नागपुर: चुनाव आचार संहिता के फेर में फंसा मनपा का बजट, अब जून के अंतिम सप्ताह में पेश होने की संभावना
Nagpur Municipal Corporation Budget 2026: नागपुर विधान परिषद उपचुनाव की आचार संहिता के कारण मनपा का बजट अटक गया है। चुनाव आयोग से अनुमति न मिलने पर अब यह बजट जून के अंत में पेश होगा।
- Written By: रूपम सिंह
नागपुर विधान परिषद, बजट (सोर्स- एआईज जनरेटेड इमेज)
Election Commission of India NMC Budget 2026: सोमवार को अचानक भारत निर्वाचन आयोग ने महाराष्ट्र विधान परिषद के ‘नागपुर स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्र’ में खाली पड़ी सीट के लिए उपचुनाव की घोषणा कर दी जिसका हश्र यह हुआ कि 4 वर्षों तक इंतजार के बाद मनपा में सत्ता स्थापित करने के बावजूद पहली स्थायी समिति के सभापति समय पर बजट पेश कर पाने में असमर्थ हैं। हालांकि मनपा की ओर से बजट पेश करने के लिए चुनाव आयोग को पत्र तो भेजा गया किंतु चुनाव आयोग से फटकार लगने के बाद अब स्थायी समिति ने आचार संहिता खत्म होने के बाद ही बजट पेश करने की मंशा जताई जा रही है।
स्थायी समिति के रुख को देखते हुए अब मनपा का आम बजट आचार संहिता खत्म होने के बाद जून के अंतिम सप्ताह में ही पेश हो सकेगा। तमाम प्रयास रहे नाकाम सूत्रों के अनुसार सोमवार को आचार संहिता लगते ही बजट पर लगे ग्रहण से सकते में आई स्थायी समिति ने आनन-फानन में मनपा आयुक्त के साथ बैठक कर चुनाव आयोग को अनुमति के लिए पत्र लिखने का निर्णय लिया।
सत्तापक्ष के निर्देशों के अनुसार प्रशासन ने जिलाधिकारी के माध्यम से चुनाव आयोग को पत्र तो भेज दिया किंतु पत्र में कुछ खामियां होने का मामला भी दूसरे दिन उजागर हुआ जिसके बाद मंगलवार को चुनाव आयोग को दूसरा पत्र भेजा गया। यहां तक कि किसी तरह से अनुमति प्राप्त करने के लिए वरिष्ठ नेताओं के साथ मंथन भी किया गया किंतु स्थायी समिति के तमाम प्रयास नाकाम रहे।
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सभापति, पदाधिकारी और पार्षदों में निराशा
जानकारों के अनुसार 4 वर्षों के बाद हुए आम चुनावों में भारी बहुमत के साथ जीतकर आई भाजपा के पार्षदों में शुरुआत से ही काफी उत्साह देखा जा रहा था। यहां तक कि पूर्ण बहुमत होने के कारण प्रभागों के विकास के लिए संतोषजनक निधि मिलने की भी आशा थी। चुनाव को 3 माह बीत जाने के बावजूद बजट में देरी होने के कारण कई पार्षदों द्वारा नाराजगी जताई जा रही थी।
बजट की तारीख तय होने के बाद भले ही कुछ दिनों के लिए सभापति, पदाधिकारी और पार्षदों ने अब जल्द विकास निधि मिलने की आशा जताई हो लेकिन उनकी आशाओं पर अब पानी फिरता दिखाई दे रहा है। बताया जाता है कि जून के अंतिम सप्ताह में आचार संहिता खत्म होगी जिसके बाद ही बजट के लिए विशेष सभा की सूचना जारी होगी। इसमें भी नियमों के अनुसार 3 दिनों का समय बर्बाद होगा।
जुलाई के बाद ही बन सकेंगे प्रस्ताव
बताया जाता है कि जून के अंतिम दिनों में भले ही बजट रखकर उसे सदन की मंजूरी मिल जाए कितु जुलाई में ही इसे आयुक्त की ओर से मंजूरी मिल सकेगी। इसके बाद ही विकास के प्रस्ताव तैयार हो सकेंगे, नियमों के अनुसार कोई भी प्रस्ताव बनाने के बाद उसे प्रशासकीय मान्यता के लिए कुछ समय देना अनिवार्य होता है जिसके बाद वित्तीय मंजूरी और बाद में टेंडर की प्रक्रिया होती है।
इस तरह से पूरा जुलाई भी इसी प्रक्रिया में खत्म होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। जुलाई के बाद ही वास्तविक कार्यों की शुरुआत हो सकेगी। ऐसे में 4 वर्षों बाद मनपा में शुरू हुई सत्तापक्ष की पहली पारी को काम का दमखम दिखाने के लिए केवल 3 माह का ही समय मिल सकेगा क्योंकि उसके बाद मनपा आयुक्त के रिवाइज बजट की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
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70 से अधिक पत्रों को बिना कार्यवाही लौटा चुका है आयोग
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि केंद्रीय सचिवालय कार्यालय प्रक्रिया नियमावली के अनुसार, आयोग को भेजे जाने वाले सभी सामान्य पत्र उपचुनाव आयुक्त, प्रधान सचिव या सचिव स्तर के अधिकारियों को संबोधित होने चाहिए, केवल ‘दुर्लभ से दुर्लभ’ मामलों में ही जब विभाग के सचिव को लगे कि मामला बेहद व्यक्तिगत प्रकृति का है, पत्र सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त या चुनाव आयुक्त के संज्ञान में लाए जाने चाहिए।
इसके बावजूद मौजूदा चुनावों के दौरान आयोग को मंत्रालयों और विभागों से सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त या चुनाव आयुक्त को संबोधित लगभग 70 ऐसे पत्र मिले जिन्हें आयोग ने नियमों के विरुद्ध मानते हुए बिना कोई कार्यवाही किए वापस लौटा दिया।
