नवभारत विशेष: बैंक भी उपलब्ध कराएं सरकारी बचत योजना

Government Savings Schemes: सरकारी बचत योजनाएं एफडी से बेहतर ब्याज देती हैं, फिर भी अधिकतर सिर्फ डाकघरों तक सीमित हैं। घटते डाकघरों के दौर में इन्हें सभी बैंकों में उपलब्ध कराना जरूरी हो गया है।
Navbharat Special: Banks should also offer government savings schemes.
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Best Government Saving Plans: बेहतर ब्याज देने वाली सरकारी बचत योजनाएं बैंकों के माध्यम से भी उपलब्ध होनी चाहिए, क्योंकि सरकार की कई ऐसी बचत योजनाएं हैं, जो बैंकों की फिक्स्ड डिपॉजिट की तुलना में अधिक व्याज देती हैं। लेकिन इनमें से केवल दो योजनाएं ही सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में उपलब्ध हैं-एक वरिष्ठ नागरिक बचत योजना और दूसरी पब्लिक प्रोविडेंट फंड, अन्य कई सरकारी योजनाएं जैसे सुकन्या समृद्धि योजना, राष्ट्रीय बचत पत्र, किसान विकास पत्र, महिला सम्मान बचत प्रमाणपत्र और पोस्ट ऑफिस मासिक आय योजना बैंकों की एफडी से बेहतर ब्याज देती हैं, पर ये फिलहाल केवल डाकघरों में ही उपलब्ध हैं।

चूंकि डाकघरों की संख्या घट रही है इसलिए बैंकों में योजनाएं और जरूरी हैं। सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की शाखाओं में सरकारी बचत योजनाएं उपलब्ध कराना जरूरी हो गया है। इसके अतिरिक्त, आरबीआई बांड भी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की सभी शाखाओं के माध्यम से उपलब्ध होने चाहिए।

कई सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक निजी बीमा कंपनियों के साथ जुड़कर उनकी पॉलिसियां बेच रहे हैं, जो उचित नीति नहीं है जबकि देश में सार्वजनिक क्षेत्र की एलआईसी उपलब्ध है। प्रत्येक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक की हर शाखा को एलआईसी की किसी इकाई से अनिवार्य रूप से संबद्ध किया जाना चाहिए।

इसी प्रकार सामान्य बीमा में भी सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों से अनिवार्य संबद्धता होनी चाहिए। साथ ही बैंक शाखाओं में स्पीड पोस्ट बुकिंग काउंटर भी होने चाहिए। इससे डाक विभाग का कार्यभार घटेगा और राजस्व बढ़ेगा, जनता को पास में सुविधा मिलेगी, बैंक को भी कमीशन मिलेगा, भारत सरकार ने 15.04.2025 के भारत के राजपत्र के माध्यम से बैंकिंग लॉज एमेंडमेंट एक्ट 2025 अधिसूचित किया, जिसमें धारा 10 से 13 के तहत बैंकों के सभी खातों और लॉकरों में चार तक क्रमिक नामांकन को सुविधा दी गई है।

यह सुविधा बहुत उपयोगी है, क्योंकि यदि खाता धारक के निधन से पहले पहला नामांकित व्यक्ति मर जाए, तो स्वतः दूसरा नामांकित बन जाएगा। यह सुविधा अब सभी सरकारी बचत योजनाओं में भी लागू की जानी चाहिए।

सभी सार्वजनिक क्षेत्र बैंक शाखाओं में डिमैट अकाउंट खोलने की सुविधा क्रमिक नामांकन सहित होनी चाहिए, कम से कम चुनिंदा शाखाओं में (यदि सभी में नहीं) डिमैट अकाउंट खोलने की सुविधा तो होनी चाहिए, क्रमिक नामांकन के साथ। सेबी द्वारा जिन चार संस्थाओं से सुझाव मांगे गए थे, उनमें से दो ने डिमैट में क्रमिक नामांकन के पक्ष में राय दी थी।

निजी कंपनियों/फर्मों में जमा राशि पर भी क्रमिक नामांकन अनिवार्य हो। अब समय आ गया है कि निजी कंपनियों/फर्मों आदि में की गई सभी जमाओं पर भी क्रमिक नामांकन अनिवार्य किया जाए। यह व्यवस्था जमाकर्ताओं के धन की सुरक्षा करेगी। साथ ही यह नामांकन पुराने/मौजूदा डिपॉजिट पर भी अनिवार्य किया जाए, क्रमिक नामांकन से कोर्ट केस घटेंगे समय और पैसा बचेगा।

यदि क्रमिक नामांकन को बैंक खातों के साथ-साथ डिमैट खातों, सरकारी बचत योजनाओं और निजी फर्मों कंपनियों के डिपॉजिट में भी लागू/अनिवार्य किया जाए, तो अदालतों में मुकदमों की संख्या काफी घटेगी। यदि डिमैट, सरकारी बचत योजनाओं और निजी जमा योजनाओं में क्रमिक नामांकन लागू करने हेतु नए कानून की आवश्यकता हो, तो वह बनाया जाए, यह सभी संबंधित पक्षों के हित में होगा, क्योंकि नामांकित के मृत्यु होने पर बार-बार नामांकन बदलवाने की औपचारिकताओं में जो सरकारी/बैंकिंग मानव-घंटे खर्च होते हैं, वे बचेंगे।

यह जमाकर्ता की जिम्मेदारी है कि वह ऐसे व्यक्ति/लोगों को नामांकित करे जिन पर वह भरोसा करता है कि मृत्यु के बाद वे धन/संपत्ति कानूनी उत्तराधिकारियों तक पहुंचाएंगे। बैंकों या संस्थाओं पर यह जिम्मेदारी नहीं डाली जा सकती कि वे नामांकित से धन लेकर कानूनी उत्तराधिकारियों तक पहुंचाने को सुनिश्चित करें।

-लेख सुभाष चंद्र अग्रवाल के द्वारा

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