विजय चौक पर अद्भुत नजारा: सेनाओं और CAPF बैंड ने बांधा समां, राष्ट्रपति-पीएम के साथ रोमांचित हो उठा हिंदुस्तान

Vijay Chowk Delhi: गुरुवार शाम को दिल्ली के विजय चौक पर बीटिंग द रिट्रीट सेरेमनी हुई, जिसके साथ ही चार दिवसीय गणतंत्र दिवस समारोह का समापन हो गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इस समारोह में मौजूद थीं।
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विजय चौक पर बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Beating Retreat Ceremony: गुरुवार शाम को दिल्ली के विजय चौक पर बीटिंग द रिट्रीट सेरेमनी हुई, जिसके साथ ही चार दिवसीय गणतंत्र दिवस समारोह का समापन हो गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इस समारोह में मौजूद थीं। समारोह की शुरुआत सशस्त्र बलों द्वारा राष्ट्रपति को राष्ट्रीय सलामी देने के साथ हुई। इसके बाद तिरंगा झंडा फहराया गया और राष्ट्रगान बजाया गया। तीनों सशस्त्र बलों के बैंड ने 'कदम कदम बढ़ाए जा' की धुन बजाकर समारोह की शुरुआत की।

तीनों सशस्त्र बलों के बैंड ने CAPF बैंड के साथ मिलकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के सामने भारतीय धुनें बजाईं। वायु सेना के बैंड ने MIG-21 फाइटर जेट की आकृति बनाई, जिसे पिछले साल रिटायर कर दिया गया था। नौसेना के बैंड ने वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ मनाने के लिए तीन आकृतियां बनाईं।

विजय चौक पर जश्न का माहौल

बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी के दौरान विजय चौक के आसपास की सभी प्रमुख इमारतों को रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया था। वहीं, उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, तीनों सशस्त्र बलों के प्रमुख, अन्य केंद्रीय मंत्री और नागरिक इस समारोह में मौजूद थे।

इस बार सेरेमनी में क्या था खास?

इस साल की बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी की एक खास बात यह है कि विजय चौक पर बैठने की जगहों का नाम भारतीय संगीत वाद्ययंत्रों के नाम पर रखा गया है। इनमें बांसुरी, डमरू, एकतारा, तबला, वीणा, सितार, शहनाई, संतूर, सरोद, पखावज, नगाड़ा और मृदंगम जैसे वाद्ययंत्र शामिल हैं। यह पहल भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान का प्रतीक है।

सैकड़ों वर्ष पुरानी है यह परंपरा

बीटिंग द रिट्रीट सेरेमनी की परंपरा राजाओं और सम्राटों के समय से चली आ रही है, जब सूर्यास्त के बाद दुश्मनी खत्म होने की घोषणा की जाती थी। बिगुल की आवाज सुनकर सैनिक लड़ना बंद कर देते थे और पीछे हट जाते थे। यह परंपरा 300 साल से भी ज्यादा पुरानी है। भारत के अलावा ब्रिटेन, कनाडा और संयुक्त राज्य अमेरिका सहित कई देशों में यह सेरेमनी होती है। भारत में यह 1950 के दशक में शुरू हुई थी।

बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी खास क्यों?

बीटिंग द रिट्रीट सेरेमनी मुख्यतः सेना के अपनी बैरक में लौटने का प्रतीक है। इस समारोह में भारत के राष्ट्रपति मुख्य अतिथि होते हैं। राष्ट्रपति के आने पर राष्ट्रीय सलामी दी जाती है और राष्ट्रगान 'जन गण मन' बजाने के बाद तिरंगा झंडा फहराया जाता है।

तिरंग फहराने के बाद ही तीनों सेनाओं के बैंड एक पारंपरिक धुन पर एक साथ मार्च करते हैं। तीनों सर्विस बैंड के परफॉर्मेंस के बाद, रिट्रीट बिगुल बजाया जाता है। फिर बैंडमास्टर राष्ट्रपति के पास जाते हैं और बैंड वापसी की इजाजत मांगते हैं। इसके साथ ही समारोह का समापन होता है।

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