नवभाारत विशेष: PM Modi का मिशन Life, सोच-समझकर जीवनयापन भी योग है

PM Modi Mission LiFE: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 'मिशन LiFE' और योग का दर्शन मिलकर दुनिया को अत्यधिक उपभोगवाद से बचाकर सचेत और जिम्मेदार जीवन जीने का एक नया वैश्विक मार्ग दिखा रहे हैं।
PM Modi Prataprao Jadhav
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव (डिजाइन फोटो)
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Yoga Philosophy And Environment: अत्यधिक उपभोग की वैश्विक चुनौती से निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व ने 'मिशन LIFE' (लाइफस्टाइल फ़ॉर एनवायरनमेंट) के जरिए एक सशक्त दिशा प्रदान की है। COP26 में, प्रधानमंत्री ने एक ऐसे सिद्धांत को सामने रखा, जो योग के दर्शन से गहराई के साथ जुड़ा हैः 'आज जरूरत है सचेत और सोच-समझकर उपयोग करने की, न कि बिना सोचे-समझे और विनाशकारी तरीके से उपभोग करने की।' प्रधानमंत्री ने नागरिकों को प्रोत्साहित किया कि वे जान-बूझकर ऐसे उपभोग को सीमित करें, जिनसे बचा जा सकता है, जैसे ईंधन बचाना, अनावश्यक ऊर्जा का उपयोग कम करना, और गैर-जरूरी खर्चों पर दोबारा विचार करना।

उन्होंने हमें याद दिलायाः 'हर छोटा-बड़ा प्रयास मायने रखता है, ठीक वैसे ही जैसे हर एक बूंद से घड़ा भरता है।' ये विचार योग के बुनियादी सिद्धांतों से गहराई से जुड़े हुए हैं। योग दर्शन 'अपरिग्रह' यानी अनावश्यक चीजों को जमा करने से बचना और 'संतोष' यानी अपनी असली जरूरतों से संतुष्ट रहना, की बात करता है। ये सिद्धांत मिलकर एक ऐसी सोच पैदा करते हैं, जो लोगों को अंधाधुंध उपभोग से दूर सचेत जीवन की ओर प्रेरित करती है। योग हमें निष्क्रय उपभोक्ता से बदलकर इस धरती का जिम्मेदार रखवाला बनाता है।

योग से व्यवहार में होता है बदलाव

पृथ्वी पर इंसानी जरूरतों को पूरा करने के लिए तो काफ़ी संसाधन हैं, लेकिन इंसान की असीमित लालच को पूरा करने के लिए नहीं। योग प्रकृति के साथ हमारे आपसी जुड़ाव की भावना को गहरा करके इस जागरूकता को फिर से जगाने में मदद करता है। योग का अभ्यास धीरे-धीरे हमारे व्यवहार को भीतर से बदल देता है। यह मन की बेचैनी को शांत करता है, आज की दुनिया, जो पल भर के सुख और अत्यधिक उपभोगवाद से संचालित होती है, उसमें योग वह आंतरिक स्पष्टता पैदा करता है, जिसकी जरूरत हमें अपनी असली जरूरतों और कभी न खत्म होने वाली इच्छाओं के बीच फर्क समझने के लिए होती है।

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण तथा आयुष, दोनों मंत्रालयों से जुड़े मंत्री के तौर पर, मैं हर दिन यह देखता हूं कि योग किस तरह गैर-संक्रामक रोगों (एनसीडी) के खिलाफ एक निवारक सार्वजनिक स्वास्थ्य साधन के रूप में काम करता है। शारीरिक गतिविधि, मानसिक संतुलन और अनुशासित जीवन शैली को बढ़ावा देकर, योग अस्वस्थ आदतों और अत्यधिक चिकित्सीय हस्तक्षेपों पर हमारी निर्भरता को कम करता है। इस प्रकार, योग न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य का एक मार्ग है, बल्कि यह व्यवस्था में जिम्मेदारीपूर्ण जीवन के लिए एक व्यावहारिक ढांचा भी है।

आज, जब योग दुनिया के लिए भारत के सबसे प्रभावशाली योगदानों में से एक बन गया है। यह स्वास्थ्य, सद्भाव और सामूहिक कल्याण की एक शक्तिशाली अभिव्यक्ति भी बन चुका है। जो योग एक प्राचीन सभ्यतागत प्रथा के रूप में शुरू हुआ था, वह आज एक वैश्विक आंदोलन बन गया है, जो भूगोल, राजनीति, भाषा और संस्कृति की सीमाओं से परे है। हम अपनी प्रतिबद्धता को योग मैट से आगे बढ़ाएं। आइए हम योग को केवल दैनिक अभ्यास के रूप में ही नहीं, बल्कि जीवन शैली के रूप में अपनाएं। एक ऐसी जीवन शैली जो सचेत उपभोग, आंतरिक अनुशासन और पारिस्थितिक जिम्मेदारी को प्रोत्साहित करती है। आइए हम प्रधानमंत्री मोदी के सचेत जीवन जीने के आह्वान पर काम करें और एक ऐसे भविष्य का निर्माण करें, जहां तरक्की और विकास को केवल हमारे उपभोग से नहीं, बल्कि हमारी जिम्मेदारी से जीने के तरीके से मापा जाए।

प्रधानमंत्री की सार्थक अपील

प्राकृतिक संसाधनों के जरूरत से ज्यादा दोहन से लेकर डिजिटल उपयोगिता पर अत्यधिक निर्भरता और अस्थिर जीवनशैली तक, आज आधुनिक समाज संतुलन से लगातार दूर होता जा रहा है। और इसी संदर्भ में, योग न केवल एक प्राचीन स्वास्थ्य अभ्यास के रूप में, बल्कि एक जिम्मेदार जीवन जीने के लिए एक कालातीत रूपरेखा के रूप में उभर कर सामने आता है। योग मानवता को आत्म-नियमन, संयम और सचेत विकल्पों की ओर एक शक्तिशाली मार्ग प्रदान करता है। यह हमें सिखाता है कि हमा अपने भीतर और अपने आस-पास की दुनिया के साथ सामंजस्य कैसे स्थापित करें।

- लेख आयुष मंत्रालय में केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव के द्वारा

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