निशानेबाज: ट्रंप ने दिखाया गजब का खेल, हड़पेगा वेनेजुएला का तेल

Venezuela Oil Crisis: वेनेजुएला के तेल भंडार, ट्रंप की वैश्विक रणनीति और अमेरिका की ताकत की राजनीति पर तीखा विश्लेषण। जानें BRICS देशों की प्रतिक्रिया और भारत का रुख।
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वेनेजुएला का तेल (सौ. डिजाइन फोटो)
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नवभारत डिजिटल डेस्क: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, आपको अभिनेता गोविंदा की एक फिल्म का गाना याद होगा- छूछूंदर के सिर पे ना भाए चमेली, कहां राजा भोज, कहां गंगू तेली! इस समय खाड़ी देशों के शेख और सुलतानों से लेकर रूस के राष्ट्रपति पुतिन तक तेल के बादशाह या तेली राजा बने हुए हैं। अमेरिका ने भी इसलिए वेनेजुएला के राष्ट्रपति को गिरफ्तार किया क्योंकि वहां के अपार तेल भंडार पर ट्रंप की नजर है।’ हमने कहा, ‘आपको मालूम होना चाहिए कि वही लोग सामर्थ्यवान माने जाते हैं जो रेत में से भी तेल निकाल लेते हैं।

ट्रंप ने पहले ही नारा दिया था- ड्रिल बेबी ड्रिल! अमेरिका के पावरफुल प्रेसीडेंट ट्रंप ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो पर मनगढ़ंत आरोप लगाकर उन्हें पूरी तैयारी के साथ घेर कर गिरफ्तार करवाया और ब्रुकलिन जेल में कैद कर दिया जो पृथ्वी का नर्क कहलाता है। वहां से शायद ही कोई जिंदा लौटता है।’

पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, दुनिया में सबसे बड़ा तेल भंडार वेनेजुएला में है लेकिन वह सिर्फ 1 प्रतिशत ही तेल निकाल पाता है। वहां की राष्ट्रीय तेल कंपनी के पास धन व तकनीक की कमी होने से वह बहुत कम तेल निकाल पाती है। अब वहां अमेरिका कंट्रोल करेगा और भरपूर तेल निकलेगा। इसके बाद वह मूल्यवान धातुओं व रेयर अर्थ के लिए ग्रीनलैंड पर भी कब्जा करेगा। यह है ट्रंप का मेक अमेरिका ग्रेट अगेन वाला प्लान! ब्रिक्स के देशों रूस, चीन, ब्राजील और द। अफ्रीका ने ट्रंप के इस कदम की तीखी आलोचना की है।

ब्रिक्स का सदस्य होने पर भी भारत ने इस मामले में सिर्फ चिंता जताई है। चिंता जताना एक सुरक्षित कूटनीतिक तरीका है। रूस-यूक्रेन युद्ध हो तो भी हम चिंता जताकर छुट्टी पा लेते हैं। भारत की चिंता से अमेरिका या रूस किसी को फर्क नहीं पड़ता। उनकी मनमानी चलती ही रहती है।’ हमने कहा, ‘कहावत है जिसकी लाठी उसकी भैंस? अमेरिका अपनी लाठी से दुनिया को हांकता हैं और सब लोग देखते रह जाते हैं। यूएन भी अमेरिका की वित्तीय मदद से चलता है उसका मुख्यालय न्यूयार्क में है। यह उम्मीद बिल्कुल मत कीजिए कि यूएन वेनेजुएला के मामले में कुछ बोलेगा। क्योंकि पानी में रहकर मगर से बैर नहीं किया जा सकता।’

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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