निशानेबाज: देखो सरकार की सूरत और सीरत नेता ही जानते हैं चमचे की कीमत

मध्यप्रदेश देश का हृदय प्रदेश कहलाता है क्योंकि यह राज्य भारत के बीचोंबीच है, हृदय प्रदेश में भ्रष्टाचार भी दिल खोलकर किया जाता है. चूंकि भ्रष्टाचार सर्वत्र व्याप्त है। इसलिए मध्यप्रदेश में चर्चित व्यापम घोटाला हुआ था।
आज का निशानेबाज, मध्यप्रदेश व्यापम घोटाला
मध्यप्रदेश व्यापम घोटाला (सौै.डिजाइन फोटो)
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नवभारत डिजिटल डेस्क: पड़ोसी ने हमसे कहा, ‘निशानेबाज, मध्यप्रदेश देश का हृदय प्रदेश कहलाता है क्योंकि यह राज्य भारत के बीचोंबीच है. इस हृदय प्रदेश में भ्रष्टाचार भी दिल खोलकर किया जाता है. चूंकि भ्रष्टाचार सर्वत्र व्याप्त है इसलिए मध्यप्रदेश में चर्चित व्यापम घोटाला हुआ था. व्यापम का मतलब व्यावसायिक परीक्षा मंडल है. इसमें मंत्री से लेकर अधिकारी तक शामिल थे।’

हमने कहा, ‘पुरानी बात छोड़िए, नए घोटाले पर नजर डालिए. मध्यप्रदेश की मोहन यादव सरकार में 5 करोड़ का बरतन घोटाला हो गया. वहां के सिंगरौली जिले के महिला बाल विकास विभाग का यह मामला उजागर हुआ. जिला अधिकारी ने 1,500 आंगनबाड़ियों के लिए मनमाने दाम पर बरतन खरीदे जिसमें एक चम्मच की कीमत 810 रुपए बताई गई. इस हिसाब से 46,500 चम्मच 3 करोड़ 76 लाख, 65 हजार रुपए में खरीदे गए। इसी तरह परोसनेवाला सर्विंग चमचा (जो थोड़ा बड़ा होता है) प्रत्येक 1,348 रुपए की दर से 6,200 चमचे 83 लाख रुपए में खरीदे गए. पानी के हर जग का दाम 1,247 रुपए लगाते हुए कुल 3100 जग 38 लाख रुपए में खरीदे गए।’

हमने कहा, ‘जग या विश्व की बजाय भारत और उसमें भी मध्यप्रदेश की चर्चा कीजिए. खरीदारी करनेवाले अधिकारी के पीछे जरूर किसी नेता का हाथ होगा. भ्रष्टाचार का सिस्टम आपसी सहयोग से चलता है. जहां तक चम्मच की बात है, आपने ऐसे नेताओं के बारे में सुना होगा जो मुंह में चांदी का चम्मच लेकर पैदा होते हैं. नेता और चमचे का बड़ा पुराना नाता है. कितने ही कार्यकर्ता इस प्रयास में लगे रहते हैं कि नेता उन्हें अपना प्रियपात्र चमचा बना ले! वह बेशर्मी से कहते हैं कि हम तो आपके चमचे हैं. हमारे जरिए घपले-घोटाले की काली दाल को जितना चाहे घोट लीजिए।’

पड़ोसी ने कहा, ‘निशानेबाज, नेता के लिए चाटुकार, चापलूस और चालाक चमचा हमेशा उपयोगी व बेशकीमती रहा है. स्टील के चमचे को जिला अधिकारी ने चांदी के चम्मच से भी ज्यादा दाम पर खरीदा. तमाम नेताओं के चमचों को खुश हो जाना चाहिए कि उनका मूल्यमापन या वैल्यू इतना बढ़ गया. मध्यप्रदेश ने इसकी मिसाल कायम कर दी. 30-40 रुपए का चमचा 800-900 रुपए में खरीदा गया.’ हमने कहा, ‘शासन और प्रशासन के गुण-दोषों को देखने की बजाय मध्यप्रदेश में मोहन की मुरलिया की मधुर तान सुनिए मोहनदास करमचंद गांधी ने कहा था- बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो, बुरा मत बोलो!’

लेख -चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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