म 'पाकीजा' का गीत गाते हुए कहेंगे- 'चलो दिलदार चलो, चांद के पार चलो' तभी वह चंद्रमा पर जाने की सोचेंगी !' हमने कहा, 'एक दिक्कत और है। गणेशभक्त सुनीता विलियम्स को मालूम होना चाहिए कि गणेशजी और चंद्रमा के बीच छत्तीस का आंकड़ा है। कथा है कि गणेशजी एक बार अपने वाहन मूषक (चूहे) पर बैठकर जा रहे थे। इसे देखकर चंद्रमा को हंसी आ गई।

गणेशजी ने नाराज होकर चंद्रमा को शाप दे दिया कि जो कोई चतुर्थी के दिन चंद्रमा का दर्शन करेगा उस पर झूठा दोष या मिथ्या कलंक लगेगा। भगवान कृष्ण ने चौथ का चंद्रमा देख लिया तो उन पर स्यामंतक मणि चुराने का मिथ्या आरोप सत्राजित ने लगा दिया था। आगे की कथा पुराणों में पढ़ लीजिए।' पड़ोसी ने कहा, 'निशानेबाज, सुनीता विलियम्स भी अपने साथ गणेश प्रतिमा अंतरिक्ष में ले गई थीं।

उन्होंने साढ़े 9 महीने अर्थात 608 दिन अंतरिक्ष में बिताए थे। 9 बार स्पेसवॉक किया अर्थात 672 घंटे 6 मिनट तक अंतरिक्ष में चहल कदमी की। कल्पना चावला के बाद वह नासा की दूसरी भारतीय मूल की एस्ट्रोनॉट रही हैं। वह स्व। दीपक पंड्या की बेटी हैं। उनका कहना है कि अब घरवापसी का समय आ गया है।' हमने कहा, 'सही बात है। अब अंतरिक्ष जाने की क्या जरूरत! चांद-सितारे यहीं से दिखाई देते हैं। एक गीत है मैंने चांद और सितारों की तमन्ना की थी, मुझको रातों की सियाही के सिवा कुछ ना मिला!'

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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