नवभारत संपादकीय: महाराष्ट्र में परमाणु ऊर्जा की महाक्रांति, 4 कंपनियों से करार, 6.50 लाख करोड़ का निवेश
Maharashtra Nuclear Power Agreement: महाराष्ट्र सरकार ने रिलायंस, अदाणी, एनटीपीसी और ललितपुर पावर के साथ 25,400 मेगावाट परमाणु ऊर्जा उत्पादन के लिए ऐतिहासिक समझौता किया है।
- Written By: आकाश मसने
कंपनियों के करार करते मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (डिजाइन फोटो)
Maharashtra Nuclear Power Project: परमाणु ऊर्जा निर्माण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महाराष्ट्र सरकार ने 4 कंपनियों से सामंजस्य करार किया है, जिनमें रिलायंस इंडस्ट्रीज, अदाणी पावर लिमिटेड, ललितपुर पावर जनरेशन कंपनी व नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन (NTPC) का समावेश है। इस आशयपत्र समझौते के बाद प्रोजेक्ट की स्थापना और फिर उससे विद्युत आपूर्ति की दिशा में अगले कदम बढ़ाए जाएंगे जिसके लिए कुछ वर्ष प्रतीक्षा करनी होगी। सरकार प्रयास करे तो इस कार्य में शीघ्रता लाई जा सकती है।
6.50 लाख करोड़ का निवेश और 25,400 मेगावाट बिजली का लक्ष्य
इन समझौते के फलस्वरूप राज्य में 25,400 मेगावाट परमाणु ऊर्जा उत्पन्न होगी। इसके लिए लगभग 6.50 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा। देश में अब भी 70 प्रतिशत बिजली कोयला आधारित ताप औष्णिक विद्युत केंद्रों में बनती है। दूसरी ओर भारत ने 2070 तक कार्बन उत्सर्जन शून्य पर लाने का उद्देश्य घोषित किया है। इस संबंध में कोई ठोस योजना सामने नहीं आई है लेकिन अन्य विकल्पों की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है। परमाणु ऊर्जा स्वच्छ ऊर्जा होती है लेकिन देश के कुल ऊर्जा उत्पादन में परमाणु ऊर्जा का योगदान केवल 3 प्रतिशत के आसपास है। वर्तमान समय में भारत में 7 प्रमुख परमाणु ऊर्जा केंद्रों में 22 रिएक्टर हैं जो 6,780 मेगावाट बिजली का उत्पादन करते हैं।
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देश का पहला परमाणु केंद्र (तारापुर) महाराष्ट्र में है। केंद्र सरकार ने आगामी कुछ दशकों में 1 लाख मेगावाट परमाणु ऊर्जा निर्माण का लक्ष्य रखा है। इसे देखते हुए महाराष्ट्र में 25,000 मेगावाट परमाणु ऊर्जा बनाने का करार अत्यंत महत्व रखता है। महाराष्ट्र औद्योगिक क्षेत्र में अग्रणी राज्यों में से एक है। आगामी कुछ वर्षों में अनेक औद्योगिक केंद्र व डाटा सेंटर यहां स्थापित होंगे। कोयले से बिजली निर्माण में धुएं, राख आदि से वायु व जल प्रदूषण बढ़ता है इसलिए वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के बारे में विचार किया जा रहा है।
चुनौतियां और नए प्रोजेक्ट्स की राह
पेट्रोल-डीजल वाहनों का स्थान ई-कार व ई-स्कूटर ले रहे हैं। उनकी बैटरी चार्जिंग के लिए अधिक बिजली की आवश्यकता होगी। इसे देखते हुए भारत ही नहीं, अमेरिका, फ्रांस आदि देश भी परमाणु ऊर्जा को बढ़ावा देने में लगे हैं। परमाणु ऊर्जा के अलावा सौर ऊर्जा व पवन ऊर्जा को भी बढ़ावा देना होगा। बारिश व ठंड के मौसम में बादल छाए रहने से सौर ऊर्जा में व्यवधान आता है तथा पवन ऊर्जा वहां तैयार हो सकती है जहां हवा का निरंतर तेज बहाव हो। इसके विपरीत परमाणु ऊर्जा 24 घंटे विद्युत पूर्ति कर सकती है इसलिए उद्योगों के लिए उसका विशेष उपयोग है। कोकण में जैतपुर जैसे विद्युत प्रकल्प की स्थापना का जनता ने तीव्र विरोध किया था। इसलिए उसे बनाने में विलंब हो रहा है। इस समय किए गए परमाणु ऊर्जा करार के अनुसार रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग में बिजलीघर बनेंगे।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा
