नवभारत विशेष: UV किरणों से आई कीट-पतंगों की शामत

High UV Index: देश में UV इंडेक्स खतरनाक स्तर पर, बढ़ती गर्मी से इंसान, फसल और जीव-जंतु प्रभावित। ग्लोबल वार्मिंग के असर साफ नजर आ रहे हैं।
Navbharat Special: Insects and moths are doomed by UV rays
Extreme UV Heat India ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Extreme UV Heat India: भारत में इस समय यूवी (अल्ट्रावायलेट) किरणों ने जीना हराम कर दिया है। इंसान गर्मी के कारण परेशान है, तो जीव जंतु असमय ही काल के ग्रास बन रहे हैं। हालत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिन दिनों में पंखे चलते थे।

उन दिनों एसी पूरी ताकत के साथ चलाए जा रहे हैं। यह ग्लोबल वार्मिंग के कारण है। जब तापमान सुहावना होना चाहिए, तो 42 डिग्री हो गया है। यूवी किरणों ने सड़क पर अघोषित कर्फ्यू जैसी स्थिति पैदा कर दी है।

इस समय देश में यूवी इंडेक्स 13 दर्ज हुआ है, यह डब्लूएचओ के अनुसार खतरे का उच्चतम स्तर है। सिमटती बसंत ऋतु का ही परिणाम है कि इस वक्त पराबैंगनी किरणें जिन्हें यूवी किरणें भी कहते हैं, ने मई-जून की गर्मी ला दी है।

इस समय युवी किरणें इतनी प्रखर हैं कि 35 डिग्री में भी 40 डिग्री को गर्माहट महसूस हो रही है और वातावरण में नमी नहीं होने के कारण फसलें तो अर्ध विकसित जैसी हो ही रही हैं, जिन जीव-जंतुओं के माध्यम से प्रकृति संतुलित रहती है, वे भी असमय मर रहे हैं।

मरने वालों में सबसे अधिक तितलियां, भौर, पीली बरं और शहद की रानी मधुमक्खी हैं। वर्तमान स्थिति यह है कि दिन निकलने के साथ ही गर्मी आरंभ हो जाती है।

इसका नतीजा यह हुआ है कि जो फसलें अप्रैल में आती थी, वह फरवरी के आखिर में ही आ गई हैं। तरबूज, खरबूज, ककड़ी और कैरी उत्तर भारत में हर कहीं बहुतायत में उपलब्ध हैं। इनमें ग्रीष्म ऋतु वाला स्वाद और मिठास नहीं है।

कृषि विज्ञानियों को चिंता है कि जिस तरह से गेहूं कम मीठा तथा सूखा सा हो रहा है, उससे आगामी फसलें किस तरह से स्वस्थ रहेंगी। सरसों की भी दशा यही बताई जा रही है।

यूवी किरणें प्रकृति को संतुलित करने वाले उन जीवों पर घातक सिद्ध हो रही हैं, जिनके माध्यम से पर्यावरण संतुलन सधता है। एक फूल, खाद्यान्न की बालियां, वृक्षों की कोमल पत्तियों तथा अन्य माध्यमों से जो परागण होता था, वह यूवी किरणों के कारण नहीं के बराबर हुआ। तितलियां, बरं, भौर तथा मधुमक्खी आदि मूलतः ठंडी जलवायु के अनुकूल होते हैं।

इस बार उन्हें गर्मी जैसी सर्दी के कारण फूलों आदि से अधिक लाभ नहीं मिले, जिससे उनके टिश्यू कमजोर रह गए, बसंत के आरंभ होते ही गर्मी आरंभ हो गई, तो उनके रोएंदार शरीर पर धूप से निकली यूवी किरणें घातक बन गई।

हवा के साथ उड़ने वाले जीवों की सूंघने की क्षमता भी गर्मी के कारण कम हो जाती है, जिससे भी वह अपना भोजन तलाशने में काफी परेशान होते हैं। धरती के भीतर रहने वाले कीड़े यथा चीटियां, केंचुए आदि भी एकाएक गर्म हुई धरती के कारण उस प्रक्रिया से नहीं गुजर पाए, जिससे धरती भुरभुरी होती है।

गर्मी से फूल जल्दी नष्ट हुए, कच्चे अनाज के दानों से मिलने वाले पोषण में भयंकर कमी से दोनों ही प्रकार के जीवों पर मुसीबत आन पड़ी। कीड़े और जीव मनुष्य जीवन को संतुलित करने के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण होते हैं, जिस तरह से हमारा जीवन चक्र है, उसी तरह से धरती पर कीटों का भी एक सुरक्षा चक्र है। इसी के कारण हमारी पृथ्वी के वृक्ष बच्चे हैं, पशु-पक्षी बचे हैं, जल बचा है, इंसान भी इनकी मेहरबानी से बचा हुआ है।

गर्मी से इंसान भी परेशान

यूवी किरणों का स्रोत सूर्य ही है। इस तरह से यूवी किरणें मौत का पर्याय बन रही हैं, जो आने वाले मौसम और प्रकृति को संतुलित करने वाले जीवों के लिए खतरनाक हो सकती हैं।

माना जाता है कि यूवी की मात्रा 8 से 10 के बीब होनी चाहिए, इससे ऊपर जाने पर यह हर प्रकार के जीव के लिए खतरनाक है। अत्यधिक एयर कंडीशनरों का प्रयोग ही नहीं, हानिकारक गैस छोड़ने वाले पदार्थ भी जमीन से करीब 45 किलोमीटर की दूरी पर ओजोन परत को अगर हानि पहुंचाएंगे तो तय है कि ओजोन परत से रुकने वाली यूवी किरणें हमारे लिए एक नई मुसीबत बन जाएंगी।

लेख-मनोज वाष्र्णय के द्वारा

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