- Hindi News »
- Special Coverage »
- On The Occasion Of 76th Republic Day There Should Be A Meaningful Debate On The Constitution
नवभारत डेस्क: 76वें गणतंत्र दिवस के मौके पर संविधान पर हो सार्थक बहस..!
उच्च कोटि की सुशासन व समावेशी राजव्यवस्था के मद्देनजर भारतीय संविधान के कई पहलुओं पर नजर डालना बेहद जरूरी है। मसलन भारत में असल व आधुनिक लोकतंत्र का प्रसार, धर्मनिरपेक्षतावाद और सामाजिक न्याय व अवसर की समानता।
- Written By: मृणाल पाठक

संसद भवन (डिजाइन फोटो)
नवभारत डेस्क: देश में संविधान के 75 साल के सफर पर संसद के शीतकालीन सत्र में जो दो दिन की बहस हुई, वह निश्चित रूप से स्वागत योग्य पहल थी; लेकिन संविधान के जिन-जिन पहलुओं पर वहां बहस की गई वह देश के पॉलीटिकल थियेटर का एक महज एक स्टीरियोटाइप आख्यान ही था। इस बहस में भारतीय संविधान के एक संपूर्ण, ईमानदार और समालोचनात्मक बौद्धिक विमर्श का सर्वथा अभाव था। बहस में राजनीतिक पार्टियों के आरोपों-प्रत्यारोपों और राजनीतिज्ञों में अपने को इतिहास पुरुष तथा अपने प्रतिद्वंद्वी को गलत साबित करने की होड़ ही दिखाई पड़ी।
उच्च कोटि की सुशासन व समावेशी राजव्यवस्था के मद्देनजर भारतीय संविधान के कई पहलुओं पर नजर डालना बेहद जरूरी है। मसलन भारत में असल व आधुनिक लोकतंत्र का प्रसार, इसका राष्ट्रवाद, सांस्कृतिक विभिन्नता व भौगोलिक अखंडता, धर्मनिरपेक्षतावाद और सामाजिक न्याय व अवसर की समानता।
मोटे सैद्धांतिक तौर पर भारतीय संविधान की व्याख्या इन चारों कसौटियों को ध्यान में रखकर की जा सकती थी। भारत में लोकतंत्र को लेकर ये बातें जरूर कही गई कि एक दल ने आपातकाल लाकर लोकतंत्र का गला घोंटा तो दूसरे ने कहा कि आपातकाल का वह दौर तो एक निर्धारित समय के लिए ही था, लेकिन अभी तो एक दशक से देश में अघोषित आपातकाल लगा है।
सम्बंधित ख़बरें
विजय चौक पर अद्भुत नजारा: सेनाओं और CAPF बैंड ने बांधा समां, राष्ट्रपति-पीएम के साथ रोमांचित हो उठा हिंदुस्तान
संगठन, अनुशासन और एकता की मिसाल: IMA प्रदेशाध्यक्ष ने संभाजीनगर शाखा को बताया आदर्श मॉडल
किस राज्य की झांकी गणतंत्र दिवस परेड में टॉप पर? सर्वश्रेष्ठ झांकियों के आए परिणाम
अकोला में कामगार भवन के लिए 16.61 करोड़ की मंजूरी, तकनीक से योजनाएं लोकाभिमुख बनाने पर जोर
दोनों बातें ठीक है पर इसे लेकर दोनों ही पक्षों को यह भी आत्मावलोकन करना होगा कि हमारा लोकतंत्र देश के राजनीतिक दलों के मठाधीशों के मनमर्जी की कोठरी में क्यों कैद है? हमारा लोकतंत्र देश में सभी लोगों की लोकतांत्रिक भागीदारी और सर्वथा योग्य उममीदवारी को कहीं से भी प्रोत्साहित क्यों नहीं करता?
किसी भी लोकतंत्र में व्यक्ति पूजा और राजनीतिक दलों के एकाधिकार के लिए जगह नहीं होनी चाहिए। अमेरिका में भी दो दलीय प्रणाली अस्तित्व में है, पर वहां अच्छी बात यह है कि कोई कितना भी लोकप्रिय राष्ट्रपति क्यों न हो, उसे अधिकतम दो बार ही इस पद को पाने का मौका मिलता है। भारत में लोकतंत्र की असलियत ये है कि कोई भी अपराधी, अज्ञानी, सामंत, भ्रष्टाचारी अपने सभी कुकृत्यों को इसकी आड़ में छिपा सकता है, यदि वह सत्ताधारी दल में शामिल हो जाता है।
भारत के राष्ट्रवाद की एक व्यापक रूपरेखा व सहमति संविधान के जरिये भारत के सभी दलों में मान्य होनी चाहिए। भारतीय संविधान में ये बात साफ साफ उच्चरित होनी चाहिए कि देश का विभाजन एक भयानक भूल थी और देश में अलगाववाद को किसी भी सूरत में पनपने से पहले कुचल देंगे।
धर्मनिरपेक्षता को सभी स्वीकार करें
भारतीय संविधान को लेकर तीसरा आधारभूत बिंदु धर्मनिरपेक्षता को लेकर है जिसका सभी दल अपनी अपनी सुविधा के मुताबिक मीमांसा करते आए हैं। असल में धर्मनिरपेक्षता संविधान के एक ऐसे मजबूत मूल सिद्धांत के रूप में सभी लोकतांत्रिक दलों में मान्य होनी चाहिए। इस मामले में सबसे बड़ा अपराध उनका है, जिन्होंने धर्मनिरपेक्षता को असल स्वरूप में लागू न करके सामुदायिक तुष्टीकरण को उसका विकल्प बना दिया।
इस तुष्टीकरण की सबसे बड़ी मिसाल मौलिक अधिकारों में अल्पसंखयकों को अपने धार्मिक शिक्षण चलाने के मिले मौलिक अधिकार से दिखती है। एक तरह से धर्मनिरपेक्षता का सबसे बड़ा अपमान संविधान में दर्ज है। इतिहासकार इरफान हबीब मानते हैं कि अल्पसंख्यकों को शिक्षण संस्थान चलाने का मौलिक अधिकार मिला है, पर इस संवैधानिक अधिकार का तकाजा ये है कि इसका पाठ्यक्रम भी सेकुलर हो।
एक राजनीतिक जमात सेकुलरवाद के नाम पर तुष्टीकरण और संविधान को फूलों की बगिया बताकर छद्म सेकुलरवाद को पोषित करता है तो दूसरी तरफ दूसरी जमात सेकुलरवाद को बुलडोज करके बहुसंख्यक पहचान की राजनीति के जरिये प्रतियोगी लोकतंत्र व सुशासन के सिद्धांतों का गला घोटता है। एक दल दूसरे पर संविधान को मटियामेट करने का आरोप लगाता है तो दूसरा प्रत्युत्तर में यह कहता है कि देश संविधान से चलेगा, शरिया से नहीं।
नवभारत विशेष से संबंधित ख़बरों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
समान नागरिक संहिता क्यों नहीं?
नीति निर्देशक सिद्धांतों के तहत भारतीय संविधान समूचे देश में समान नागरिक संहिता लाने की बात करता है पर सेकुलरपंथी इसे अमलीजामा पहनाने से क्यों घबराते हैं? संविधान के 75 साल के अवसर पर इन बातों की पूरी व्याख्या होनी चाहिए जो नहीं हुई। संविधान के चौथे आधारभूत सिद्धांत, सामाजिक न्याय, जिसका संविधान के प्रस्तावना में ‘अवसर की समानता के रूप में उल्लिखित’ है, वह भारत के व्यावहारिक लोकतंत्र और प्रशासनिक संरचना में कहीं दृष्टिगोचर नहीं होता।
सामाजिक न्याय, जो सांकेतिक रूप से केवल राजनीतिक, प्रशासनिक आरक्षण के प्रावधानों के इर्द गिर्द ही मंडराता रहा है, संविधान पर हुई बहस में कहीं उल्लिखित नहीं हुआ। क्योंकि सामाजिक न्याय के मूलभूत सिद्धांतों के क्रियान्वयन का महाकार्य देश की 80 फीसदी दलित, दमित, शोषित, पीड़ित और गैरजागरूक आबादी के व्यापक सशक्तीकरण के जरिये होना चाहिए।
लेख- मनोहर मनोज के द्वारा
On the occasion of 76th republic day there should be a meaningful debate on the constitution
Get Latest Hindi News , Maharashtra News , Entertainment News , Election News , Business News , Tech , Auto , Career and Religion News only on Navbharatlive.com
लेटेस्ट न्यूज़
Hormuz Strait पर अमेरिका का सरेंडर! ईरान के आगे ट्रंप हुए बेबस, इंटेलिजेंस रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
Apr 04, 2026 | 10:08 AMछत्रपति संभाजीनगर: ट्रेनों की बढ़ी रफ्तार, नांदेड़ रेल मंडल की बड़ी उपलब्धि, समयपालन और गति में रिकॉर्ड सुधार
Apr 04, 2026 | 10:07 AMलोकसभा में गूंजी ‘पंजाब 95’, दिलजीत दोसांझ ने शेयर किया वीडियो, फिर चर्चा में आई फिल्म
Apr 04, 2026 | 10:03 AMMumbai में नाले सफाई पर संकट: मीठी नदी की सफाई में देरी से बढ़ी चिंता, बीएमसी की तैयारी पर उठे सवाल
Apr 04, 2026 | 09:53 AMDhurandhar 2 Collection: ‘धुरंधर 2’ का बॉक्स ऑफिस पर धमाका जारी, 1000 करोड़ क्लब से बस कुछ कदम दूर
Apr 04, 2026 | 09:39 AMकेरल जीतने के लिए पार्टियों ने उतारी टीम महाराष्ट्र! BJP से फडणवीस तो कांग्रेस से इस नेता ने संभाली कमान
Apr 04, 2026 | 09:38 AMकेरलम चुनाव: राहुल गांधी की 4 रैलियां और पीएम मोदी का मेगा रोड शो, आखिरी दौर के प्रचार में थमेगी सांसें!
Apr 04, 2026 | 09:37 AMवीडियो गैलरी

मस्जिद के वजू खाने की छत पर चढ़कर लहराया भगवा, शोभा यात्रा के दौरान तुगलकाबाद में मचा बवाल
Apr 03, 2026 | 10:27 PM
AAP में छिड़ा गृहयुद्ध! आतिशी ने राघव चड्ढा को घेरा, बोलीं- क्या आप मोदी से डरकर लंदन भाग गए थे- VIDEO
Apr 03, 2026 | 10:24 PM
दिल्ली AIIMS में VIP कल्चर! 3 साल से धक्के खा रही महिला का वीडियो वायरल, बोली- यह गरीबों के लिए नहीं
Apr 03, 2026 | 10:20 PM
Bihar में सिस्टम फेल? डिप्टी सीएम के सामने फूट-फूटकर रोया फौजी
Apr 03, 2026 | 10:17 PM
योगी सरकार में घूसखोरी नहीं चलेगी, सलोन विधायक अशोक कोरी ने बीच सभा में एसडीओ की लगाई क्लास; वीडियो वायरल
Apr 03, 2026 | 10:13 PM
नालंदा भगदड़ में मासूम बच्ची की मौत पर भड़के पप्पू यादव, सिस्टम की विफलता पर उठाए सवाल, सरकार को दी चेतावनी
Apr 03, 2026 | 01:54 PM














