
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Nashik Sadhugram Project: नासिक सिंहस्थ 2027 को तैयारियों के बीच ‘साधुग्राम’ के लिए पेड़ों की कटाई का मुद्दा गरमाया हुआ है। यह मामला फिलहाल नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के पास है। इस विवाद को सुलझाने और कुंभके बाद जमीन के सार्थक उपयोग के लिए प्रसिद्ध पर्यावरणविद् शेखर गायकवाड़ ने एक महत्वपूर्ण मसौदा (ड्राफ्ट) तैयार किया है।
साधुग्राम परियोजना को लेकर शहर में दो पक्ष आमने-सामने हैं। पर्यावरण प्रेमियों ने पेड़ों की कटाई को लेकर विरोध प्रदर्शन किया है, कुंभ मेला मंत्री गिरीश महाजन ने शहर में 50,000 नए पेड़ लगाने की घोषणा की है ताकि पर्यावरण का संतुलन बना रहे। प्रशासन के सामने मुख्य चुनौती यह है कि कुंभ मेले के समापन के बाद इस जमीन का उपयोग कैसे किया जाए ताकि यह विवाद का केंद्र न बने।
‘आपला पर्यावरण’ संस्था के प्रमुख शेखर का मानना है कि साधुग्राम की जमीन को कुंभ के बाद 12 वर्षों के लिए लावारिस नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया है कि जिन जगहों पर मलबा पड़ा है, वहां दो विशाल ‘जर्मन हँगर’ बनाए जाएं।
एक हैंगर आध्यात्मिक प्रवचनों के लिए हो, जबकि दूसरे में ‘आर्ट गैलरी’ के जरिए अंगूर, प्याज और पैठणी साड़ी जैसी पहचान को दुनिया के सामने रखा जाए। नक्षत्रवन-सांस्कृतिक केंद्रों का संगम प्रस्ताव में नासिक से जुड़े रामायण के प्रसंगों जैसे शूर्पणखा की नाक काटना, सीता हरण और जटायु प्रसंग को विशेष सेट के माध्यम से जीवंत करने की बात कही गई है।
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इसके अलावा, खाली जमीन पर ‘राशिवन’ और ‘नक्षत्रवन’ विकसित करने का सुझाव दिया गया है। इससे तपोवन क्षेत्र एक स्थायी धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र में बदल जाएगा, जिससे भविष्य के कुंभ मेलों के लिए भी एक विवाद रहित आधार तैयार होगा।
जर्मन हैंगर 1: आध्यात्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का केंद्र।
जर्मन हैंगर 2: नासिक की विशेषताओं और किलों की जानकारी वाली आर्ट गैलरी।
रामायण सेटः प्रमुख ऐतिहासिक प्रसंगों का सजीव चित्रण।
प्राकृतिक विकासः नक्षत्रवन और राशियन का निर्माण।






