'कुछ भी परमानेंट नहीं', संजय जाधव के बयान से सियासी हलचल तेज, बगावत के संकेतों ने बढ़ाई अटकलें

Maharashtra Politics: शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय जाधव के बयान से सियासत गरमाई। ‘कुछ भी स्थायी नहीं’ और ‘इकोनॉमिक कैलकुलेशन’ जैसे शब्दों ने पार्टी बदलने की अटकलों को हवा दी।
'Nothing is Permanent': Sanjay Jadhav's Statement Sparks Political Turmoil; Signs of Rebellion Fuel Speculation.
महाराष्ट्र राजनीति, संजय जाधव,(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Sanjay Jadhav Statement: मुंबई महाराष्ट्र में पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे गुट के एक सांसद संजय जाधव ने बागी होने के संकेत दिए हैं। उन्होंने अपने एक बयान में कहा है कि राजनीति में कुछ भी परमानेंट नहीं होता है। जाधव ने कहा है कि आज भले ही वे उद्धव ठाकरे के साथ हैं, लेकिन कल कहां होंगे। यह पता नहीं है। उनके इस बयान के बाद परभणी में कई तरह की चचर्चाएं तेज हो गई है।

कुछ लोगों का कहना है कि जाधव पलटी मारने की तैयारी में हैं। जाधव ने परभणी में एक प्राइवेट हॉस्पिटल के उ‌द्घाटन के मौके पर अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर एक बड़ा शिगूफा छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि जिनकी वजह से मैं बड़ा हुआ, मैं उन्हें कभी धोखा नहीं दूंगा, लेकिन अभी के हालात बदल गए हैं।

चुनावों में इकोनॉमिक कैलकुलेशन बहुत जरूरी होते हैं, इसलिए यह कहना नामुमकिन है कि आगे क्या होगा। जाधव के बयान में 'इकोनॉमिक कैलकुलेशन और 'बदले हुए हालात' जैसे शब्दों के चयन के बाद राजनीतिक अटकलों का बाजार गर्म हो गया है। जाधव ने सीधे तौर पर पार्टी बदलने का लेकर किसी का नाम नहीं लिखा है, लेकिन ऐसे संकेत दिए है कि वह 'हालात के हिसाब से' भविष्य में कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं।

पाला बदलने की राजनीतिक गलियारों में चर्चा

पिछले कुछ दिनों से ऐसी अफवाहें चल रही हैं कि संजय जाधव, उद्धव ठाकरे का साथ छोड़ कर एकनाथ शिदि की शिवसेना या बीजेपी में शामिल हो सकते हैं। उनके नए बयान से इन अफवाहों को और बल मिला है। खास बात यह है कि जब पत्रकारों ने उनसे इस बारे में उनका स्टैंड पूछा, तो उन्होंने कैमरे पर और कुछ कहने से इंकार कर दिया। इस वजह से कन्फ्यूजन और बढ़ गया है।

ऑपरेशन टाइगर को लेकर उड़ी थी अफवाह

हाल ही में ऑपरेशन टाइगर को लेकर यह अफवाह उड़ी थी कि उद्धव गुट के आठ सांसदों ने डिप्टी सीएम शिदि के साथ सीक्रेट मीटिंग की थी। इस पर बवाल मचने के बाद कई सांसदों ने मातोश्री जाकर उद्धव के साथ वफादार रहने का विश्वास दिलाया था। हालांकि हिंदि ने इस तरह की किसी भी मीटिंग से खुद इंकार किया था।

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