जासूसी पर ईरान के कड़े तेवर! इजरायल के लिए काम करने के आरोप में दो नागरिकों को दी फांसी

Iran Spies Mossad: ईरान ने इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद के लिए जासूसी करने के आरोप में दो लोगों को फांसी दी। ईरान में फांसी की सजा में वृद्धि हुई है जिसे संयुक्त राष्ट्र चिंतित है।
Iran Spies: Two Men Executed For Israel Mossad Intel
ईरान में दो लोगों को फांसी (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Iran Spies Mossad Intel: ईरान ने इजरायल के लिए जासूसी करने के आरोप में दो लोगों को फांसी दे दी है। यह कार्यवाही ऐसे समय में हुई जब मध्य पूर्व में तनाव काफी ज्यादा है। इन दोनों पर देश की अहम जानकारी बाहरी लोगों तक पहुंचाने का आरोप था। कोर्ट ने जासूसी के इस मामले को संजीदगी से लिया और मौत की सजा सुनाई।

रिपोर्ट के मुताबिक, एक शख्स पर इस्फहान के नतांज परमाणु साइट से खुफिया जानकारी जुटाना का आरोप था। ईरान की न्यायपालिका ने स्पष्ट कहा कि दोनों इजरायल और मोसाद के साथ सहयोग के दोषी पाए गए। इसके बाद ही दोनों को फांसी दी गई और इसे ईरान में बड़ी सुरक्षा कार्यवाही माना गया। इस घटना ने दुनिया भर में मानवाधिकारों पर बहस छेड़ दी है।

अगर पिछले घटनाक्रम पर नजर डालें तो यह ईरान में घटी कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले 20 अप्रैल को भी ईरान में दो लोगों के इसी तरह के जासूसी आरोपों में फांसी दी थी। उन लोगों पर भी मोसाद के नेटवर्क का हिस्सा होने और हमले की योजना बनाने का आरोप था।

संयुक्त राष्ट्र की गहरी चिंता

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विभाग ने भी ईरान में हो रही इन घटनाओं पर चिंता जाहिर की है। रिपोर्ट के मुताबिक 28 फरवरी के बाद से अब तक ईरान में कम से कम 21 लोगों को फांसी दी जा चुकी है। इसके अलावा 4000 से ज्यादा लोगों को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किया गया है।

संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि फांसी पर रोक लगनी चाहिए और निष्पक्ष सुनवाई होनी चाहिए। दूसरी तरफ मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि ईरान में सरकार विरोधी लोगों पर जानबूझकर सख्त कार्रवाई हो रही है। विरोध प्रदर्शन के दौरान भी लोगों के खिलाफ ऐसे ही सख्त कदम उठाए गए थे।

राष्ट्रीय सुरक्षा पर ईरान का सख्त रवैया

ईरान अपने फैसले पर अडिग है और लगातार राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर सख्त कार्यवाहियां कर रहा है। कुछ अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इन आरोपों को गलत बताया है लेकिन ईरान किसी की भी नहीं सुन रहा है। ऐसे में साफ है कि देश में सुरक्षा और शक्ति दोनों मुद्दे चर्चा के केंद्र में हैं।

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