असम: World War II का जिंदा बम मिलने से हड़कंप, तिनसुकिया में सेना ने टाला बड़ा हादसा, सुरक्षित किया डिफ्यूज

Tinsukia WWII bomb: असम के तिनसुकिया जिले के एक रिहायशी इलाके में दूसरे विश्व युद्ध के समय का बिना फटा बम मिला है। भारतीय सेना की विशेष टीम ने समय रहते इसे डिफ्यूज कर एक बड़ा हादसा टाल दिया है।
Assam: Panic Erupts After Discovery of Live WWII-Era Bomb; Army Averts Major Disaster in Tinsukia, Causing Commotion in the Region
असम में मिला दूसरे विश्व युद्ध का जिंदा बम, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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Assam Tinsukia WWII bomb: असम के तिनसुकिया जिले में एक बार फिर युद्ध के इतिहास का एक खतरनाक हिस्सा सामने आया है। जिले के लेडो-लेखापानी क्षेत्र में एक रिहायशी इलाके से दूसरे विश्व युद्ध के समय का एक जिंदा बम बरामद किया गया है। इस विस्फोटक के मिलने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और स्थानीय लोगों के बीच दहशत और अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया। हालांकि, भारतीय सेना ने तुरंत कार्रवाई करते हुए समय रहते एक बड़ा हादसा टाल दिया।

रिहायशी इलाके में मिला जंग लगा विस्फोटक

जानकारी के अनुसार, यह बम पूरी तरह से जंग खा चुका था और एक घनी आबादी वाले क्षेत्र में पाया गया। सूत्रों के मुताबिक, बरामद किया गया बम आकार में काफी बड़ा था। जिसकी लंबाई करीब 12 इंच और व्यास 6 इंच बताया गया है। जैसे ही स्थानीय लोगों ने इस संदिग्ध वस्तु को देखा और प्रशासन को सूचित किया, भारतीय सेना ने तत्काल प्रभाव से सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू कर दिया और अपनी विशेष टीम को रवाना किया।

भारतीय सेना की रेड शील्ड सैपर्स टीम का एक्शन

बम की सूचना मिलते ही भारतीय सेना की विशेष बम निरोधक इकाई रेड शील्ड सैपर्स मौके पर पहुंची। टीम ने पहुंचते ही सबसे पहले पूरे इलाके की घेराबंदी कर ली ताकि कोई भी व्यक्ति विस्फोटक के करीब न जा सके। सुरक्षा के कड़े इंतजाम करते हुए सेना ने आसपास रहने वाले सभी निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। यह कदम इसलिए उठाया गया ताकि विस्फोटक को स्थानांतरित करते समय यदि कोई अनहोनी हो तो जनहानि से बचा जाए।

नियंत्रित विस्फोट से बम को किया गया डिफ्यूज

सेना के विशेषज्ञों ने बम का बारीकी से निरीक्षण किया और इसकी पॉवर को देखते हुए इसे रिहायशी इलाके से दूर एक सुनसान और सुरक्षित स्थान पर ले जाने का फैसला किया। वहां एक नियंत्रित ऑपरेशन चलाकर बम को सफलतापूर्वक डिफ्यूज कर दिया गया। राहत की बात यह रही कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार का नुकसान या जनहानि नहीं हुई। सैन्य अधिकारियों ने इस ऑपरेशन को बेहद ही सुरक्षित तरीके से अंजाम दिया।

पूर्वोत्तर भारत का ऐतिहासिक युद्ध कनेक्शन

यह घटना उस ऐतिहासिक दौर की याद दिलाती है जब द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पूर्वोत्तर भारत का यह क्षेत्र सैन्य गतिविधियों का एक प्रमुख केंद्र हुआ करता था। विशेषज्ञों का कहना है कि उस समय के कई बिना फटे विस्फोटक (UXO) आज भी समय-समय पर इस क्षेत्र में सामने आते रहते हैं।

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