विकसित महाराष्ट्र ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का लक्ष्य, जनता ही उम्मीदों पर उतरेंगे खरे

आखिर विलंब से ही सही महाराष्ट्र की जनता के लाडले देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। 132 सीटों पर बीजेपी को प्रचंड जीत दिलाने वाले फडणवीस अत्यंत कर्मठ और आत्मविश्वास से ओतप्रोत नेता हैं।
विकसित महाराष्ट्र ही सीएम देवेंद्र फडणवीस का लक्ष्य, जनता की उम्मीदों पर खरा उतरेंगे
देवेंद्र फडणवीस (डिजाइन फोटो)
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नवभारत डेस्क: आखिर विलंब से ही सही महाराष्ट्र की जनता के लाडले देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। 132 सीटों पर बीजेपी को प्रचंड जीत दिलाने वाले फडणवीस अत्यंत कर्मठ और आत्मविश्वास से ओतप्रोत नेता हैं। पार्टी अनुशासन को सर्वोपरि माननेवाले देवेंद्र ने पिछली सरकार में 100 से अधिक विधायकों का साथ होने के बावजूद उपमुख्यमंत्रीपद स्वीकार कर त्याग की मिसाल पेश की थी जबकि महायुति के वास्तविक कर्णधार वे ही थे।

उनके कार्यकाल में राज्य में अनेक कल्याणकारी योजनाएं बनाई और लागू की गई। अनेक सूखा क्षेत्रों में वर्ष भर जलसुविधा शुरू की गई। लोडशेडिंग बंद हो गई। उन्होंने फसल बीमा योजना कुशलता से लागू की। समृद्धि महामार्ग में उनके अथक प्रयासों का फल है जिससे नागपुर से मुंबई का सफर 8 घंटे में संभव हो जाएगा।

उन्होंने वरली सीलिंक जैसा महत्वाकांक्षी प्रकल्प पूर्ण करवाया। नागपुर, पुणे व मुंबई में मेट्रो शुरू करवाने में उनकी उल्लेखनीय भूमिका रही। झोपड़ावासियों को जमीन के पट्टे दिलवाए। मराठा आरक्षण टिकाए रखने के लिए उन्होंने यथासंभव प्रयास किए।

सामर्थ्यवान युवा नेतृत्व

2014 से 2019 तक मुख्यमंत्री रहते हुए देवेंद्र फडणवीस ने अपने सामर्थ्यवान नेतृत्व की गहरी छाप छोड़ी। किसानों के प्रश्न सुलझाने के उन्होंने अथक प्रयास किए तथा सूखे की समस्या से छुटकारा दिलाने के लिए जलशिवार योजना शुरू की। किसानों को अतिरिक्त आय दिलाने के लिए पूरक योजनाएं प्रारंभ कीं।

उनका प्रयास रहा कि विदर्भ और मराठवाडा के वर्षा पर निर्भर किसान आर्थिक दृष्टि से सक्षम हो जाएं तथा आत्महत्या की नौबत न आने पाए। कृषि क्षेत्र के लिए शुरू की गई फडणवीस की योजनाएं सत्ता परिवर्तन के बाद शिथिल हो गई थीं। उम्मीद है कि उन पर फिर जोर दिया जाएगा क्योंकि राज्य में किसानों को कपास व सोयाबीन का उचित दाम नहीं मिल रहा है तथा बेमौसम बारिश से फसलों को क्षति पहुंची है।

आधुनिक चाणक्य कहलाए

पहले शरद पवार को राजनीति का चाणक्य कहा जाता था लेकिन विगत वर्षों में देवेंद्र फडणवीस ने विलक्षण राजनीतिक कौशल दिखाकर जनता की नजरों में यह खिताब पाया। शिवसेना और राकां को तोड़ने में उनकी भूमिका उल्लेखनीय रही इससे उद्धव ठाकरे और शरद पवार के पैरों तले से जमीन खिसक गई तथा महायुति बलवान होकर उभरी। जब 2014 में देवेंद्र पहली बार मुख्यमंत्री बने थे तो कहा जाने लगा था- केंद्र में नरेंद्र और महाराष्ट्र में देवेंद्र! महाराष्ट्र के सामाजिक, आर्थिक व औद्योगिक परिदृष्य की फडणवीस को गहरी जानकारी है। उन्होंने सरकारी कार्यालयों में समय के भीतर काम पूरा करने के लिए सेवा गारंटी कानून बनाया था।

प्रचंड आत्मविश्वास के धनी

मैं फिर से आऊंगा (मी पुन्हा येईन) कहनेवाले देवेंद्र को अपनी क्षमता पर पूरा भरोसा था। उन्होंने जो कहा, वह करके दिखाया। पार्टी नेतृत्व ने उन्हें जो भूमिका सौंपी उसे उन्होंने भलीभांति निभाया। पिछली शिंदे सरकार में उपमुख्यमंत्री रहने के बावजूद वह पावरफुल थे। अजीत पवार की फाइल पहले देवेंद्र के पास जाती थी और फिर शिंदे के पास! जून 2022 में हुए राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों में महाविकास आघाडी को जबरदस्त आघात लगा।

उसके उम्मीदवार हार गए। इसके पीछे देवेंद्र की कुशल रणनीति थी। उन्होंने उनके खिलाफ साजिश रचनेवालों को भी बख्श दिया और कहा कि मैं बदला नहीं लूंगा, बल्कि बदलाव लाऊंगा। लोकसभा चुनाव में कमजोर प्रदर्शन के 6 माह बाद विधानसभा चुनाव में बीजेपी को इतना बहुमत दिलाने का श्रेय निश्चित रूप से देवेंद्र फडणवीस को है। महाराष्ट्र की जनता को उनके कर्मठ नेतृत्व से बहुत आशा-आकांक्षा है।

हर कोई मानता है कि वे केंद्र के सहयोग से राज्य को प्रगति के शिखर पर ले जाएंगे। महाराष्ट्र में जातिवादी राजनीति की बजाय विकास की राजनीति जरूरी है। इसलिए समन्वय व सुशासन के प्रयास होने चाहिए। आर्थिक अनुशासन लाना भी जरूरी है। लोग बेरोजगारी की समस्या का ठोस निदान चाहते हैं। आधारभूत ढांचे के विकास पर भी जोर देना होगा।

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी द्वारा

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